मौत से आधा घंटे पहले कोरोना पॉजिटिव की आखिरी कॉल, बेटा- मुझे यहां से निकाल लो, मैं मर जाऊंगा
- रविवार सुबह कोरोना पॉजिटिव चुन्नी लाल ने अपने बेटे को फोन कर बताई थी समस्या
- मौत से आधा घंटे पहले किया था फोन, बेटा बोला- अस्पताल प्रबंधन ने नहीं दिया ध्यान
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पिता बेटा मैं तो मर गया.. बेटा मेरा दम निकल जाएगा थोड़ी देर में। मुझे जल्दी निकाल लो यहां से, मेरे हाथ-पैर सुन्न हो गए हैं। बस जल्दी निकाल लो... पापा आप हौसला रखो। बेटा बहुत हौसला रखा है, अब नहीं रखा जाता। पापा मैं आऊं वहां... बेटा जल्दी आ नारायण को लेकर मैं मर जाऊंगा।
जीएमसीएच-32 की पांचवीं मंजिल के कोरोना वार्ड में भर्ती चुन्नी लाल ने मरने से मात्र आधा घंटे पहले अपने बेटे को फोन किया था। चुन्नी लाल और उनके तीसरे नंबर के बेटे दीपक के बीच हुई बातचीत यह बताती है कि वह कितना परेशान थे। चुन्नी लाल ने अपने बेटे से फोन पर बातचीत में कहा था कि कोई नहीं सुन रहा है। मेरे हाथ पैर सुन्न हो गए हैं। किसी तरह यहां से ले जाओ, नहीं तो मैं मर जाऊंगा। यह मेरी आखिरी सांस समझ ले। दीपक ने रोते हुए बोला कि पापा आपको कुछ नहीं होगा, मैं किसी से बात करता हूं।
चुन्नी लाल के रिश्तेदार नारायण प्रसाद ने कहा कि दीपक ने अस्पताल प्रबंधन को फोन लगाया तो वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दीपक ने फिर अपने पिता को फोन किया। जब पूछा कि कोई चेकअप के लिए आया तो बताया बेटा कोई नहीं आया। दीपक पूछता रहा कि ऑक्सीजन आपके मुंह पर लगा है, लेकिन चुन्नी लाल के मुंह से उखड़ती सांस के साथ सिर्फ एक ही लाइन निकलती रही कि मुझे यहां से निकाल लो, नहीं तो मर जाऊंगा।
सूद धर्मशाला में भी देरी से हुई सुनवाई
नारायण प्रसाद ने बताया कि मंगलवार को सुबह चुन्नी लाल को जीएमसीएच-32 में दिखाया गया था। कोरोना टेस्ट के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद चुन्नी लाल को देर शाम सूद धर्मशाला में भर्ती कर दिया गया। मरीज की रात में ही तबीयत बिगड़ गई, लेकिन बुधवार शाम तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, बुधवार शाम जब तबीयत ज्यादा खराब हुई तो फिर जीएमसीएच-32 भेजा गया। इलाज में स्वास्थ्य विभाग शुरू से ही लापरवाही बरत रहा है।
कुछ दिन पहले भी एक महिला मरीज ने कहा था, मर जाऊंगी यहां
मौलीजागरां निवासी 55 वर्षीय सरोज रानी ने कुछ दिन पहले अपने बेटे को फोन कर कहा था कि बेटा यहां से ले जाओ.. नहीं तो मर जाऊंगी। सरोज रानी सेक्टर-48 के हॉस्पिटल में भर्ती थीं। उनके बेटे सुमित ने अस्पताल प्रबंधन पर ठीक से देखभाल न करने का आरोप लगाया था। कहा कि मां बेड से गिर गई, लेकिन कोई देखने वाला तक नहीं था। दुखद है कि मरीजों में बढ़ते तनाव के बावजूद प्रबंधन कोई देखभाल नहीं कर रहा है।