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28 दिन मृत्यु शैय्या पर पड़े रहे छत्रपति, बयान तक नहीं लिया गया: अंशुल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Sep 2017 09:25 AM IST
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अंशुल छत्रपति
पिछले पंद्रह साल से पिता पत्रकार रामचंद्र छत्रपति केहत्या के आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए संघर्ष कर रहे उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने अब इनेलो, कांग्रेस और भाजपा सरकार पर तीखा वार किया है। उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकारों का सहयोग होता तो उनकेपिता को न्याय कब का मिल गया होता, लेकिन सरकारें तो हमेशा से ही वोट के लिए डेरामुखी के आगे नतमस्तक रही और आज भी नतमस्तक हैं।
अंशुल छत्रपति शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से रू-ब-रू थे। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष को सांझा किया, वहीं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सीबीआई की कार्रवाई की दिल खोलकर सराहना भी की।
पुलिस कार्रवाई पर बड़ा सवाल
अंशुल छत्रपति ने कहा कि 24 अक्तूबर 2002 को उनके पिता पर गोलियां बरसाई गईं। 21 नवंबर को उनका निधन हो गया। वह 28 दिन तक मृत्यु शैय्या पर रहे, जबकि 8 नवंबर 2002 तक तो उनकी हालत बहुत ही सामान्य हो रही थी। उनके अनुसार वे बार-बार पुलिस के पास धक्के खाते रहे कि कम से कम उनके पिता का बयान तो ले लिया जाए, वे अपने हत्या के आरोपियों के बारे में सब कुछ जानते हैं। लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। 8 नवंबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। वहां भी वे 21 नवंबर तक रहे, लेकिन फिर भी उनकी डाइंग स्टेटमेंट नहीं करवाई गई।
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अंशुल छत्रपति शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से रू-ब-रू थे। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष को सांझा किया, वहीं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सीबीआई की कार्रवाई की दिल खोलकर सराहना भी की।
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पुलिस कार्रवाई पर बड़ा सवाल
अंशुल छत्रपति ने कहा कि 24 अक्तूबर 2002 को उनके पिता पर गोलियां बरसाई गईं। 21 नवंबर को उनका निधन हो गया। वह 28 दिन तक मृत्यु शैय्या पर रहे, जबकि 8 नवंबर 2002 तक तो उनकी हालत बहुत ही सामान्य हो रही थी। उनके अनुसार वे बार-बार पुलिस के पास धक्के खाते रहे कि कम से कम उनके पिता का बयान तो ले लिया जाए, वे अपने हत्या के आरोपियों के बारे में सब कुछ जानते हैं। लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। 8 नवंबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। वहां भी वे 21 नवंबर तक रहे, लेकिन फिर भी उनकी डाइंग स्टेटमेंट नहीं करवाई गई।
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सीबीआई पर भी बनाया गया दबाव
Anshul Chatrapati
सीबीआई पर भी बनाया गया दबाव
अंशुल छत्रपति के अनुसार हाईकोर्ट ने जब 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए तो डेरा चैलेंज करता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक गया। वहां भी डेरे के अलावा हरियाणा सरकार ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले की पुलिस जांच संतोषजनक है, लिहाजा सीबीआई जांच की जरूरत नहीं बनती। मगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। उसके बाद जब सीबीआई जांच शुरू हुई तो वर्ष 2005 में दिल्ली में भारी संख्या में डेराप्रेमियों ने एकत्रित कर सीबीआई के खिलाफ प्रदर्शन किया। लेकिन सीबीआई अफसर डगमगाए नहीं।
भाजपा सरकार पर निशाना
पिता का केस तो अभी कोर्ट में पेंडिंग है, लेकिन अंशुल ने रेप पीड़ित साध्वियों को मिले न्याय पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने इन साध्वियों को सैल्यूट करते हुए कहा कि भाजपा सरकार आज ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जबरदस्त नारा देती है, तो अभी तक 15 साल बाद रेप पीड़ित साध्वियों ने न्याय की जो जंग जीती है, उस पर भाजपा के नेताओं ने अभी तक डेरामुखी से टकराने वाली उन रेप पीड़ित बेटियों का हौसला बढ़ाने के लिए दो शब्द क्यों नहीं कहे। सरकार ऐसी बेटियों के हौसले को सलाम करती, तो उनके समेत डर की वजह से अन्याय झेलने को मजबूर अन्य बेटियों का भी हौसला बढ़ता।
अंशुल छत्रपति के अनुसार हाईकोर्ट ने जब 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए तो डेरा चैलेंज करता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक गया। वहां भी डेरे के अलावा हरियाणा सरकार ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले की पुलिस जांच संतोषजनक है, लिहाजा सीबीआई जांच की जरूरत नहीं बनती। मगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। उसके बाद जब सीबीआई जांच शुरू हुई तो वर्ष 2005 में दिल्ली में भारी संख्या में डेराप्रेमियों ने एकत्रित कर सीबीआई के खिलाफ प्रदर्शन किया। लेकिन सीबीआई अफसर डगमगाए नहीं।
भाजपा सरकार पर निशाना
पिता का केस तो अभी कोर्ट में पेंडिंग है, लेकिन अंशुल ने रेप पीड़ित साध्वियों को मिले न्याय पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने इन साध्वियों को सैल्यूट करते हुए कहा कि भाजपा सरकार आज ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जबरदस्त नारा देती है, तो अभी तक 15 साल बाद रेप पीड़ित साध्वियों ने न्याय की जो जंग जीती है, उस पर भाजपा के नेताओं ने अभी तक डेरामुखी से टकराने वाली उन रेप पीड़ित बेटियों का हौसला बढ़ाने के लिए दो शब्द क्यों नहीं कहे। सरकार ऐसी बेटियों के हौसले को सलाम करती, तो उनके समेत डर की वजह से अन्याय झेलने को मजबूर अन्य बेटियों का भी हौसला बढ़ता।