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Chandigarh News: स्मार्ट सिटी फंड गड़बड़ी का मामला संसद में गूंजा, 125 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी फंड घोटाले का मामला सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को संसद में उठाया। सांसद तिवारी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए करीब 120 से 125 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाया और पूरे मामले की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच की मांग की। तिवारी ने सदन में कहा कि हाल ही में सामने आई आंतरिक जांच रिपोर्ट में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से नगर निगम को किए गए फंड ट्रांसफर में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। उन्होंने बताया कि फंड ट्रांसफर के बाद निगम के खातों में 18 करोड़ रुपये से अधिक की तीन संदिग्ध और फर्जी डेबिट एंट्रियां पाई गई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
सांसद ने आरोप लगाया कि यह केवल लेखांकन त्रुटि नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय हेरफेर का मामला है। उन्होंने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि सीएससीएल के बंद होने से पहले कई संदिग्ध लेन-देन किए गए जिनमें नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें और फर्जी बैंक स्टेटमेंट शामिल हैं। उनके अनुसार कुछ लोगों ने जानबूझकर सिस्टम का दुरुपयोग किया।
तिवारी ने इस मामले को जनता के विश्वास से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे न केवल नगर निगम की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं बल्कि शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियां भी उजागर होती हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय नियंत्रण, ऑडिट और सत्यापन तंत्र में गंभीर खामियां हैं, जिन्हें तुरंत दूर करने की जरूरत है।
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मामले की समयबद्ध और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से जांच की मांग
सांसद ने केंद्र सरकार से अपील की कि पूरे मामले की समयबद्ध और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान हो सके। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल सत्यापन और मजबूत ऑडिट तंत्र लागू किया जाए। तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
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सांसद ने आरोप लगाया कि यह केवल लेखांकन त्रुटि नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय हेरफेर का मामला है। उन्होंने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि सीएससीएल के बंद होने से पहले कई संदिग्ध लेन-देन किए गए जिनमें नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें और फर्जी बैंक स्टेटमेंट शामिल हैं। उनके अनुसार कुछ लोगों ने जानबूझकर सिस्टम का दुरुपयोग किया।
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तिवारी ने इस मामले को जनता के विश्वास से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे न केवल नगर निगम की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं बल्कि शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियां भी उजागर होती हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय नियंत्रण, ऑडिट और सत्यापन तंत्र में गंभीर खामियां हैं, जिन्हें तुरंत दूर करने की जरूरत है।
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मामले की समयबद्ध और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से जांच की मांग
सांसद ने केंद्र सरकार से अपील की कि पूरे मामले की समयबद्ध और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान हो सके। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल सत्यापन और मजबूत ऑडिट तंत्र लागू किया जाए। तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।