पंजाब : सरकारी कर्मचारियों को करना होगा और इंतजार, 31 मार्च तक बढ़ा छठे वेतन आयोग का कार्यकाल
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पंजाब सरकार ने छठे वेतन आयोग का कार्यकाल एक महीना और बढ़ाते हुए 31 मार्च, 2021 तक कर दिया है। इसके साथ ही नए वेतनमान का इंतजार कर रहे प्रदेश के सरकारी मुलाजिमों का इंतजार अब और बढ़ गया है। आयोग का कार्यकाल गत 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त हो रहा था। एक जनवरी, 2021 को राज्य सरकार ने इसके कार्यकाल में दो माह का विस्तार करते हुए इसे 28 फरवरी, 2021 तक कर दिया था।
वेतन आयोग की अवधि में इजाफा ऐसे समय में हुआ है, जब दो हफ्ते पहले छठे वेतन आयोग के चेयरमैन द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसे जल्द मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। माना जा रहा था कि राज्य सरकार विधानसभा के बजट सत्र में आयोग की सिफारिशों पर बिल लेकर आएगी लेकिन नए आदेश के बाद मुलाजिमों को 31 मार्च के आधार पर आगामी मानसून सत्र तक इंतजार करना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि सरकारी मुलाजिम पांच साल से इस आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय फरवरी, 2016 में वेतन आयोग का गठन किया गया था। तब सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव आरएस मान के नेतृत्व में आयोग का तीन सदस्यीय पैनल बनाया था लेकिन इसके दो सदस्यों की नियुक्ति में ही नौ माह का समय बीत गया।
दोनों सदस्यों की नियुक्ति नवंबर, 2016 में हो सकी। इसके बाद आयोग अपना कामकाज शुरू कर पाता लेकिन राज्य में सरकार बदल गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद आरएस मान ने व्यक्तिगत कारणों से आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कैप्टन सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव जय सिंह गिल को आयोग की कमान सौंपी और आयोग ने काम करना शुरू किया।
लगातार बढ़ाया जा रहा है आयोग का कार्यकाल
वेतनमान संशोधन रिपोर्ट के लिए आयोग का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जाता रहा, जबकि आयोग के समक्ष अब तक वेतनमान, भत्ते, वेतन-विसंगतियों और अन्य मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों के विभिन्न संघ और अन्य समूहों की ओर से 600 से अधिक रिप्रेजेंटेशन दी जा चुकी हैं। आयोग के गठन और इसके कामकाज को लेकर कर्मचारी संगठन शुरू से ही आवाज उठाते रहे हैं।
दरअसल, आयोग का गठन करने और उसके अध्यक्ष के बदलने के बाद भी राज्य सरकार ने आयोग को कोई कार्यालय स्टाफ नहीं दिया। बस चेयरमैन और सदस्य के रूप में ही यह आयोग चलता रहा। जनवरी, 2019 में आयोग ने सभी विभागों से कर्मचारियों संबंधी डाटा तलब किया था लेकिन यह डाटा कंपाइल करने के लिए आयोग को स्टाफ ही नहीं दिया गया। नतीजतन प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों का डाटा कंपाइल करने का काम कछुआ चाल से आगे बढ़ा। इसके बाद सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक आयोग का कार्यकाल बढ़ाया और फिर छह-छह माह के लिए कार्यकाल में इजाफा करते हुए इसे 31 दिसंबर 2020 तक कर दिया था।