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खेलो इंडिया यूथ गेम्स: हरियाणा के ड्राइवरों की बेटियों ने रचा इतिहास, सोनाक्षी और भावना ने वेट लिफ्टिंग में बनाया रिकॉर्ड
Wed, 08 Jun 2022 05:11 PM IST
ajay kumar
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 08 Jun 2022 05:11 PM IST
सार
झज्जर के जसोरखेड़ी में कप्तान पहलवान के पास दोनों खिलाड़ी भावना और सोनाक्षी ट्रेनिंग करती हैं। यहां से चार बच्चों ने हिस्सा लिया था, इनमें दो ने पदक हासिल किया है।
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रिकॉर्ड बनाने वालीं सोनाक्षी और भावना अपने पिता सुरेश और संजय के साथ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नाम करें न करें बेटे, पर नाम कमा एक दिन पिता का सिर फक्र से उठाती हैं बेटियां..। ये कहना है झज्जर के दो ड्राइवरों का। उस वक्त इन दोनों के आंखों में आंसू आ गए, जब दोनों बेटियों ने जीत के बाद अपने-अपने पिता के हाथों में पदक रखकर कहा, लो पापा थारी बेटियों ने पहले ही प्रयास में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पदक जीतकर नेशनल में नया रिकॉर्ड भी बना दिया। यह आप दोनों के त्याग का नतीजा है।
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झज्जर निवासी ड्राइवर पिता सुरेश ने बताया कि उसकी बेटी सोनाक्षी ने 64 किलो भारवर्ग के वेट लिफ्टिंग के स्नैच में 80 किलो वजन उठाकर तमिलनाडु की वाई. पूकनश्री का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। यह रिकॉर्ड उसने बोधगया में बनाया था। इससे पहले सोनाक्षी स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं। पहले ही प्रयास में बेटी ने रजत पदक हासिल किया है।
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वहीं भावना के ड्राइवर पिता संजय कुमार ने बताया कि 59 किलो भारवर्ग में उसकी बेटी ने स्नैच में 81 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ नया नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया है। उसने पश्चिम बंगाल की सुकर्णा एडक का 80 किलो का रिकॉर्ड तोड़ा है। यह रिकॉर्ड उन्होंने बोधगया में बनाया था। संजय ने बताया कि उसकी बेटी 12वीं की छात्रा है, वह खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है। उसने कभी 80 फीसदी से कम अंक अर्जित नहीं किए हैं।
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पिता के जज्बे को सलाम
सुरेश और संजय ने कहा वे सड़कों पर गर्मी, बरसात और सर्दी में गाड़ी दौड़ते हैं, ताकि हमारी बेटियां देश का नाम रोशन कर सके। खुद कमियों से समझौता कर लेते हैं लेकिन बेटियों को महसूस नहीं होने देते कि वे परेशान हैं। हमारी लाडो का अपनी मंजिल से ध्यान न हटे और वे देश के लिए पदक ला सकें। डाइट से लेकर हर छोटी बड़ी चीज का ध्यान रखते हैं। अब सपना है कि बेटियां ओलंपिक में पदक लेकर आएं, ताकि देश के साथ राज्य का भी नाम रोशन हो सके।
कप्तान पहलवान की शिष्या हैं दोनों
झज्जर के जसोरखेड़ी में कप्तान पहलवान के पास दोनों खिलाड़ी भावना और सोनाक्षी ट्रेनिंग करती हैं। यहां से चार बच्चों ने हिस्सा लिया था, इनमें दो ने पदक हासिल किया है। यह भावना का गांव भी है, यहां के लड़कों और लड़कियों को देखकर उनका वेट लिफ्टिंग के प्रति रूझान बढ़ा लेकिन सोनाक्षी झज्जर के लोहारहेडी की रहने वाली हैं। वहीं सोनाक्षी अपनी बुआ की बेटी को देखकर वेट लिफ्टिंग में आईं। उनकी बहन इस समय सीआरपीएफ में तैनात हैं। सोनाक्षी के घर से ट्रेनिंग सेंटर 4 से 5 किलोमीटर दूर है, रोजाना वह ट्रेनिंग के लिए सुबह और शाम जाती है।