... तो ये है सोनिया गांधी के दौरे का असली सच
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लोकसभा चुनाव के बाद भी लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस की सियासी फसल बचाने के लिए सोनिया गांधी हरियाणा की जमीन पर उतरीं। बेशक, कांग्रेस मुखिया ने किसानों के फसली नुकसान पर सांत्वना का मरहम लगाने की कोशिश की लेकिन, इसी बहाने कांग्रेस में जान फूंकने का प्रयास भी किया। रेतीली पगडंडी से होकर सोनिया खेत-खलिहान से होकर किसानों के बीच पहुंचीं।
केंद्र व राज्य में दस साल शासन करने वाली कांग्रेस विपक्षी दल के रूप में पहली बार ‘फील्ड’ में दिखी। राज्य के शीर्ष नेतृत्व के साथ पार्टी मुखिया ने भिवानी, झज्जर व करनाल संसदीय क्षेत्रों के दो दर्जन से ज्यादा गांवों का दौरा कर किसानों की दुख-तकलीफ सांझा की।
मोदी सरकार के नए भूमि अधिग्रहण बिल पर किसानों की बढ़ती नाराजगी के बीच सोनिया गांधी का हिंदी पट्टी के किसानों से हालिया संवाद के प्रयास के राजनीतिक मायने हैं। देश खासकर हिंदी पट्टी में किसान एक बड़ा व प्रभावशाली वोट बैंक है, ओलावृष्टि पीड़ितों के आंसू पौछने के बहाने कांग्रेस देश के सबसे बड़े वोट बैंक किसान तबके को अपने साथ जोड़ना चाहती है।
सांत्वना की राजनीति कांग्रेस की खिसकती सियासी जमीन को कितना मजबूती देगी, यह तो भविष्य की बात है। लेकिन, ओलावृष्टि प्रभावित किसानों के बीच एकाएक सोनिया गांधी के पहुंचने के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी जरूर बढ़ने की उम्मीद है।
न खट्टर को निशाना बनाया, न मोदी को
भूमि अधिग्रहण बिल पर उबल रहे राजनीतिक हालात के बीच यह माना जा रहा था कि सोनिया गांधी राज्य व केंद्र की भाजपा सरकार को निशाना बनाएंगी। पर, ऐसा नहीं हुआ। सोनिया गांधी ने केवल इतना कहा कि ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है। जिले के आठ गांवों के दौरे के दौरान सोनिया गांधी ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा।
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दस साल की सत्ता के बाद हरियाणा में विपक्ष के तौर नई पारी की शुरुआत करने वाली सोनिया गांधी ‘पिछली’ सोनिया से जुदा नजर आईं। अक्सर ऊंचे मंच और लोगों से दूरी बनाकर भाषण देने वाली कांग्रेस अध्यक्ष किसानों से सीधे मिलीं। गांव आर्यनगर में सोनिया ने महिलाओं से खुलकर बात की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पूरे समय गंभीर मुद्रा में दिखे तो किरण चौधरी, कुमारी शैलजा, श्रुति से सोनिया गांधी की बहुत कम बातचीत हुई।
हरियाणा में शायद यह पहला मौका होगा, जब सोनिया गांधी गांवों में मीडिया से रूबरू हुईं। घंटेभर के कार्यक्रम में सोनिया गांधी ने संक्षिप्त ही सही, तीन बार बात की।