खुलासा : पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के 20 से अधिक शिक्षक साल भर नहीं लेते कक्षाएं, विद्यार्थियों को फिर भी पूरे अंक
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चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में 20 से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो सालभर कक्षाएं ही नहीं लेते। विद्यार्थियों को उनकी ओर से अंक भी पूरे दिए जाते हैं। मामला सामने आने से प्रशासन हैरान है। कुछ शिक्षकों को नोटिस जारी करने की तैयारी हो रही है तो कुछ के खिलाफ पर्याप्त सुबूत जुटाए जा रहे हैं। अफसरों ने साफ संदेश दे दिया कि नौकरी करनी है तो कक्षाएं लेनी होंगी।
हाल ही में अलग-अलग कोर्स के 5-6 विद्यार्थी पेक प्रशासन के पास गए और उन्होंने अपनी कॉपियां दोबारा जांचने की मांग की। कारण पूछने पर विद्यार्थियों ने बताया कि उनकी पढ़ाई के दौरान शिक्षकों ने कक्षाएं नहीं लीं। हमने सालभर पढ़ाई की और सबसे कम अंक मिले। वहीं जो विद्यार्थी पढ़ाई नहीं करते, उन्हें अंक अधिक मिल गए। इसके बाद जांच शुरू की गई। शिक्षकों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन गोपनीय जांच चल रही है।
कुछ शिक्षकों पर आरोप.. दिन में ही पी रहे शराब
पीयू के एक-दो शिक्षकों पर ड्रग प्रयोग करने के आरोप लगे थे जो सही साबित हुए और उसमें से एक शिक्षक ठीक भी हो गए। वह विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। अब शिकायत ये मिल रही है कि कुछ अन्य शिक्षक ऐसे हैं जो दिन में ही शराब पर रहे हैं जो बड़ी अनुशासनहीनता है। पेक प्रशासन ने इसके लिए निर्देश दिए हैं कि सभी लोग नियमों का पालन करें अन्यथा कार्रवाई होगी।
एक-एक परिवार में कई-कई शिक्षक
पेक 99 साल पुराना संस्थान है। इस संस्थान में वर्तमान में 3400 विद्यार्थी हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए 110 से अधिक शिक्षक हैं। कुछ शिक्षकों की तैनाती पिछले 20 से 25 साल में हुई है। इनमें से कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो कुछ वर्षों से विद्यार्थियों की कक्षाएं ही नहीं ले रहे हैं। यही नहीं भाई-भतीजावाद के जरिए भी कुछ भर्तियां हुई हैं यानी एक-एक परिवार से कई कई लोग यहां काम कर रहे हैं। किसी का मामा शिक्षक है तो किसी का चाचा। यह भर्तियां कैसे हुईं और किस नियम से हुई इस व्यवस्था में तो अधिकारी नहीं जा रहे हैं।
कुछ छात्रों की शिकायत मिली है कि कुछ शिक्षक सालभर कक्षाएं नहीं लेते और बिना पढ़ाए अंक दे रहे हैं। यह हैरत की बात है। इस प्रकरण की हम जांच करवा रहे हैं। जिन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, लेकिन उनके खिलाफ अभी साक्ष्य नहीं मिल पाए। जांच के बाद ही कार्रवाई कर पाएंगे। -प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक