स्मार्ट सिटी का कंसेप्ट Vs चंडीगढ़, एक नजर में
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भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के दावेदारों में चंडीगढ़ का नाम पहला है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी यह बयान दे चुके हैं कि चंडीगढ़ देश का पहला स्मार्ट सिटी बनने की योग्यताएं रखता है।
मगर स्मार्ट सिटी बनने के लिए कुछ जरूरी योग्यताएं हैं, जिनकी कसौटी पर पहले चंडीगढ़ को परखना होगा। शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी की एक परिभाषा दी है। साथ ही कुछ पैमाने भी तय किए हैं। ये मानदंड पूरा करना स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में पहला कदम होगा। स्मार्ट सिटी की सुविधाएं लागू करना दूसरी स्टेज है।
अमर उजाला ने सिटी के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केबी सिंह और पूर्व मेयर सुभाष चावला की मदद से चंडीगढ़ के मौजूदा हालात को मंत्रालय की ओर से बनाए गए पैमाने पर तौलने की एक कोशिश की है। देखते है कि स्मार्ट सिटी की कसौटी पर चंडीगढ़ कितना खरा उतरता है।
स्मार्ट सिटी का ट्रांसपोर्ट
1.ट्रैफिक इतना सुचारू कि 30 मिनट में एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचा जा सके।
2.सभी सड़कों के साथ साइकिल के लिए अलग से ट्रैक होना चाहिए।
3.पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए शहर में कहीं भी दस मिनट से ज्यादा पैदल न चलना पड़े।
चंडीगढ़ का हाल
1.100 वर्ग किलोमीटर के शहर में एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचने के लिए 30 मिनट से कम समय लगता है।
2.शहर में साइकिल ट्रैक खस्ता हालत में है। हर दूसरे दिन हादसे में साइकिल सवार या रिक्शा चालक की जान जाती है।
3.पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फ्रीक्वेंसी सही है। दस मिनट की दूरी तय कर आसानी से ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
एक्सपर्ट कमेंट: ट्रांसपोर्ट सेक्टर में चंडीगढ़ की परफार्मेंस बहुत अच्छी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फ्रीक्वेंसी काफी हद तक सही है। एयरकंडीशन बसे बहुत अच्छी हैं। रात में भी चंडीगढ़ में ऑटो और रेडियो टैक्सी उपलब्ध हो जाती है।
स्मार्ट सिटी में वाटर सप्लाई
.सातों दिन 24 घंटे पानी की सप्लाई।
2.सभी घरों में पानी की सप्लाई के कनेक्शन।
3.प्रति व्यक्ति प्रति दिन135 लीटर पानी।
4. पानी का बिल 100 प्रतिशत वसूला गया हो।
5.हर वाटर कनेक्शन पर मीटर लगे हों।
चंडीगढ़ में स्थिति
1.सातों दिन 24 घंटे पानी सप्लाई नहीं। कई इलाकों में पानी की किल्लत।
2.सभी घरों में पानी सप्लाई के कनेक्शन हैं।
3.प्रति व्यक्ति प्रतिनिद 259 लीटर पानी।
4.पानी बिल की सौ फीसदी वसूली नहीं है।
5.हर वाटर कनेक्शन पर मीटर नहीं लगे हैं।
एक्सपर्ट कमेंट: पानी की फिलहाल कमी नहीं है। नादर्न सेक्टर में हर व्यक्ति को 500 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की सप्लाई होती है। मौलीजागरा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू होने वाली है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त कानून बने तो 24 घंटे सप्लाई हो सकती है। वाटर सप्लाई के मसले पर चंडीगढ़ की स्थिति ठीक है।
स्मार्ट सिटी का सीवरेज सेनिटेशन
1.हरघर में टायलेट की सुविधा हो।
2.सभी स्कूलों में गर्ल्स के लिए अलग टायलेट।
3.हर घर पर वेस्ट वाटर का कनेक्शन होना चाहिए।
चंडीगढ़ का हाल
1.लगभग हर घर में टायलेट की सुविधा है।
2.हरस्कूल में गर्ल्स के लिए अलग से टायलेट हैं।
3. कुछ ही घरों में टर्शरी वाटर के कनेक्शन दिए हैं।
एक्सपर्ट कमेंट: सीवरेज सेनिटेशन के सेक्टर में चंडीगढ़ की स्थिति बहुत अच्छी है। टर्शरी वाटर के इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए एनजीओ की भूमिका महत्वपूर्ण है।
स्मार्ट सिटी में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट
1.प्रत्येक घर पर डोर टू डोर कलेक्शन सिस्टम होना चाहिए।
2.सालिड वेस्ट का सौ फीसदी कलेक्शन होना चाहिए।
3. सौ फीसदी सालिड वेस्ट की रीसाइकिलिंग होनी चाहिए।
चंडीगढ़ में क्या है स्थिति
1.हरघर में डोर टू डोर कलेक्शन सिस्टम है।
2.सालिड वेस्ट का सौ फीसदी कलेक्शन है।
3.सालिड वेस्ट की रीसाइक्लिंग है।
एक्सपर्ट कमेंट: चंडीगढ़ देश का पहला सिटी है, जहां पर सेनिटेशन का कोई भी टैक्स नहीं वसूला जाता है। सातों दिन गारबेज का कलेक्शन है। सड़क व पार्क पर कूड़ा न फैले इसके लिए पहले अवेयरनेस व फिर सख्त कानून बने। इस मुद्दे पर चंडीगढ़ की स्थिति ठीक है।
स्मार्ट सिटी में बिजली
1.हर घर में बिजली कनेक्शन होने चाहिए।
2.सातों दिन 24 घंटे बिजली सप्लाई होनी चाहिए।
3.बिजली बिलों की सौ फीसदी वसूली होनी चाहिए।
चंडीगढ़ में कैसी है व्यवस्था
1.चंडीगढ़ के हर घर पर बिजली कनेक्शन होने चाहिए।
2.लगभग हर इलाके में 24 घंटे की बिजली सप्लाई है।
3.बिजली के बिलों की सौ फीसदी वसूली नहीं है।
एक्सपर्ट कमेंट: चंडीगढ़ में भरपूर बिजली है, लेकिन कई इलाकों में वितरण प्रणाली काफी चौपट है। 60 साल पुरानी वायर है। इसलिए फाल्ट की समस्या आती है। बिजली व्यवस्था के मुद्दे पर चंडीगढ़ अच्छी स्थिति में है।
स्मार्ट सिटी के लिए टेलीफोन व वाइफाई
1.हर घर में टेलीफोन के साथ मोबाइल का कनेक्शन हो।
2.पूरे सिटी में वाइफाई की कनेक्टिविटी होनी चाहिए।
3.इंटरनेट की सौ एमबीपीएस की स्पीड होनी चाहिए।
चंडीगढ़ में स्थिति
1.हर घर पर मोबाइल, लेकिन टेलीफोन का कनेक्शन नहीं है।
2. सिटी में फिलहाल वाइ-फाई की व्यवस्था नहीं है।
एक्सपर्ट कमेंट: चंडीगढ़ में 30 प्रतिशत लोगों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। वाइफाई के क्षेत्र में हम बहुत पीछे हैं। इस सेक्टर में चंडीगढ़ में थोड़ा पिछड़ा है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
स्मार्ट सिटी में हेल्थ केयर
1.हर रेजिडेंट के पास टेलीमेडिसिन की सौ फीसदी व्यवस्था।
2.30 मिनट में इमरजेंसी की सेवा मिलनी चाहिए।
3.15 हजार रेजीडेंस पर एक डिस्पेंसरी होनी चाहिए।
चंडीगढ़ में हेल्थ केयर की स्थिति
1.टेलीमेडिसिन की सुविधा नहीं है। पीजीआई से सिर्फ कुछ इलाकों में है।
2.इमरजेंसी की सुविधा है, लेकिन मजबूत करने की जरूरत है।
3.डिस्पेंसरी है, लेकिन हालत खराब है।
एक्सपर्ट कमेंट: चंडीगढ़ में सुविधा है, लेकिन पीजीआई में भीड़ काफी ज्यादा है। एंबुलेंस की सुविधा मजबूत करने की जरूरत है। टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में मेहनत करने की जरूरत है। सुविधा तो है, लेकिन लोगों को नहीं मिल पा रही है। डिलीवरी सिस्टम सुधारने की जरूरत है।
स्मार्ट सिटी में प्राइमरी व हायर एजुकेशन
1. पांच रेजिडेंट पर एक प्राइमरी स्कूल होना चाहिए।
2. दस लाख जनसंख्या पर एक मेंटली चैलेंज स्कूल होना चाहिए।
3. दस लाख की जनसंख्या पर एक यूनिवर्सिटी, टेक्नीकल एजुकेशन व प्रोफेशनल कालेज होने चाहिए।
चंडीगढ़ की स्थिति
1.प्राइमरी स्कूल की स्थिति अच्छी है।
2.मेंटली चैलेंज स्कूल व इंस्टीट्यूट है।
3. एक यूनिवर्सिटी व प्रोफेशनल कालेज भी हैं।
एक्सपर्ट कमेंट: एजुकेशन के सेक्टर में चंडीगढ़ की स्थिति बहुत अच्छी है। यह क्षेत्र एक हब के तौर पर प्रसिद्ध हो रहा है। स्मार्ट सिटी के मानदंड में चंडीगढ़ पूरी तरह से खरा उतरता है।
स्मार्ट सिटी के अन्य बेंच मार्क
1.रूफ टॉप सोलर पैनेल पब्लिक, सरकारी व कामर्शियल बिल्डिंग में होनी चाहिए
2.95 प्रतिशत रेजिडेंट के पास इम्प्लायमेंट हो
3.शहर का पूरी तरह से अरबनाइजेशन होना चाहिए।
4.शहर का प्रत्येक हिस्सा स्लम फ्री होना चाहिए।
5.सिटीजन की एडवाइजरी कमेटी होनी चाहिए।
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी अड़चन
1.शहर की एक तिहाई जनसंख्या कालोनी व गांवों में है। उन्हें स्मार्ट सिटी के दायरे में लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
2.डपिंग ग्राउंड को शहर से बाहर लेकर जाना। शहर में फिलहाल जगह नहीं बची। दूसरे स्टेट जगह देने के लिए तैयार नहीं है।
3.शहर में लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है। इस पर लगाम लगाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
4.पार्किंग के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
5.नाइट टूरिज्म व नाइट लाइफ को विकसित करना सबसे बड़ी मुश्किले।
6.युवाओं के लिए रोजगार के अवसर ज्यादा नहीं हैं।
7.इन्वेस्टमेंट की संभावनाएं पैदा करना।
8.प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए किसी अथॉरिटी का गठन न होना।
9.मेट्रो सेवा व वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट अब भी दूर की कौड़ी है।