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खुशखबरीः आरसीएफ में बन रहा पहली लंबी दूरी के स्लीपर वेरिएंट ट्विन डैक कोच का डिजाइन
Mon, 13 Jan 2020 12:32 PM IST
खुशबू गोयल
महेश कुमार, अमर उजाला, कपूरथला(पंजाब)
महेश कुमार, अमर उजाला, कपूरथला(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Jan 2020 12:32 PM IST
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रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के कपूरथला में मौजूद रेलवे कोच फैक्टरी में पहली लंबी दूरी के स्लीपर वेरिएंट ट्विन डैक कोच का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। करीब 2.5 से 3 करोड़ की लागत से बनने वाले ट्विन डैक कोच में यात्रियों के सफर करने की क्षमता डबल डैकर कोच के 72 के मुकाबले 120 या इससे अधिक होगी।
भारतीय रेल नेटवर्क में इस समय चेयरकार डबल डैकर कोच विभिन्न ट्रैकों पर सरपट दौड़ रहे हैं, लेकिन यह सभी कोच महज डे-सर्विस ही दे पाते हैं। लंबी दूरी के सफर में ज्यादा देर तक बैठ पाना संभव नहीं है। इन डबल डैकर कोच का स्लीपर वेरिएंट ट्विन डैक कोच होगा, जिसमें सोते हुए सफर किया जा सकेगा।
आरसीएफ में डबल डैकर कोच से ज्यादा क्षमता वाले अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कोच का निर्माण चल रहा है जिसके साल 2020-21 वित्तीय वर्ष में मुकम्मल होने की संभावना है। आरडीएसओ से सुरक्षा और गति मानकों पर खरा उतरने के बाद इसे भारतीय रेल के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
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हालांकि अभी इस डैक का डिजाइन प्रगति अधीन है जिसके बारे में आरसीएफ प्रबंधन की ओर से ज्यादा कोई तकनीकी विशेषताएं नहीं बताई गई है।
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भारतीय रेल नेटवर्क में इस समय चेयरकार डबल डैकर कोच विभिन्न ट्रैकों पर सरपट दौड़ रहे हैं, लेकिन यह सभी कोच महज डे-सर्विस ही दे पाते हैं। लंबी दूरी के सफर में ज्यादा देर तक बैठ पाना संभव नहीं है। इन डबल डैकर कोच का स्लीपर वेरिएंट ट्विन डैक कोच होगा, जिसमें सोते हुए सफर किया जा सकेगा।
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आरसीएफ में डबल डैकर कोच से ज्यादा क्षमता वाले अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कोच का निर्माण चल रहा है जिसके साल 2020-21 वित्तीय वर्ष में मुकम्मल होने की संभावना है। आरडीएसओ से सुरक्षा और गति मानकों पर खरा उतरने के बाद इसे भारतीय रेल के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
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हालांकि अभी इस डैक का डिजाइन प्रगति अधीन है जिसके बारे में आरसीएफ प्रबंधन की ओर से ज्यादा कोई तकनीकी विशेषताएं नहीं बताई गई है।
खड़े होकर सफर करने की समस्या का समाधान
रेल कोच फैक्टरी के महाप्रबंधक रविंदर गुप्ता ने कहा कि रेल में ज्यादातर गरीब जनता सफर करती है, जिनकी प्रतिशतता बेहद ज्यादा है। उन्हें ज्यादातर खड़े होकर सफर करना पड़ता है। इस समस्या को हटाने के लिए आरसीएफ की ओर से ऐसे कोच का निर्माण किया जा रहा है। जिससे बीवी, बच्चों के साथ जाने वाले व्यक्ति को सीट के लिए मारामारी न करनी पड़े।
उन्होंने बताया कि आरसीएफ प्रबंधक की ओर से फैक्टरी के आसपास के गांवों के लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं तलाशने के लिए उनसे संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है। जिससे उन्हें अधिक से अधिक आरसीएफ में रोजगार के अवसर मिल सके। जिससे आरसीएफ प्रबंधन और बढ़िया कोच बनाने के लिए क्रिएटविटी से काम करने की तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर सके।
उन्होंने बताया कि आरसीएफ प्रबंधक की ओर से फैक्टरी के आसपास के गांवों के लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं तलाशने के लिए उनसे संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है। जिससे उन्हें अधिक से अधिक आरसीएफ में रोजगार के अवसर मिल सके। जिससे आरसीएफ प्रबंधन और बढ़िया कोच बनाने के लिए क्रिएटविटी से काम करने की तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर सके।