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Future Maker News: हाईकोर्ट से CMD समेत छह को मिली जमानत, कई राज्यों में हुआ था हजारों करोड़ का घोटाला

Thu, 12 Jan 2023 09:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 12 Jan 2023 09:47 PM IST
सार

कंपनी रोजाना हिसार से करीब 10 करोड़ और पूरे देश से 40 करोड़ का निवेश ले रही थी। कंपनी के पास न तो अपना कोई उत्पाद था और न ही कोई मैनुफैक्चुरिंग यूनिट। यह सब फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। कंपनी पर हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट में कुल 28 एफआईआर हैं।

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Six including CMD of Future Maker Company got bail from High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी राधे श्याम समेत पांच अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंजूर करते हुए उन्हें नियमित जमानत दे दी है। याचिका दाखिल करते हुए कंपनी के सीएमडी राधे श्याम, बंसी लाल, अनीश जांगड़ा, राजपाल, सुरेंद्र कुमार व एक अन्य ने उच्च्च न्यायालय से जमानत की मांग की थी। 

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सीएमडी राधे श्याम ने अपनी याचिका में कहा कि इस घोटाले में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उसे निचली अदालत ने छह फरवरी 2019 को नियमित जमानत का लाभ दिया था, जिसे 20 मई को वापस ले लिया गया था। इस फैसले के खिलाफ याची ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद याची ने 20 अक्तूबर 2019 को यह याचिका वापस ले ली थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से न्यायालय को बताया कि कंपनी के 14 चीफ प्रमोटर हैं और 100 मेन प्रमोटर हैं। यह सभी याचिकाकर्ता के अधीन काम करते थे। 
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कंपनी रोजाना हिसार से करीब 10 करोड़ और पूरे देश से 40 करोड़ का निवेश ले रही थी। कंपनी के पास न तो अपना कोई उत्पाद था और न ही कोई मैनुफैक्चुरिंग यूनिट। यह सब फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। कंपनी पर हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट में कुल 28 एफआईआर हैं। इसके साथ ही बताया गया था कि कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार 2956 करोड़ में से अभी कुछ राशि को सत्यापित किया जाना बाकी है। कंपनी के विभिन्न खातों से याची के खाते में करीब एक हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की हिरासत की लंबी अवधि को देखते हुए उन्हें जमानत का लाभ दिया जा सकता है। 
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इससे पहले 2020 में हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि एक कंपनी जो 26 फरवरी 2015 को याची और बंसी लाल ने 10 लाख रुपये से आरंभ की थी। वह कैसे केवल तीन साल में 2956 करोड़ रुपये की हो गई, यह जांच करना बेहद आवश्यक है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि वर्तमान में इतनी बड़ी संख्या में निवेश करने वालों का हित देखते हुए यह आवश्यक है कि याची को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। ऐसे में याची समेत अन्य की जमानत याचिका को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

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