Punjab News: अब हाईकोर्ट की निगरानी में होगी जेल से लॉरेंस के इंटरव्यू मामले की जांच, नई एसआईटी गठित
हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब बॉर्डर स्टेट है, यहां की कानून व्यवस्था का राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इस इंटरव्यू को साइट से हटाया जाए। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि अगर जेलों में बॉडी स्कैनर्स सही तरीके से काम करें और जेल की दीवारों को ऊंचा कर दिया जाए तो इससे भी काफी फर्क पड़ सकता है।
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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल से इंटरव्यू मामले पर पंजाब पुलिस की रिपोर्ट से नाराज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीजीपी ह्यूमन राइट्स प्रबोध कुमार की अगुवाई में नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। एसआईटी में आईपीएस अफसर डॉ. एस राहुल व नीलांबरी जगदले को भी शामिल किया गया है। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच आरंभ करने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि इस जांच की निगरानी हाईकोर्ट करेगा।
गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को सहयोग दे रही एडवोकेट तनु बेदी ने कहा कि इंटरव्यू को देखकर कई युवा लॉरेंस बिश्नोई के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं। इस इंटरव्यू ने जेल सिस्टम की पोल खोली है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, यहां की कानून व्यवस्था का राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा प्रभाव है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पिछली एसआईटी ने जांच में आठ माह लगा दिए और बिना नतीजे वाली रिपोर्ट दाखिल कर दी। जेल की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, जो बेहद गंभीर मामला है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि इंटरव्यू कहां पर हुआ। डीजीपी ह्यूमन राइट्स प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यों वाली एसआईटी इस मामले में एफआईआर दर्ज करेगी और जांच आरंभ करेगी। एसआईटी पता लगाएगी कि यह इंटरव्यू कहां पर हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं। अगर यह अंतरराज्यीय मामला हुआ तो इसे सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
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कहीं दुश्मन देश प्रभावित युवाओं को न बना ले हथियार
कोर्ट ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू लाखों लोगों ने देखा है और इससे युवा वर्ग में एक संदेश जा रहा है। युवा इस इंटरव्यू के बाद यह सोचने लगे हैं कि गैंगस्टरों की लाइफ बहुत अच्छी है, यह उन्हें अपराध जगत में खींचने का काम कर रहा है। इस सोच से प्रभावित युवाओं को दुश्मन देश भारत के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में इस इंटरव्यू को इंटरनेट से हटाना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि इस इंटरव्यू को इंटरनेट से हटाया जाए।
मीडिया पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि मीडिया को मिली स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप किसी शातिर अपराधी को लोगों के समक्ष हीरो के रूप में प्रस्तुत करें। लॉरेंस बिश्नोई जिस पर जघन्य अपराधों के अब तक 71 मामले दर्ज हो चुके हैं उसका इंटरव्यू में महिमा मंडन हुआ जो सही नहीं है।