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कंपनी डेढ़ साल में टीम तक नहीं बना पाई, ऐसे चंडीगढ़ बनेगा स्मार्ट सिटी?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 09:36 AM IST
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Chandigarh Smart city
- फोटो : File Photo
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सिटी ब्यूटीफुल को फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले डेढ़ साल हो गया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले कामों की रूपरेखा तैयार कर लागू करने वाली कंपनी की टीम तक गठित नहीं हो पाई है। चंडीगढ़ को 13 जुलाई 2016 को स्मार्ट सिटी का स्टेटस मिला था।
स्मार्ट सिटी कंपनी के लिए सीएफओ, जीएम और प्रबंधक पद के लिए प्रशासन ने फिर से 8 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं, जबकि पिछली बारे मांगे गए आवेदनों पर भर्ती प्रक्रिया को खारिज कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि उन आवेदनों में योग्य उम्मीदवार नहीं थे। अलग-अलग पदों के लिए आने वाले सभी आवेदकों का इंटरव्यू सलाहकार खुद लेंगे।
296 में से सिर्फ 2.80 करोड़ ही खर्च हो पाए
स्मार्ट सिटी के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन को 296 करोड़ की राशि मिली है, लेकिन इसमें से सिर्फ 2.80 करोड़ ही खर्च हो पाया है। पिछले साल केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक आधार पर स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल 13 शहरों कार्यों के का मूल्याकंन किया, जिसमें चंडीगढ़ का जमीनी स्तर पर खराब प्रदर्शन मापा गया है।
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कोई अलग से स्टाफ भी नहीं हुआ नियुक्त
स्मार्ट सिटी के तहत प्रशासन ने एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) का गठन जरूर कर लिया है। इसके चेयरमैन सलाहकार परिमल राय, सीईओ नगर निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव, निदेशक गृह सचिव और वित्त सचिव हैं। एसपीवी का अलग से सेक्टर-17 में ऑफिस बनेगा। इसका अलग से स्टाफ भी होगा, लेकिन अभी तक पदाधिकारियों के अलावा काम करने वाला निचला स्टाफ नहीं है।
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स्मार्ट सिटी कंपनी के लिए सीएफओ, जीएम और प्रबंधक पद के लिए प्रशासन ने फिर से 8 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं, जबकि पिछली बारे मांगे गए आवेदनों पर भर्ती प्रक्रिया को खारिज कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि उन आवेदनों में योग्य उम्मीदवार नहीं थे। अलग-अलग पदों के लिए आने वाले सभी आवेदकों का इंटरव्यू सलाहकार खुद लेंगे।
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296 में से सिर्फ 2.80 करोड़ ही खर्च हो पाए
स्मार्ट सिटी के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन को 296 करोड़ की राशि मिली है, लेकिन इसमें से सिर्फ 2.80 करोड़ ही खर्च हो पाया है। पिछले साल केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक आधार पर स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल 13 शहरों कार्यों के का मूल्याकंन किया, जिसमें चंडीगढ़ का जमीनी स्तर पर खराब प्रदर्शन मापा गया है।
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कोई अलग से स्टाफ भी नहीं हुआ नियुक्त
स्मार्ट सिटी के तहत प्रशासन ने एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) का गठन जरूर कर लिया है। इसके चेयरमैन सलाहकार परिमल राय, सीईओ नगर निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव, निदेशक गृह सचिव और वित्त सचिव हैं। एसपीवी का अलग से सेक्टर-17 में ऑफिस बनेगा। इसका अलग से स्टाफ भी होगा, लेकिन अभी तक पदाधिकारियों के अलावा काम करने वाला निचला स्टाफ नहीं है।
दो तरह से होना है स्मार्ट सिटी का काम
स्मार्ट सिटी परियोजना की रफ्तार धीमी
- फोटो : File Photo
दो तरह से होना है स्मार्ट सिटी का काम
- फास्ट ट्रैक सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो तरह से शहर में काम होना है। पहले जो चार मॉडल सेक्टर (सेक्टर-17, 22, 35 और 43) चुने गए हैं, उनमें पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम होगा, जबकि दूसरा पूरे शहर का पैन सिटी के तहत काम होने का दावा किया गया था। इसके तहत पूरा शहर अंडर सर्विलेंस होना है। पैन सिटी में पूरे शहर की स्मार्ट आवाजाही पर फोकस रहेगा, जिसके तहत पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। शहर पर नजर रखने के लिए स्मार्ट कंट्रोल सेंट्रर बनाया जाएगा, जिसे करीब 7 विभागों के साथ जोड़ा जाएगा, लेकिन अभी तक शहर में कुछ भी नहीं हुआ है।
- चार मॉडल सेक्टरों में 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक इसके लिए कुछ नहीं हुआ है। नगर निगम को कजौली वाटर वर्क्स के 5वें और 6वें फेज से अब आस रह गई है। नगर निगम का कहना है कि जब इन दो नए फेज से 34 एमजीडी पानी मिलना शुरू हो जाएगा, तब 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू होगी। यह पानी इस साल के अंत में ही आने की उम्मीद है। इन सेक्टरों में बिजली के कट न लगने का भी दावा था, लेकिन इसके तहत भी अभी कुछ नहीं हुआ है।
. शहर के सभी ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने की योजना है, लेकिन अभी काम नहीं शुरू हुआ है। 5 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। इस काम के लिए 500 करोड़ की जरूरत है, लेकिन इतनी राशि कहां से आएगी इसका पता नहीं है।
. सभी सर्विस को आनलाइन करके ई-गवर्नेंस सिस्टम को लागू किया जाना है, लेकिन अभी कुछ नहीं हुआ
. बाई साइकिल शेयरिंग सिस्टम के लिए टेंडर प्रक्रिया कई बार कर ली गई, लेकिन यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा
. शहर में अंडरग्राउंड बिजली की लाइन डालने का काम शुरू किया जाना है। इसकी शुरुआत सेक्टर-8 से होनी है, लेकिन अभी इसका ही तीन बार टेंडर खारिज हो चुका है क्योंकि सिर्फ ही एक कंपनी बार-बार सामने आ रही है। इस समय बिजली की केबल तारें शहर में लटकती रहती हैं।
- स्मार्ट सिटी में स्टार्ट अप करने वालों का विशेष ध्यान रखने की बात की गई है। उनके लिए शहर में इनोवेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव है, लेकिन अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं हुई है। प्रशासन का दावा है कि कंसलटेंट कंपनी बनने के बाद काफी तेजी से काम शुरू हो जाएगा।
- स्मार्ट सिटी प्रपोजल में चंडीगढ़ के हेरिटेज का पूरी तरह से सरंक्षण किया जाएगा ताकि विदेशी पर्यटक शहर में ज्यादा से ज्यादा आ सके। कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले ट्रांसपोर्ट को प्रमोट किया जाएगा, जिसमें मेट्रो से लेकर ई रिक्शा और बैटरी से चलने वाले वाहनों को प्रमोट किया जाएगा, लेकिन अभी यह काम भी कागजों में ही है। स्मार्ट सिटी के प्रपोजल को पूरी तरह से लागू करवाने का खर्चा 6 से साढ़े 6 हजार करोड़ रुपये है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से एक हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। इनमे से 500 करोड़ का शेयर नगर निगम और 500 का शेयर प्रशासन का है।
- फास्ट ट्रैक सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो तरह से शहर में काम होना है। पहले जो चार मॉडल सेक्टर (सेक्टर-17, 22, 35 और 43) चुने गए हैं, उनमें पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम होगा, जबकि दूसरा पूरे शहर का पैन सिटी के तहत काम होने का दावा किया गया था। इसके तहत पूरा शहर अंडर सर्विलेंस होना है। पैन सिटी में पूरे शहर की स्मार्ट आवाजाही पर फोकस रहेगा, जिसके तहत पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। शहर पर नजर रखने के लिए स्मार्ट कंट्रोल सेंट्रर बनाया जाएगा, जिसे करीब 7 विभागों के साथ जोड़ा जाएगा, लेकिन अभी तक शहर में कुछ भी नहीं हुआ है।
- चार मॉडल सेक्टरों में 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक इसके लिए कुछ नहीं हुआ है। नगर निगम को कजौली वाटर वर्क्स के 5वें और 6वें फेज से अब आस रह गई है। नगर निगम का कहना है कि जब इन दो नए फेज से 34 एमजीडी पानी मिलना शुरू हो जाएगा, तब 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू होगी। यह पानी इस साल के अंत में ही आने की उम्मीद है। इन सेक्टरों में बिजली के कट न लगने का भी दावा था, लेकिन इसके तहत भी अभी कुछ नहीं हुआ है।
. शहर के सभी ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने की योजना है, लेकिन अभी काम नहीं शुरू हुआ है। 5 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। इस काम के लिए 500 करोड़ की जरूरत है, लेकिन इतनी राशि कहां से आएगी इसका पता नहीं है।
. सभी सर्विस को आनलाइन करके ई-गवर्नेंस सिस्टम को लागू किया जाना है, लेकिन अभी कुछ नहीं हुआ
. बाई साइकिल शेयरिंग सिस्टम के लिए टेंडर प्रक्रिया कई बार कर ली गई, लेकिन यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा
. शहर में अंडरग्राउंड बिजली की लाइन डालने का काम शुरू किया जाना है। इसकी शुरुआत सेक्टर-8 से होनी है, लेकिन अभी इसका ही तीन बार टेंडर खारिज हो चुका है क्योंकि सिर्फ ही एक कंपनी बार-बार सामने आ रही है। इस समय बिजली की केबल तारें शहर में लटकती रहती हैं।
- स्मार्ट सिटी में स्टार्ट अप करने वालों का विशेष ध्यान रखने की बात की गई है। उनके लिए शहर में इनोवेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव है, लेकिन अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं हुई है। प्रशासन का दावा है कि कंसलटेंट कंपनी बनने के बाद काफी तेजी से काम शुरू हो जाएगा।
- स्मार्ट सिटी प्रपोजल में चंडीगढ़ के हेरिटेज का पूरी तरह से सरंक्षण किया जाएगा ताकि विदेशी पर्यटक शहर में ज्यादा से ज्यादा आ सके। कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले ट्रांसपोर्ट को प्रमोट किया जाएगा, जिसमें मेट्रो से लेकर ई रिक्शा और बैटरी से चलने वाले वाहनों को प्रमोट किया जाएगा, लेकिन अभी यह काम भी कागजों में ही है। स्मार्ट सिटी के प्रपोजल को पूरी तरह से लागू करवाने का खर्चा 6 से साढ़े 6 हजार करोड़ रुपये है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से एक हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। इनमे से 500 करोड़ का शेयर नगर निगम और 500 का शेयर प्रशासन का है।
चीफ अकाउंट अफसर और जनरल मैनेजर का वेतन डेढ़ लाख
सिर्फ एलईडी लाइट्स और अंडरपास का काम हुआ है शुरू
इस समय शहर में एलईडी लाइट और रोज गार्डन से सेक्टर-17 प्लाजा को जोड़ने के लिए सिर्फ एलईडी लाइट लगाने का काम शुरू हुआ है। शहर में लग रही एलईडी लाइट की रोशनी पर भी पार्षद और शहरवासी सवाल खड़े कर रहे हैं।
सलाहकार परिमल राय का कहना है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड के लिए तीन अहम पदों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं।स्मार्ट सिटी के तहत जो काम होने हैं, उसके लिए कई काम शुरू हो गए हैं। कंपनी के पदाधिकारी फाइनल होने के बाद काम में और तेजी आ जाएगी।
फासवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि स्मार्ट सिटी सिर्फ कागजों में बन रही है। उनका कहना है कि मूलभूत सुविधाएं तो शहरवासियों को मिल नहीं रही हैं, जो स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा है। पेपर वर्क ज्यादा हो रहा है।
चीफ अकाउंट अफसर और जनरल मैनेजर का वेतन डेढ़ लाख
कंपनी में नियुक्त चीफ अकाउंट अफसर और जनरल मैनेजर का वेतन प्रतिमाह का डेढ़ लाख रुपये तय किया है। नगर निगम के अनुसार चीफ अकाउंट अफसर के लिए योग्यता चार्टर्ड अकाउंटेंट और मनैजमेंट फाइनेंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिपलोमा होना चाहिए, जबकि जनरल मैनेजर के लिए योग्यता एमटेक और इंजीनियरिंग में एमई होना चाहिए। इसमे वाटर सप्लाई, रोड, सीवरेज नेटवर्क का 15 साल का अनुभव हो। मैनेजर के लिए योग्यता बीटेक होनी चाहिए, जिसका वेतन 75 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया गया है। यह भर्ती तीन साल के लिए होगी।
इस समय शहर में एलईडी लाइट और रोज गार्डन से सेक्टर-17 प्लाजा को जोड़ने के लिए सिर्फ एलईडी लाइट लगाने का काम शुरू हुआ है। शहर में लग रही एलईडी लाइट की रोशनी पर भी पार्षद और शहरवासी सवाल खड़े कर रहे हैं।
सलाहकार परिमल राय का कहना है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड के लिए तीन अहम पदों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं।स्मार्ट सिटी के तहत जो काम होने हैं, उसके लिए कई काम शुरू हो गए हैं। कंपनी के पदाधिकारी फाइनल होने के बाद काम में और तेजी आ जाएगी।
फासवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि स्मार्ट सिटी सिर्फ कागजों में बन रही है। उनका कहना है कि मूलभूत सुविधाएं तो शहरवासियों को मिल नहीं रही हैं, जो स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा है। पेपर वर्क ज्यादा हो रहा है।
चीफ अकाउंट अफसर और जनरल मैनेजर का वेतन डेढ़ लाख
कंपनी में नियुक्त चीफ अकाउंट अफसर और जनरल मैनेजर का वेतन प्रतिमाह का डेढ़ लाख रुपये तय किया है। नगर निगम के अनुसार चीफ अकाउंट अफसर के लिए योग्यता चार्टर्ड अकाउंटेंट और मनैजमेंट फाइनेंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिपलोमा होना चाहिए, जबकि जनरल मैनेजर के लिए योग्यता एमटेक और इंजीनियरिंग में एमई होना चाहिए। इसमे वाटर सप्लाई, रोड, सीवरेज नेटवर्क का 15 साल का अनुभव हो। मैनेजर के लिए योग्यता बीटेक होनी चाहिए, जिसका वेतन 75 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया गया है। यह भर्ती तीन साल के लिए होगी।