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Chandigarh News: गिरफ्तार स्मार्ट सिटी का मैनेजर को नौकरी से निकाला, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी
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चंडीगढ़। सेक्टर-17 स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) में कर्मचारी रखने के लिए रिश्वत लेने के मामले में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद स्मार्ट सिटी भी सख्त हो गया है। स्मार्ट सिटी ने मैनेजर गगनदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है। स्मार्ट सिटी की सीईओ आनिंदिता मित्रा ने इसकी पुष्टि की।
मैनेजर गगनदीप सिंह को मंगलवार को विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद स्मार्ट सिटी की तरफ से आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनी के साथ किए ठेके को रद्द करने, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को जब्त करने के लिए सात दिन का नोटिस जारी किया गया है। आईसीसीसी द्वारा आउटसोर्सिंग के तहत कर्मचारियों को रखने के लिए गुरुग्राम की वी इंस्पायरर फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड एचआर कंपनी को ठेका दिया हुआ है।
इसी कंपनी ने शिकायतकर्ता को आईसीसीसी में चपरासी की नौकरी पर रखा था। बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया। शिकातकर्ता ने कंपनी के सुपरवाइजर से दोबारा नौकरी के लिए बात की। सुपरवाइजर कुलदीप ने उसे नौकरी पर रखने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। कहा कि वह इस बारे में कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर से बात कर वह उसे नौकरी दिलवा देगा लेकिन शिकायतकर्ता विजिलेंस के पास चला गया। विजिलेंस ने आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। फोन पर बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता ने पहले केवल 10 हजार रुपये देने की बात कही जिसे आरोपी पक्ष ने मान लिया। बुधवार सुबह सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ता को पैसे लेकर बुलाया। शिकायतकर्ता ने जैसे ही रंग लगे 10 हजार रुपये के नोट सुपरवाइजर को दिए विजिलेंस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में टीम ने कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर मोहन जांगड़ा और स्मार्ट सिटी के मैनेजर गगनदीप को गिरफ्तार कर लिया।
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नौकरी से निकालने और रखने के नाम पर चल रहा था रिश्वत का खेल
जांच में पता चला कि जो कर्मचारी रिश्वत की रकम नहीं दे रहे थे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता था। पुलिस मामले में कंपनी और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच रही है। जांच में पता चला कि सुपरवाइजर व ऑपरेशन मैनेजर ने अलग-अलग कर्मियों से रिश्वत के रूप में ली गई करीब 3.90 लाख रुपये स्मार्ट सिटी मैनेजर गगनदीप को पहुंचाए थे। यह भी पता चला कि अब तक करीब 55 लोगों से रिश्वत ली गई है। इस बात का खुलासा खुद आपरेशन मैनेजर ने रिमांड के दौरान किया है। बताया कि कंपनी की ओर से रखे गए सफाईकर्मी, चपरासी आदि का अनुबंध जब खत्म होने वाला होता था तब सुपरवाइजर कंपनी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अनुबंध रिन्यू करने के एवज में 20 से 30 तीस हजार रुपये की रिश्वत लेता था। वहीं नए कर्मचारियों को भर्ती करवाने के लिए 45 से 50 हजार रुपये मांगे जाते थे। रिश्वत की रकम में से सुपरवाइजर व आपरेशन मैनेजर पहले अपना हिस्सा निकाल लेते थे। उसके बाद बाकी पैसा स्मार्ट सिटी मैनेजर को पहुंचा देते थे।
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मैनेजर गगनदीप सिंह को मंगलवार को विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद स्मार्ट सिटी की तरफ से आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनी के साथ किए ठेके को रद्द करने, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को जब्त करने के लिए सात दिन का नोटिस जारी किया गया है। आईसीसीसी द्वारा आउटसोर्सिंग के तहत कर्मचारियों को रखने के लिए गुरुग्राम की वी इंस्पायरर फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड एचआर कंपनी को ठेका दिया हुआ है।
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इसी कंपनी ने शिकायतकर्ता को आईसीसीसी में चपरासी की नौकरी पर रखा था। बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया। शिकातकर्ता ने कंपनी के सुपरवाइजर से दोबारा नौकरी के लिए बात की। सुपरवाइजर कुलदीप ने उसे नौकरी पर रखने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। कहा कि वह इस बारे में कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर से बात कर वह उसे नौकरी दिलवा देगा लेकिन शिकायतकर्ता विजिलेंस के पास चला गया। विजिलेंस ने आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। फोन पर बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता ने पहले केवल 10 हजार रुपये देने की बात कही जिसे आरोपी पक्ष ने मान लिया। बुधवार सुबह सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ता को पैसे लेकर बुलाया। शिकायतकर्ता ने जैसे ही रंग लगे 10 हजार रुपये के नोट सुपरवाइजर को दिए विजिलेंस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में टीम ने कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर मोहन जांगड़ा और स्मार्ट सिटी के मैनेजर गगनदीप को गिरफ्तार कर लिया।
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नौकरी से निकालने और रखने के नाम पर चल रहा था रिश्वत का खेल
जांच में पता चला कि जो कर्मचारी रिश्वत की रकम नहीं दे रहे थे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता था। पुलिस मामले में कंपनी और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच रही है। जांच में पता चला कि सुपरवाइजर व ऑपरेशन मैनेजर ने अलग-अलग कर्मियों से रिश्वत के रूप में ली गई करीब 3.90 लाख रुपये स्मार्ट सिटी मैनेजर गगनदीप को पहुंचाए थे। यह भी पता चला कि अब तक करीब 55 लोगों से रिश्वत ली गई है। इस बात का खुलासा खुद आपरेशन मैनेजर ने रिमांड के दौरान किया है। बताया कि कंपनी की ओर से रखे गए सफाईकर्मी, चपरासी आदि का अनुबंध जब खत्म होने वाला होता था तब सुपरवाइजर कंपनी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अनुबंध रिन्यू करने के एवज में 20 से 30 तीस हजार रुपये की रिश्वत लेता था। वहीं नए कर्मचारियों को भर्ती करवाने के लिए 45 से 50 हजार रुपये मांगे जाते थे। रिश्वत की रकम में से सुपरवाइजर व आपरेशन मैनेजर पहले अपना हिस्सा निकाल लेते थे। उसके बाद बाकी पैसा स्मार्ट सिटी मैनेजर को पहुंचा देते थे।