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पंजाब विश्वविद्यालय: सीनेट की मनोनीत सूची में नाम न होने से कैंपस के कुछ भाजपाई हुए बागी, पुटा चुनाव में दिखाएंगे ताकत

Wed, 06 Oct 2021 11:50 AM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 06 Oct 2021 11:50 AM IST
सार

नाराज शिक्षकों का तर्क था कि वर्ष 2014 के बाद जो लोग भाजपा में आए, उन्हें स्थान दिया गया जबकि वर्षों से संघ की सेवा करने वाले पीछे छूट गए। लगातार पीयू में भाजपा खेमा टूटता नजर आ रहा है। उन्हें जोड़ने के लिए दिग्गज लगे हैं, लेकिन वे उन्हें मनाने में नाकाम हैं। नाराज लोग मनाने वालों पर ही आरोप लगा रहे हैं कि असली खेल तो उन्होंने ही करवाया है।  

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Some BJP members of Panjab University Rebelled Due to Absence of Their Name in Senate Nominated List
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में भाजपा खेमा एक होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उनमें दूरियां बढ़ाने का काम सीनेट चुनाव की मनोनीत सूची ने कर दिया। सूची में नाम न आने पर कुछ भाजपाई शिक्षक बागी हो गए हैं। वे पुटा चुनाव में अपनी ताकत दिखाने की बात कह रहे हैं। यही नहीं, उनका दूसरा आक्रोश यह भी है कि जिन लोगों को सीनेट में शामिल किया गया, उन पर बार-बार मेहरबानी हो रही है। उन्हें इनाम स्वरूप कई पद बांटे गए। यह बात उन्होंने संघ के पदाधिकारियों से लेकर भाजपा नेताओं तक को बताई है।

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मनोनीत सदस्यों की सूची को आए लगभग 10 दिन हो गए। सूची में जैसे ही भाजपा के शिक्षकों ने अपने नाम खोजना शुरू किए तो वे नाम न पाकर हैरान हो गए क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनका नाम हर हाल में आएगा। इसके बाद शिक्षकों ने नाराजगी जताना शुरू कर दिया। फिजिक्स विभाग के एक शिक्षक ने जहां कमेटियों से अपना नाम वापस ले लिया। वहीं विज्ञान संकाय के दो शिक्षकों ने यह आरोप लगाया कि कांग्रेस के खेमे में जो लोग मलाई खाते रहे, उन्हें सूची में जगह दी जबकि वे संघ में काफी समय से हैं। यही नहीं एक ही परिवार के दो रिश्तेदारों को शामिल कर दिया गया।
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आरोप, वर्षों से सेवा करने वालों को नहीं दी तवज्जो
कला संकाय के भी कुछ शिक्षक नाराज हो गए। उनका तर्क था कि वर्ष 2014 के बाद जो लोग भाजपा में आए, उन्हें स्थान दिया गया जबकि वर्षों से संघ की सेवा करने वाले पीछे छूट गए। लगातार पीयू में भाजपा खेमा टूटता नजर आ रहा है। उन्हें जोड़ने के लिए दिग्गज लगे हैं, लेकिन वे उन्हें मनाने में नाकाम हैं। नाराज लोग मनाने वालों पर ही आरोप लगा रहे हैं कि असली खेल तो उन्होंने ही करवाया है। 
कुल मिलाकर भाजपा के घर में चल रहा घमासान शांत नहीं हो रहा। कांग्रेस खेमा इसी माहौल के बीच सेंध लगाने की तैयारी कर रहा है। वह पुटा चुनाव में इसी के जरिए जीत हासिल करने की बात कह रहा है। यही कारण है कि भाजपा अभी तक कोई मजबूत चेहरा सामने नहीं ला पाई और न किसी से गठबंधन हुआ। 


जानकारों का तो यह भी कहना है कि कैंपस में भाजपा के नीति निर्माताओं के साथ इस बार गठबंधन होता नहीं दिख रहा क्योंकि वे जिसके साथ गठबंधन करते हैं, वोट उसके विपरीत पड़ते हैं। हालांकि भाजपा का दावा है कि उनका पूरा परिवार सलामत है जिसे गिले-शिकवे थे, वे दूर कर दिए गए। सभी लोग एक मंच के नीचे हैं। पुटा चुनाव में भी वह बेहतर प्रदर्शन करेंगे। 

हारे चेहरों को देनी चाहिए थी जगह
मोदी मंत्रिमंडल में ऐसे चेहरे मंत्री बने जो लोकसभा चुनाव हार गए थे। यह इसलिए किया गया कि पीएम को उनकी क्षमताओं पर भरोसा था कि वे देश को कुछ दे सकते हैं। उसका असर भी दिखा, लेकिन पीयू में यह असर नजर नहीं आया। उन्होंने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व से भी नहीं सीखा। यही कारण रहा कि सीनेट चुनाव में हारे अपने खास चेहरों को मनोनीत सूची में जगह नहीं दी, जबकि हारने वाले प्रत्याशियों में कुछ नाम ऐसे थे जो अपने बल पर सैकड़ों शिक्षकों को अपने पाले में कर लेते हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया था। इन चेहरों को न तो चुनाव में जिताना था और न मनोनीत करना था। यह पूरा प्रकरण दो शिक्षकों ने संघ व राष्ट्रीय नेतृत्व को बताया है। यह भी कहना है कि कैंपस में भाजपा खेमे का नेतृत्व करने वाले लोग अपने भाजपाई परिवार के प्रति ईमानदार नहीं हैं। उन्हें बदलने की जरूरत है।

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