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सत्र में विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना, बिल पर चर्चा करनी चाहिए थी : स्पीकर
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विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता बोले-वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायकों को सदन में वापस आना चाहिए था
बजट सत्र की सार्थकता 106.90 फीसदी रही, 33 घंटे 48 चली कार्यवाही, 13 विधेयक पारित किए
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा, बजट सत्र के दौरान विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। सदन में महत्वपूर्ण बिल उनकी गैरमौजूदगी में पास हुए। जनहित के लिए बिल पर चर्चा के दौरान उन्हें मौजूद रहना चाहिए था, लेकिन वे गैरहाजिर रहे। वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायकों को वापस सदन में आना चाहिए। हिमाचल में स्पीकर के निर्देश पर निलंबित विधायकों के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि विधानसभा में दिए स्पीकर के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। विधानसभा में वीरवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही इस बार 33 घंटे 48 मिनट चली। इस दौरान सदन में 13 विधेयक पारित किए। सत्र की 106.90 फीसदी सार्थकता रही है। तीन गैर सरकारी प्रस्ताव भी आए थे, जिन्हें अस्वीकृत कर दिया। अल्प अवधि चर्चा के लिए एक प्रस्ताव मिला था, जिसे अस्वीकृत कर दिया। इस दौरान एक प्राइवेट सदस्य विधेयक भी आया, जिसे टिप्पणी के लिए सरकार को भेजा है। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर तीन घंटे 54 मिनट चर्चा हुई। कुल 14 विधायकों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इसलिए उनका प्रस्ताव सर्वसम्मति से अस्वीकृत हुआ। ब्यूरो
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बजट सत्र की सार्थकता 106.90 फीसदी रही, 33 घंटे 48 चली कार्यवाही, 13 विधेयक पारित किए
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा, बजट सत्र के दौरान विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। सदन में महत्वपूर्ण बिल उनकी गैरमौजूदगी में पास हुए। जनहित के लिए बिल पर चर्चा के दौरान उन्हें मौजूद रहना चाहिए था, लेकिन वे गैरहाजिर रहे। वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायकों को वापस सदन में आना चाहिए। हिमाचल में स्पीकर के निर्देश पर निलंबित विधायकों के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि विधानसभा में दिए स्पीकर के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। विधानसभा में वीरवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही इस बार 33 घंटे 48 मिनट चली। इस दौरान सदन में 13 विधेयक पारित किए। सत्र की 106.90 फीसदी सार्थकता रही है। तीन गैर सरकारी प्रस्ताव भी आए थे, जिन्हें अस्वीकृत कर दिया। अल्प अवधि चर्चा के लिए एक प्रस्ताव मिला था, जिसे अस्वीकृत कर दिया। इस दौरान एक प्राइवेट सदस्य विधेयक भी आया, जिसे टिप्पणी के लिए सरकार को भेजा है। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर तीन घंटे 54 मिनट चर्चा हुई। कुल 14 विधायकों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इसलिए उनका प्रस्ताव सर्वसम्मति से अस्वीकृत हुआ। ब्यूरो