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चंडीगढ़ः एक फरवरी से नगर निगम के फील्ड स्टाफ को मिलेगी स्मार्ट वॉच, गुम हुई तो जुर्माना
Tue, 28 Jan 2020 03:14 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2020 03:14 PM IST
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एक फरवरी से नगर निगम चंडीगढ़ के फील्ड स्टाफ को ट्रायल के लिए स्मार्ट वॉच दे दी जाएंगी। लगभग एक माह ट्रायल के बाद मार्च से संबंधित कर्मचारी के खाते से घड़ी अटैच हो जाएगी। उसके बाद समय पर काम न करने वाले कर्मचारियों का वेतन कटेगा। बड़ी बात यह है कि यदि घड़ी गुम हुई तो कर्मचारी को आठ हजार रुपये चुकाने होंगे। इस सप्ताह चार हजार घड़ियां निगम को मिल जाएंगी। उसके बाद जिन लोगों को घड़ियां मिलेंगी, उनका निगम सर्वे करेगा।
कमिश्नर केके यादव ने बताया कि नगर निगम में ऑफिस स्टाफ के लिए बायोमीट्रिक मशीन है, लेकिन फील्ड स्टाफ के कामकाज पर नजर रखने के लिए स्मार्ट वॉच लेकर आ रहे हैं। सभी विभाग प्रभारियों ने अपने-अपने अफसरों व कर्मचारियों की सूची सौंप दी है, जिन्हें यह स्मार्ट वॉच दी जाएंगी। कर्मचारियों के काम में लापरवाही को लेकर कमिश्नर सख्त हैं। अब फील्ड में जाने वाले अफसरों और कर्मचारियों को स्मार्ट वॉच पहनकर ही जाना होगा।
हाथ में नहीं मिली घड़ी तो कटेगा वेतन
मॉनीटरिंग के दौरान यदि घड़ी हाथ में नहीं मिली तो आधे दिन का वेतन काटा जाएगा। कमिश्नर ने बताया कि कई बार शिकायत मिलती है कि कर्मचारी काम में लापरवाही कर रहे हैं। कई बार समझाने के बावजूद जब लगातार लापरवाही की शिकायतें सामने आईं तो यह निर्णय किया गया है। इससे काम में पारदर्शिता आएगी और बेहतर तरीके से काम होंगे।
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एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये, तीन साल के लिए अनुबंध
निगम ने इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दिया है। निगम ने चार हजार घड़ियां मंगाई हैं। एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये है। इस हिसाब से एक माह का 18 लाख 64 हजार रुपये मासिक किराया देना होगा। कंपनी से तीन साल के लिए अनुबंध किया है। परिणाम बेहतर दिखे तो दो साल के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि एक घड़ी की कीमत लगभग 10 हजार से ज्यादा की है।
पहले भी दो बार हो चुका है प्रयास
पहले भी दो बार स्मार्ट वॉच मंगाने के लिए नगर निगम ने प्रयास किया था, लेकिन असफल रहा। कंपनियों के न आने से यह व्यवस्था परवान ही नहीं चढ़ सकी थी। इस बार दो कंपनियों ने बिड डाली है। टेक्निकल बिड और फाइनेंशियल बिड के बाद इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दे दिया गया था।
दूसरी जगह काम करने की मिली थीं सूचनाएं
कुछ दिन पूर्व कर्मचारियों की जिस जगह तैनाती है, वहां न काम करते हुए दूसरी जगह काम करने की सूचना कमिश्नर को मिली थी। कोई पार्षदों तो कोई रिटायर अफसरों के घर काम कर रहा था तो कोई कहीं। हालांकि, मामला सामने आने के बाद कमिश्नर ने ज्यादातर कर्मचारियों को फिर से काम पर वापस बुला लिया था। यह समस्या फिर से न हो इसके लिए कमिश्नर स्मार्ट वॉच की व्यवस्था करने जा रहे हैं।
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कमिश्नर केके यादव ने बताया कि नगर निगम में ऑफिस स्टाफ के लिए बायोमीट्रिक मशीन है, लेकिन फील्ड स्टाफ के कामकाज पर नजर रखने के लिए स्मार्ट वॉच लेकर आ रहे हैं। सभी विभाग प्रभारियों ने अपने-अपने अफसरों व कर्मचारियों की सूची सौंप दी है, जिन्हें यह स्मार्ट वॉच दी जाएंगी। कर्मचारियों के काम में लापरवाही को लेकर कमिश्नर सख्त हैं। अब फील्ड में जाने वाले अफसरों और कर्मचारियों को स्मार्ट वॉच पहनकर ही जाना होगा।
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हाथ में नहीं मिली घड़ी तो कटेगा वेतन
मॉनीटरिंग के दौरान यदि घड़ी हाथ में नहीं मिली तो आधे दिन का वेतन काटा जाएगा। कमिश्नर ने बताया कि कई बार शिकायत मिलती है कि कर्मचारी काम में लापरवाही कर रहे हैं। कई बार समझाने के बावजूद जब लगातार लापरवाही की शिकायतें सामने आईं तो यह निर्णय किया गया है। इससे काम में पारदर्शिता आएगी और बेहतर तरीके से काम होंगे।
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एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये, तीन साल के लिए अनुबंध
निगम ने इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दिया है। निगम ने चार हजार घड़ियां मंगाई हैं। एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये है। इस हिसाब से एक माह का 18 लाख 64 हजार रुपये मासिक किराया देना होगा। कंपनी से तीन साल के लिए अनुबंध किया है। परिणाम बेहतर दिखे तो दो साल के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि एक घड़ी की कीमत लगभग 10 हजार से ज्यादा की है।
पहले भी दो बार हो चुका है प्रयास
पहले भी दो बार स्मार्ट वॉच मंगाने के लिए नगर निगम ने प्रयास किया था, लेकिन असफल रहा। कंपनियों के न आने से यह व्यवस्था परवान ही नहीं चढ़ सकी थी। इस बार दो कंपनियों ने बिड डाली है। टेक्निकल बिड और फाइनेंशियल बिड के बाद इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दे दिया गया था।
दूसरी जगह काम करने की मिली थीं सूचनाएं
कुछ दिन पूर्व कर्मचारियों की जिस जगह तैनाती है, वहां न काम करते हुए दूसरी जगह काम करने की सूचना कमिश्नर को मिली थी। कोई पार्षदों तो कोई रिटायर अफसरों के घर काम कर रहा था तो कोई कहीं। हालांकि, मामला सामने आने के बाद कमिश्नर ने ज्यादातर कर्मचारियों को फिर से काम पर वापस बुला लिया था। यह समस्या फिर से न हो इसके लिए कमिश्नर स्मार्ट वॉच की व्यवस्था करने जा रहे हैं।