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गुड न्यूज : खर्राटे कर रहे परेशान, घबराओ मत, पीजीआई कर देगा काम तमाम
आशीष वर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Wed, 27 Jul 2016 01:00 AM IST
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Sleep Lab
- फोटो : demo
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यदि नींद में आने वाले खर्राटों का इलाज समय पर नहीं किया गया तो गंभीर बीमारी बन सकती है। उसे अब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐप्निया कहा जाता है। इसमें नींद के वक्त सांसें कुछ सेकेंडों के लिए रुक जाती है। धीरे-धीरे यह बीमारी खतरनाक स्टेज पर पहुंच जाती है। यदि समय पर इलाज न किया गया तो मरीज की मौत भी हो सकती है, मगर पीजीआई में अब इसका बेहतर इलाज संभव हो गया है।
पीजीआई के ईएनटी डिपार्टमेंट ने स्लीप लैब स्थापित कर दी है। लैब में मरीज एक रात के लिए सुला दिया जाएगा। उसकी नींद का विश्लेषण किया जाएगा। लैब की रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर मरीज का सटीक इलाज करेंगे। जरूरत पड़ी तो सर्जरी कर बीमारी को जड़ से खत्म कर देंगे।
ये काम करेगी स्लीप लैब
ईएनटी विशेषज्ञों ने बताया कि लैब में मरीज का एक प्रकार का टेस्ट होगा, जो व्यक्ति के सोने के बाद उसकी गतिविधियों पर निगाह रखता है। सोते समय मरीजों को देखरेख में रखा जाता है। इसमें मरीज को रोज की तरह सोना होता है। इस दौरान मशीनें शरीर की प्रतिक्रिया नोट करती हैं। इसमें मरीज को बिना कोई दवा खाए सोना पड़ता है। लैब में टेस्ट के बाद जो नतीजा आता है, उसे पालीसोम्नोग्राफी कहते हैं। लैब में व्यक्ति के खर्राटे लेने का तरीका, सोते समय वह कितनी बार उठता है, दिमाग और आंख की गतिविधियां, ब्लड में ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर, दिल की गतिविधियां, मरीज का स्लीपिंग बिहेवियर जैसे कि सोते समय दांत का पीसना, सांस कितनी देर में और कितनी देर के लिए रुकती है, इन सभी का आकलन किया जाता है। उसके बाद विशेषज्ञ इलाज करते हैं।
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ये होते हैं लक्षण
तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ सेकेंड के लिए सांस का रुकना, धीरे-धीरे सांस रुकने की रफ्तार और समय बढ़ना, सोते समय सांस न आने पर हड़बड़ा कर जागना, पूरे दिन सुस्त व आलस से भरे रहना, नींद पूरी न होने पर दिन में नींद का आना, थकान महसूस करना।
छह अगस्त को लैब का दौरा करेंगे जेपी नड्डा
पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि इंस्टीट्यूट की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग छह अगस्त को चंडीगढ़ में आयोजित होगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा करेंगे। इस दौरान वे नेहरू हास्पिटल की चौथी मंजिल में बनी स्लीप लैब का दौरा करेंगे। इसके अलावा एडवांस आई सेंटर में फीमेटोसेकेंड कैटरैक्ट सर्जरी व कार्डियोलाजी में बन रहे अमृत आउटलेट का उद्घाटन करेंगे। डाक्टरों ने बताया कि फिलहाल उत्तर भारत के किसी भी अस्पताल के ईएनटी डिपार्टमेंट में स्लीप लैब नहीं है।
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पीजीआई के ईएनटी डिपार्टमेंट ने स्लीप लैब स्थापित कर दी है। लैब में मरीज एक रात के लिए सुला दिया जाएगा। उसकी नींद का विश्लेषण किया जाएगा। लैब की रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर मरीज का सटीक इलाज करेंगे। जरूरत पड़ी तो सर्जरी कर बीमारी को जड़ से खत्म कर देंगे।
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ये काम करेगी स्लीप लैब
ईएनटी विशेषज्ञों ने बताया कि लैब में मरीज का एक प्रकार का टेस्ट होगा, जो व्यक्ति के सोने के बाद उसकी गतिविधियों पर निगाह रखता है। सोते समय मरीजों को देखरेख में रखा जाता है। इसमें मरीज को रोज की तरह सोना होता है। इस दौरान मशीनें शरीर की प्रतिक्रिया नोट करती हैं। इसमें मरीज को बिना कोई दवा खाए सोना पड़ता है। लैब में टेस्ट के बाद जो नतीजा आता है, उसे पालीसोम्नोग्राफी कहते हैं। लैब में व्यक्ति के खर्राटे लेने का तरीका, सोते समय वह कितनी बार उठता है, दिमाग और आंख की गतिविधियां, ब्लड में ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर, दिल की गतिविधियां, मरीज का स्लीपिंग बिहेवियर जैसे कि सोते समय दांत का पीसना, सांस कितनी देर में और कितनी देर के लिए रुकती है, इन सभी का आकलन किया जाता है। उसके बाद विशेषज्ञ इलाज करते हैं।
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ये होते हैं लक्षण
तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ सेकेंड के लिए सांस का रुकना, धीरे-धीरे सांस रुकने की रफ्तार और समय बढ़ना, सोते समय सांस न आने पर हड़बड़ा कर जागना, पूरे दिन सुस्त व आलस से भरे रहना, नींद पूरी न होने पर दिन में नींद का आना, थकान महसूस करना।
छह अगस्त को लैब का दौरा करेंगे जेपी नड्डा
पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि इंस्टीट्यूट की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग छह अगस्त को चंडीगढ़ में आयोजित होगी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा करेंगे। इस दौरान वे नेहरू हास्पिटल की चौथी मंजिल में बनी स्लीप लैब का दौरा करेंगे। इसके अलावा एडवांस आई सेंटर में फीमेटोसेकेंड कैटरैक्ट सर्जरी व कार्डियोलाजी में बन रहे अमृत आउटलेट का उद्घाटन करेंगे। डाक्टरों ने बताया कि फिलहाल उत्तर भारत के किसी भी अस्पताल के ईएनटी डिपार्टमेंट में स्लीप लैब नहीं है।