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Hindi News ›   Chandigarh ›   Soliciting bribes in the name of a judge is not merely a personal fraud, but a sacrilegious assault on the sanctity of the judiciary

Chandigarh News: जज के नाम पर रिश्वत मांगना केवल निजी धोखाधड़ी नहीं, न्यायपालिका की पवित्रता पर अपवित्र आघात

Tue, 03 Feb 2026 02:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:32 AM IST
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Soliciting bribes in the name of a judge is not merely a personal fraud, but a sacrilegious assault on the sanctity of the judiciary
चंडीगढ़। तलाक मामले में न्यायिक अधिकारी को प्रभावित कर अनुकूल आदेश दिलाने के बदले 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी अधिवक्ता की नियमित जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि ऐसे आरोप न्यायिक व्यवस्था की नींव पर सीधा हमला हैं और इस तरह के मामलों में अत्यंत सतर्कता जरूरी है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई अधिवक्ता, जो स्वयं अदालत का अधिकारी होता है, न्यायिक परिणाम को प्रभावित करने के नाम पर रिश्वत मांगता है, तो यह न केवल निजी धोखाधड़ी बल्कि न्यायपालिका की पवित्रता पर गंभीर आघात है। ऐसे कृत्य न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता के लिए खतरा पैदा करते हैं। अदालत ने कहा कि याची एक अनुभवी अधिवक्ता है और उसकी रिहाई से गवाहों, जांच या ट्रायल को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि याची साढ़े पांच महीने से न्यायिक हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन ये तथ्य अपने आप में जमानत का आधार नहीं बनते।
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सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ ने 13 अगस्त 2025 को हरसिमरनजीत सिंह की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि अधिवक्ता ने बठिंडा में लंबित तलाक मामले में अनुकूल आदेश दिलाने के लिए 30 लाख रुपये की मांग की। 13 और 14 अगस्त को शिकायत का सत्यापन किया गया और बातचीत रिकॉर्ड की गई। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को ट्रैप ऑपरेशन में सह-आरोपी सतनाम सिंह को 4 लाख रुपये की आंशिक रिश्वत लेते पकड़ा गया।
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याची पक्ष ने एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, इसलिए भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7ए लागू नहीं होती। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो इसका असर केवल शिकायतकर्ता तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
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