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चंडीगढ़ में महंगाई की मार: बिजली बिल में वास्तविक खपत से ज्यादा के टैक्स, पानी बिल के साथ आ रहा गारबेज चार्ज

Wed, 14 Jul 2021 12:48 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 14 Jul 2021 12:48 PM IST
सार

चंडीगढ़ में घरेलू कनेक्शन पर प्रति यूनिट 9 पैसे और व्यावसायिक कनेक्शन पर प्रति यूनिट 11 पैसे इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी बिल में जोड़ा जाता है। इसके अलावा 10 पैसे प्रति यूनिट नगर निगम (एमसी) टैक्स और दो पैसे प्रति यूनिट गो सेस वसूले जा रहे हैं। फिक्स चार्जेस अलग हैं।

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Six Different Taxes are Included in Electricity Bill in Chandigarh
Electricity - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर बिजली व पानी के बिल में कई तरह के टैक्स लगाकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कोरोना की वजह से बुरी तरह से प्रभावित लोगों को राहत देने के बजाय बिजली के बिल पर खपत चार्जेस के अलावा कुल 6 तरह के टैक्स लगाए जा रहे हैं। वहीं, पानी के बिल में गारबेज चार्जेस से लोग परेशान हैं। 

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जनता से किस तरह से टैक्स वसूला जा रहा है। इसे उदाहरण से समझिए। सेक्टर-27 में रहने वाले कामता प्रसाद का मार्च-अप्रैल महीने का बिजली बिल कुल 1230 रुपये का आया है। हालांकि, इसमें कंजप्शन चार्जेस यानी जितनी बिजली इस्तेमाल की है, उसका बिल 643 रुपये ही है। बाकी छह तरह के टैक्स लगाकर उनका बिल 1230 रुपये का कर दिया गया है। बिल में फिक्स चार्जेस, मीटर रेंटल, अतिरिक्त एसीडी, नगर निगम (एमसी) टैक्स, गो सेस, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लगाया गया है।
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कामता प्रसाद के बिल में सभी टैक्स को मिलाकर कुल 587 रुपये जोड़े गए हैं। इसमें 20 रुपये फिक्स चार्जेस, 23 रुपये इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, 40 रुपये मीटर रेंटल, 30 रुपये एमसी टैक्स और 474 रुपये अतिरिक्त एसीडी के रूप में जोड़े गए हैं। गनीमत है कि बिजली विभाग ने एफपीपीसीए चार्जेस जोड़ने बंद कर दिए हैं। इस मुद्दे पर बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अनिल धमीजा का कहना है कि अतिरिक्त एसीडी साल में एक बार लगाया जाता है। यह सिक्योरिटी होती है, जो उपभोक्ता की ओर से पूरे साल की जाने वाली बिजली खपत की समीक्षा के बाद लिया जाता है। अगर उपभोक्ता की ओर से बिजली खपत बढ़ती है तो उसका 12 महीने का औसत निकाल कर सिक्योरिटी ली जाती है। उन्होंने कहा कि एमसी टैक्स व गो सेस नगर निगम के पास जाता है। ये सदन के फैसले के बाद लागू किए गए थे।
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प्रति यूनिट 10 पैसे एमसी, दो पैसे गो सेस और 9 पैसे इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की हो रही वसूली
प्रशासन की ओर से वसूली का आलम यह है कि अब वास्तविक बिल से ज्यादा टैक्स हो जाता है। बिजली सस्ती होने का हवाला देकर बिजली बिल पर नगर निगम (एमसी) टैक्स, गो सेस, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी जैसे टैक्स वसूले जा रहे हैं। बिजली बिल में सिंगल फेज मीटर का 20 रुपये और थ्री फेज मीटर का 50 रुपये मीटर रेंटल के नाम पर हर महीने वसूला जा रहा है। घरेलू कनेक्शन पर प्रति यूनिट 9 पैसे और व्यावसायिक कनेक्शन पर प्रति यूनिट 11 पैसे इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी बिल में जोड़ा जाता है। इसके अलावा 10 पैसे प्रति यूनिट नगर निगम (एमसी) टैक्स और दो पैसे प्रति यूनिट गो सेस वसूले जा रहे हैं। फिक्स चार्जेस अलग हैं।


पानी के बिल में गारबेज चार्जेस से परेशान हैं लोग
बिजली के बिल में तरह-तरह के टैक्स तो पानी के बिल में गारबेज चार्जेस (कचरे के शुल्क) से लोग काफी परेशान हैं। लोगों को अभी तक समझ नहीं आ रहा है कि नगर निगम किस आधार पर यह चार्जेस लगाकर भेज रहा है, क्योंकि किसी का ये शुल्क 200 रुपये तो किसी का 3750 रुपये है। सेक्टर-19 निवासी हरवंश लाल को नगर निगम ने दो माह का पानी और सीवर का बिल 961 रुपये भेजा है। साथ में मई माह के कचरे का शुल्क 3750 रुपये आया है। हरवंश लाल ने बताया कि उनका मकान 600 गज में है। इसमें 3 किचन हैं। तीनों किचन के कचरे का फरवरी 2021 तक का शुल्क 200 रुपये के हिसाब से रेहड़ी वाले को दिया जा चुका है। वहीं, 11 मई को निगम की ओर आई कचरा उठाने वाली गाड़ी के चालक को 250 रुपये के हिसाब से तीन घरों का 750 रुपये भुगतान भी कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें 3750 रुपये कचरे का शुल्क भेजा गया है।

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