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संकट के सिपाहीकोरोना को मात देकर फिर से जुटे अपने कर्तव्य के पालन में
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दिनेश सैनी
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। कोरोना महामारी के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वह और उसके परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित रहें, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने परिवार से दूर रहकर दिन-रात संक्रमित मरीजों के इलाज में जुटे हुए हैं। इतना ही नहीं इस दौरान वे संक्रमण की चपेट में भी आ रहे हैं। बावजूद इसके वे हिम्मत हारने की बजाय अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते कोरोना को हराकर मानवता की सेवा के लिए दोबारा ड्यूटी पर लौट आ रहे हैं।
पीजीआई में तैनात नर्सिंग ऑफिसर शिवानी और दिनेश सैनी ऐसे ही कोरोना योद्धाओं में शामिल हैं, जो संक्रमित होने के बाद डरे नहीं और कोरोना को मात देकर एक बार फिर मरीजों की देखभाल में जुट गए हैं।
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अकेले खुद को संभाला, सकारात्मक सोच से हराया कोरोना का
पीजीआई की नर्सिंग ऑफिसर शिवानी परिवार से दूर रहकर इस महामारी के दौर में भी मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं। पीजीआई इमरजेंसी में ड्यूटी के दौरान शिवानी तीन दिसंबर 2020 को कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं। ऐसे में वह 17 दिनों तक हॉस्टल में आइसोलेट रहीं। महामारी की चपेट में आने के बाद परिवार से दूर रहकर उन्होंने अपने धैर्य और सकारात्मक सोच के बल पर कोरोना को मात देने में सफलता हासिल की। शिवानी का कहना है कि मम्मी-पापा और भाई-बहन से दूर रहकर संक्रमण की स्थिति में एक पल तो ऐसा लगा जैसे मैं कमजोर पड़ने लगी हूं लेकिन मैंने डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। योग, मेडिटेशन, भजन और सकारात्मक सोच से जुड़ी किताबें पढ़कर खुद को संभालने में सफल रही। कोरोना को हराने के बाद शिवानी ने 16 मार्च को फिर से पीजीआई की इमरजेंसी में ड्यूटी संभाल ली है।
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ड्यूटी के दौरान आया संक्रमण की चपेट में
पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर दिनेश सैनी 27 फरवरी को ड्यूटी के दौरान पॉजिटिव हो गए थे। उस समय सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री इनफेक्शन के मरीजों के वार्ड में उनकी ड्यूटी थी। पॉजिटिव होने के बाद वह 17 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहे। इस दौरान उनके संपर्क में आने से उनकी पत्नी अनीता व दोनों बेटियों में भी संक्रमण के लक्षण आने लगे थे इसलिए पूरे परिवार को होम आइसोलेशन में रहना पड़ा। संक्रमण के दौरान दिनेश को बुखार, शरीर में दर्द और गले में परेशानी थी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खुद के साथ ही अपने परिवार को भी हिम्मत दी। अपनी सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर कोरोना को हराकर 16 मार्च को फिर से ड्यूटी शुरू कर दी। दिनेश का कहना है कि 12 महीने से संक्रमण के बीच खुद को बचाते हुए मरीजों की देखभाल में जुटे हुए थे लेकिन अचानक वह भी संक्रमित हो गए। संक्रमित होने के बाद तनाव लेने की बजाय खुद को मजबूत करने की जरूरत होती है, जिससे कोरोना को हराना आसान हो जाता है।
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पीजीआई में तैनात नर्सिंग ऑफिसर शिवानी और दिनेश सैनी ऐसे ही कोरोना योद्धाओं में शामिल हैं, जो संक्रमित होने के बाद डरे नहीं और कोरोना को मात देकर एक बार फिर मरीजों की देखभाल में जुट गए हैं।
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अकेले खुद को संभाला, सकारात्मक सोच से हराया कोरोना का
पीजीआई की नर्सिंग ऑफिसर शिवानी परिवार से दूर रहकर इस महामारी के दौर में भी मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं। पीजीआई इमरजेंसी में ड्यूटी के दौरान शिवानी तीन दिसंबर 2020 को कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं। ऐसे में वह 17 दिनों तक हॉस्टल में आइसोलेट रहीं। महामारी की चपेट में आने के बाद परिवार से दूर रहकर उन्होंने अपने धैर्य और सकारात्मक सोच के बल पर कोरोना को मात देने में सफलता हासिल की। शिवानी का कहना है कि मम्मी-पापा और भाई-बहन से दूर रहकर संक्रमण की स्थिति में एक पल तो ऐसा लगा जैसे मैं कमजोर पड़ने लगी हूं लेकिन मैंने डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। योग, मेडिटेशन, भजन और सकारात्मक सोच से जुड़ी किताबें पढ़कर खुद को संभालने में सफल रही। कोरोना को हराने के बाद शिवानी ने 16 मार्च को फिर से पीजीआई की इमरजेंसी में ड्यूटी संभाल ली है।
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ड्यूटी के दौरान आया संक्रमण की चपेट में
पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर दिनेश सैनी 27 फरवरी को ड्यूटी के दौरान पॉजिटिव हो गए थे। उस समय सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री इनफेक्शन के मरीजों के वार्ड में उनकी ड्यूटी थी। पॉजिटिव होने के बाद वह 17 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहे। इस दौरान उनके संपर्क में आने से उनकी पत्नी अनीता व दोनों बेटियों में भी संक्रमण के लक्षण आने लगे थे इसलिए पूरे परिवार को होम आइसोलेशन में रहना पड़ा। संक्रमण के दौरान दिनेश को बुखार, शरीर में दर्द और गले में परेशानी थी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खुद के साथ ही अपने परिवार को भी हिम्मत दी। अपनी सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर कोरोना को हराकर 16 मार्च को फिर से ड्यूटी शुरू कर दी। दिनेश का कहना है कि 12 महीने से संक्रमण के बीच खुद को बचाते हुए मरीजों की देखभाल में जुटे हुए थे लेकिन अचानक वह भी संक्रमित हो गए। संक्रमित होने के बाद तनाव लेने की बजाय खुद को मजबूत करने की जरूरत होती है, जिससे कोरोना को हराना आसान हो जाता है।

शिवानी- फोटो : CHANDIGARH