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खर्राटे कर रहे परेशान, ये रुटीन बनाओ और रोज करो 5 आसन, तुरंत मिलेगा आराम
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 27 Feb 2017 09:21 AM IST
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खर्राटे
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अगर आप खर्राटों से परेशान हैं तो जल्दी से समाधान कर लीजिए। यह काफी खतरनाक है और कई बीमारियों का घर है। इसलिए रोज ये 5 आसन कीजिए और ये रुटीन बनाइए।
खर्राटों से बढ़ सकती हैं ये परेशानियां
पीजीआई में ईएनटी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप बंसल कहते हैं कि खर्राटे से ज्यादा यह खतरनाक है कि सोते वक्त कितनी बार सांस रुकती है। सांस रुकने के लक्षण के चिकित्सा भाषा में आब्स्ट्रेक्टिव स्लीप अपनिया (ओएसए) कहते हैं।
यदि सोते वक्त सांस रुकती है तो कई दूसरी गंभीर बीमारियां हो सकती है। इसके बारे में तभी पता चल सकता है, जब व्यक्ति की जांच की जाए। इसलिए खर्राटे आ रहे हैं तो उसे हलके में न लें। तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं और उचित परामर्श लें। खर्राटे आने और सांस रुकने से कई बीमारियों के बढ़ने की संभावना होती है।
बच्चों में खर्राटे का कारण
- एनिनाइड (नाक के पीछे मांस का बढ़ना)
- जीभ का मोटी होना
- जुकाम व हड्डी टेढ़ी होने से नाक में रुकावट
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खर्राटों से बढ़ सकती हैं ये परेशानियां
पीजीआई में ईएनटी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप बंसल कहते हैं कि खर्राटे से ज्यादा यह खतरनाक है कि सोते वक्त कितनी बार सांस रुकती है। सांस रुकने के लक्षण के चिकित्सा भाषा में आब्स्ट्रेक्टिव स्लीप अपनिया (ओएसए) कहते हैं।
यदि सोते वक्त सांस रुकती है तो कई दूसरी गंभीर बीमारियां हो सकती है। इसके बारे में तभी पता चल सकता है, जब व्यक्ति की जांच की जाए। इसलिए खर्राटे आ रहे हैं तो उसे हलके में न लें। तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं और उचित परामर्श लें। खर्राटे आने और सांस रुकने से कई बीमारियों के बढ़ने की संभावना होती है।
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बच्चों में खर्राटे का कारण
- एनिनाइड (नाक के पीछे मांस का बढ़ना)
- जीभ का मोटी होना
- जुकाम व हड्डी टेढ़ी होने से नाक में रुकावट
क्यों आते हैं खर्राटे?
snoring
1. खर्राटे की एक वजह मोटापा है। बढ़े हुए मांस के कारण लेटते समय सांस की नली सिकुड़ जाती है। जब हवा सिकुड़ी नली से गुजरती है तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं, जिससे खर्राटे आते हैं।
2. नाक में कफ, संक्रमण, नाक की हड्डी का बढ़ना या नाक में किसी प्रकार के श्वसन मार्ग के अवरोध के कारण भी खर्राटे आते हैं।
3. गले की तकलीफ से भी खर्राटे आ सकते हैं। कई बार गले में खराश, कफ का जम जाना, टांसिल में सूजन व संक्रमण से भी खर्राटे आते हैं।
4. उम्र का बढ़ना भी एक कारण है। उम्र के साथ गले के टिश्यू कमजोर होते हैं। इससे अधिक कंपन होते और खर्राटे आने लगते हैं।
5. कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है। जब सांस लेते हैं तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं। इससे खर्राटे आते हैं।
6. नीचे वाले जबड़ों का छोटा होना भी एक कारण हैं, लेकिन ऐसे केस भारत के अपेक्षा साउथ एशिया में ज्यादा पाए जाते हैं।
7. सोने से पहले अधिक शराब पीने या नींद की दवा लेने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ती है।
8. धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में खर्राटे लेने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है। धूम्रपान से सांस की नली में सूजन आती है इससे श्वसन मार्ग संकरा होता और खर्राटे आने लगते हैं।
9. कई लोग पीठ के बल सोते हैं। जिससे जीभ पीछे की तरफ हो जाती है जो तालु के पीछे लटके हुए से लगती है। जिससे सांस की नली में रुकावट बनती है और खर्राटे आना चालू होते हैं।
2. नाक में कफ, संक्रमण, नाक की हड्डी का बढ़ना या नाक में किसी प्रकार के श्वसन मार्ग के अवरोध के कारण भी खर्राटे आते हैं।
3. गले की तकलीफ से भी खर्राटे आ सकते हैं। कई बार गले में खराश, कफ का जम जाना, टांसिल में सूजन व संक्रमण से भी खर्राटे आते हैं।
4. उम्र का बढ़ना भी एक कारण है। उम्र के साथ गले के टिश्यू कमजोर होते हैं। इससे अधिक कंपन होते और खर्राटे आने लगते हैं।
5. कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है। जब सांस लेते हैं तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं। इससे खर्राटे आते हैं।
6. नीचे वाले जबड़ों का छोटा होना भी एक कारण हैं, लेकिन ऐसे केस भारत के अपेक्षा साउथ एशिया में ज्यादा पाए जाते हैं।
7. सोने से पहले अधिक शराब पीने या नींद की दवा लेने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ती है।
8. धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में खर्राटे लेने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है। धूम्रपान से सांस की नली में सूजन आती है इससे श्वसन मार्ग संकरा होता और खर्राटे आने लगते हैं।
9. कई लोग पीठ के बल सोते हैं। जिससे जीभ पीछे की तरफ हो जाती है जो तालु के पीछे लटके हुए से लगती है। जिससे सांस की नली में रुकावट बनती है और खर्राटे आना चालू होते हैं।
एक नजर डालते हैं उन बीमारियों पर
snoring is dangerous
ब्लड प्रेशर : सांस लेने में बार-बार रुकावट होने पर शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है, जिससे बीपी बढ़ जाता है।
हार्ट : सांस रुकने से हार्ट ज्यादा तेजी से पंप करता है। इससे साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इसमें लक्षण भी सामने नहीं आते।
स्ट्रोक : ऑक्सीजन की मात्रा कम होने और कार्बन-डाई-ऑक्साईड की मात्रा ज्यादा होने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है। इससे स्ट्रोक्स की आशंका बढ़ती है।
दिन में सोना : सांस रुकने से व्यक्ति रात में सोता नहीं। कुछ-कुछ अंतराल में नींद खुलती रहती है। इससे दिन के वक्त वह सोता है। कई बार तो लोग कुर्सी में बैठते हैं और सो जाते हैं। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन भी आता है।
एक्सीडेंट का खतरा : रात के वक्त नींद पूरी नहीं होने से लोग दिन में झपकी लेते हैं। इससे ड्राइविंग के दौरान एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
हार्ट : सांस रुकने से हार्ट ज्यादा तेजी से पंप करता है। इससे साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इसमें लक्षण भी सामने नहीं आते।
स्ट्रोक : ऑक्सीजन की मात्रा कम होने और कार्बन-डाई-ऑक्साईड की मात्रा ज्यादा होने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है। इससे स्ट्रोक्स की आशंका बढ़ती है।
दिन में सोना : सांस रुकने से व्यक्ति रात में सोता नहीं। कुछ-कुछ अंतराल में नींद खुलती रहती है। इससे दिन के वक्त वह सोता है। कई बार तो लोग कुर्सी में बैठते हैं और सो जाते हैं। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन भी आता है।
एक्सीडेंट का खतरा : रात के वक्त नींद पूरी नहीं होने से लोग दिन में झपकी लेते हैं। इससे ड्राइविंग के दौरान एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
ऐसे की जाती है जांच
snoring is dangerous
खर्राटे के दौरान सांस रुकने को जांचने के लिए पॉलीसिम्नोग्राफी (पीएसजी) टेस्ट किया जाता है। यह एक प्रकार की स्लीप स्टडी होती है। इसमें कई तरह के पैरामीटर होते हैं, जो यह बताते हैं कि एक व्यक्ति ने एक घंटे में कितनी बार सांस रोकी।
इसके लिए व्यक्ति को स्लीप लैब में सुलाया जाता है और उसे मॉनीटर किया जाता है। यदि एक घंटे में 0-5 बार सांस रुकती है तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। यदि 5-15 बार रुकती है तो खतरा बढ़ने लगता है।
इसमें पेशेंट को लाइफ स्टाइल मोडिफिकेशन, वेट मैनेजमेंट व उसके पॉश्चर को ठीक कर बीमारी से राहत दिला दी जाती है। यदि एक घंटे में 15-30 और 30 से ज्यादा बार सांस रुक रही है तो यह जिंदगी के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसका तुरंत इलाज कराना जरूरी होता है।
इसके लिए व्यक्ति को स्लीप लैब में सुलाया जाता है और उसे मॉनीटर किया जाता है। यदि एक घंटे में 0-5 बार सांस रुकती है तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। यदि 5-15 बार रुकती है तो खतरा बढ़ने लगता है।
इसमें पेशेंट को लाइफ स्टाइल मोडिफिकेशन, वेट मैनेजमेंट व उसके पॉश्चर को ठीक कर बीमारी से राहत दिला दी जाती है। यदि एक घंटे में 15-30 और 30 से ज्यादा बार सांस रुक रही है तो यह जिंदगी के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसका तुरंत इलाज कराना जरूरी होता है।
खर्राटों से ऐसे मिल सकता है निदान
snoring is dangerous
खर्राटों का इलाज इसके कारणों पर ही निर्भर करता है। हालांकि इसमें सर्जरी भी की जाती है और कुछ उपकरण लगाकर इलाज भी किया जा सकता है।
सीपैप थैरेपी : ये एक विशेष प्रकार का उपकरण होता है, जो रात के वक्त व्यक्ति को लगाकर सोना पड़ता है। इससे सांस की नली का अवरोध रुक जाता है। इसका मूल्य 45 हजार रुपये से लेकर एक लाख तक है, लेकिन इसे हमेशा लगाना होगा।
दांत का उपकरण : खर्राटों की समस्या कम करने के लिए मुंह में दांत पर रखने के लिए एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सोते समय जबड़ा आगे की ओर आ जाता है। इससे भी काफी हद तक राहत मिलती है।
सर्जरी : समस्या गंभीर होने पर सर्जरी के ऑप्शन के बारे में सोचा जा सकता है। सर्जरी से पहले टेस्ट किया जाता है, जिसे ड्रग-इंडयूस्ड स्लीप एंडोस्कोपी कहते हैं। इसमें मरीज को नींद आने की दवा दी जाती है और पता करते हैं कहां-कहां सांस रुक रही है। उसके बाद आपरेशन किया जाता है।
सीपैप थैरेपी : ये एक विशेष प्रकार का उपकरण होता है, जो रात के वक्त व्यक्ति को लगाकर सोना पड़ता है। इससे सांस की नली का अवरोध रुक जाता है। इसका मूल्य 45 हजार रुपये से लेकर एक लाख तक है, लेकिन इसे हमेशा लगाना होगा।
दांत का उपकरण : खर्राटों की समस्या कम करने के लिए मुंह में दांत पर रखने के लिए एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सोते समय जबड़ा आगे की ओर आ जाता है। इससे भी काफी हद तक राहत मिलती है।
सर्जरी : समस्या गंभीर होने पर सर्जरी के ऑप्शन के बारे में सोचा जा सकता है। सर्जरी से पहले टेस्ट किया जाता है, जिसे ड्रग-इंडयूस्ड स्लीप एंडोस्कोपी कहते हैं। इसमें मरीज को नींद आने की दवा दी जाती है और पता करते हैं कहां-कहां सांस रुक रही है। उसके बाद आपरेशन किया जाता है।
खर्राटों से बचने के लिए करें ये उपाय
snoring is dangerous
वजन काबू करें : यदि खर्राटे आ रहे हैं तो सबसे पहले लाइफ स्टाइल सुधारें। समय रहते वजन कंट्रोल करें। आइडियल बीएमआई के मुताबिक वजन को मेंटेन करें। इसके लिए योग और एक्सरसाइज का सहारा ले सकते हैं।
नशा छोड़े : खर्राटों से बचने के लिए यदि कोई नशा करता है तो कृपया अपने स्वास्थ्य के लिए इसे छोड़ दें। गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसे नशे से दूर रहे।
निंद्रावस्था : पीठ के बल सोने के बजाए एक करवट पर सोने की आदत डाले। यदि हो सके तो सोते समय सिर के नीचे तकिया न रखे। साथ ही हमेशा समय पर सोने की आदत डाले।
रक्तचाप : यदि आपका रक्तचाप हमेशा 120-80 से अधिक है तो डॉक्टर से जांच करवाकर उसे नियंत्रित करें।
आहार : हमेशा संतुलित आहार लेना चाहिए। रात के समय भूख से अधिक खाना न खाएं। सोने से पहले ज्यादा कफ वाले आहार जैसे कि दूध के पदार्थ, तीखा खाना और चॉकलेट नहीं खानी चाहिए।
पानी : दिनभर में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए। शरीर में पानी की कमी से नाक और गले में गाढ़ा कफ तैयार होता है। इससे श्वसन मार्ग में रुकावट पैदा होती है।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं : बार-बार कान और गले के संक्रमण से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं।
नशा छोड़े : खर्राटों से बचने के लिए यदि कोई नशा करता है तो कृपया अपने स्वास्थ्य के लिए इसे छोड़ दें। गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसे नशे से दूर रहे।
निंद्रावस्था : पीठ के बल सोने के बजाए एक करवट पर सोने की आदत डाले। यदि हो सके तो सोते समय सिर के नीचे तकिया न रखे। साथ ही हमेशा समय पर सोने की आदत डाले।
रक्तचाप : यदि आपका रक्तचाप हमेशा 120-80 से अधिक है तो डॉक्टर से जांच करवाकर उसे नियंत्रित करें।
आहार : हमेशा संतुलित आहार लेना चाहिए। रात के समय भूख से अधिक खाना न खाएं। सोने से पहले ज्यादा कफ वाले आहार जैसे कि दूध के पदार्थ, तीखा खाना और चॉकलेट नहीं खानी चाहिए।
पानी : दिनभर में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए। शरीर में पानी की कमी से नाक और गले में गाढ़ा कफ तैयार होता है। इससे श्वसन मार्ग में रुकावट पैदा होती है।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं : बार-बार कान और गले के संक्रमण से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं।
ये आसन करें खर्राटे दूर भगाएं
खर्राटे
अगर चाहते हैं खर्राटों का टिकाऊ इलाज तो ये आसन आपकी मदद करेंगे। अनुलोम-विलोम करने से खर्राटों से निजात मिलेगी। खर्राटे दूर भगाने हैं तो भ्रामरी करें। सीधे बैठ जाएं। उसके बाद अपने दोनों कानों में उंगलियां डाले और गहरी सांस लें। इसके बाद सांस छोड़ं और मधुमक्खी की तरह आवाज निकालें। ये प्रक्रिया 6 से 7 बार दोहराएं। सिंह गर्जासन में जमीन पर बैठ जाएं और पैर पीछे करें। आगे की तरफ झुकें और गहरी सांस लें। इसके बाद मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालें और धीरे-धीरे सांस छोड़े।
विदेशों में तलाक की तीसरी बड़ी वजह हैं खर्राटे
एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक यूएस व ब्रिटेन में तलाक की तीसरी सबसे बड़ी वजह खर्राटे आना है। भारत में फिलहाल ये ट्रेंड नहीं है, लेकिन बड़े अस्पतालों में यह जरूर देखने को मिल रहा है पत्नी ही अपने पति को लेकर अस्पताल पहुंच रही है। इससे पता चलता है कि पेशेंट का लाइफ पार्टनर ही सबसे ज्यादा परेशान हैं।
कई सारे मिथ्य भी हैं
- खर्राटे कोई बीमारी नहीं है : कई लोग मानते हैं कि खर्राटे आना कोई बीमारी नहीं है और इस वजह से वे डॉक्टर के पास नहीं जाते।
- खर्राटे आने का मतलब बहुत गहरी नींद आई : ऐसा बिल्कुल नहीं है। खर्राटे आने के पीछे कुछ न कुछ वजह होती है। बिना कारण खर्राटे नहीं आते।
- नौजवानों में खर्राटे नहीं आ सकते : ऐसा नहीं है, बच्चों में भी खर्राटे की समस्या हो सकती है।
साइनस की वजह से आते हैं खर्राटे : साइनस नाक के आस-पास की खाली जगह में होता है, जबकि खर्राटे की अलग-अलग वजह होती है। दोनों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
पहले तो लोगों को समझना होगा कि खर्राटे आना एक बीमारी है। इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर के पास जाना होगा। लाइफ स्टाइल बदलने से लोगों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस गलतफहमी में न रहे कि ये सिर्फ बुजुर्गों में होता है। अनदेखी करने पर यह कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
- डॉ. संदीप बंसल, एसोसिएट प्रोफेसर, ईएनटी डिपार्टमेंट, पीजीआई।
विदेशों में तलाक की तीसरी बड़ी वजह हैं खर्राटे
एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक यूएस व ब्रिटेन में तलाक की तीसरी सबसे बड़ी वजह खर्राटे आना है। भारत में फिलहाल ये ट्रेंड नहीं है, लेकिन बड़े अस्पतालों में यह जरूर देखने को मिल रहा है पत्नी ही अपने पति को लेकर अस्पताल पहुंच रही है। इससे पता चलता है कि पेशेंट का लाइफ पार्टनर ही सबसे ज्यादा परेशान हैं।
कई सारे मिथ्य भी हैं
- खर्राटे कोई बीमारी नहीं है : कई लोग मानते हैं कि खर्राटे आना कोई बीमारी नहीं है और इस वजह से वे डॉक्टर के पास नहीं जाते।
- खर्राटे आने का मतलब बहुत गहरी नींद आई : ऐसा बिल्कुल नहीं है। खर्राटे आने के पीछे कुछ न कुछ वजह होती है। बिना कारण खर्राटे नहीं आते।
- नौजवानों में खर्राटे नहीं आ सकते : ऐसा नहीं है, बच्चों में भी खर्राटे की समस्या हो सकती है।
साइनस की वजह से आते हैं खर्राटे : साइनस नाक के आस-पास की खाली जगह में होता है, जबकि खर्राटे की अलग-अलग वजह होती है। दोनों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
पहले तो लोगों को समझना होगा कि खर्राटे आना एक बीमारी है। इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर के पास जाना होगा। लाइफ स्टाइल बदलने से लोगों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस गलतफहमी में न रहे कि ये सिर्फ बुजुर्गों में होता है। अनदेखी करने पर यह कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
- डॉ. संदीप बंसल, एसोसिएट प्रोफेसर, ईएनटी डिपार्टमेंट, पीजीआई।