सफाई में पिछड़ गया चंडीगढ़, टॉप 20 में नहीं मिली जगह
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देश के टॉप 20 स्मार्ट सिटी के लिए बड़ी दावेदारी पेश करने वाला सिटी ब्यूटीफुल सफाई के मामले में पिछड़ गया है। चंडीगढ़ देश के साफ सुथरे टॉप 10 शहरों में भी शामिल नहीं है।
शनिवार को घोषित स्वच्छ भारत रैंकिंग में चंडीगढ़ शहर की रैंकिंग में भारी गिरावट आई है। चंडीगढ़ इस रैंकिंग में देश भर में 21वें स्थान पर है। पिछले साल शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी रैंकिंग में चंडीगढ़ 73.48 अंकों के साथ देश भर में पहले स्थान पर था।
स्वच्छ भारत रैंकिंग में मैसूर को देश का सबसे साफ सुथरा शहर चुना गया है। जबकि पिछले साल मैसूर 70.65 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर था। तब तीसरे नबंर पर सूरत और चौथे पर दिल्ली था।
ठेकेदारी सिस्टम से बिगड़ी शहर की सूरत
सिटी ब्यूटीफुल में शहर की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम के जिम्मे है। लेकिन निगम में सालों से सफाई कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो पाई है। हर साल काफी संख्या में रेगुलर कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। मेयर पूनम शर्मा का कहना है कि ठेकेदारी सिस्टम से सफाई का स्तर उठा पाना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि निगम में खाली पड़े पदों को जल्द भरने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के पास प्रपोजल भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में 300 से अधिक रेगुलर सफाई कर्मचारी भर्ती किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की भर्ती के लिए मापदंड भी बदले जाएंगे।
खुले में शौच, कचरा प्रबंधन मानक
एक लाख से अधिक आबादी वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 476 शहरों का सर्वे स्वच्छता की प्रक्रिया के मद्देनजर किया गया। खुले में शौच, ठोस कचरा प्रबंधन, दूषित जल शोधन, उपलब्ध जल की गुणवत्ता आदि इसके मानदंड थे।
सर्वे में पंजाब के 16, यूपी के 61 शहर
सर्वे में यूपी के 61, महराष्ट्र के 43, एमपी के 32, आंध्र के 30, गुजरात के 30, तमिलनाडु के 29, राजस्थान के 28, बिहार के 27, कर्नाटक के 26, हरियाणा के 20, पंजाब के 16, तेलंगाना के 11, ओडिशा के 10, झारखंड के 10, छत्तीसगढ़ के नौ और केरल, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों के तीन-तीन शहर शामिल किए गए।
देश के 10 सबसे स्वच्छ शहर
शीर्ष 10 शहरों में मैसूर, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु), नवी मुंबई, कोच्चि (केरल), हासन, मंड्या और बंगलूरू (कर्नाटक), तिरुवनंतपुरम, हालिशहर (पश्चिम बंगाल) और गंगटोक (सिक्किम) शामिल हैं।
स्मार्ट सिटी के लिए प्रशासन और निगम कर रहे हैं बड़ी दावेदारी
यह हमारे लिए अफसोस की बात है कि सफाई के मामले में शहर काफी पीछे हैं। लंबे समय से निगम में 3500 से अधिक कर्मचारियों की कमी चल रही है। 300 सफाई कर्मचारियों की भर्ती का मामला लटका हुआ है। शहर में गारबेज और मलबे की सबसे बड़ी दिक्कत है। गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती से जुर्माना लगाना होगा। सेक्टर ही नहीं कॉलोनियों पर भी फोकस करना होगा। पॉलीथिन पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।
- पूनम शर्मा, मेयर, चंडीगढ़