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राम रहीम को माफी पर सिख संगठन नाराज
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर,जालंधर(पंजाब)
Updated Sat, 26 Sep 2015 12:19 AM IST
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत राम रहीम सिंह को पांच सिंह साहिबान की ओर से माफी दिए जाने पर विभिन्न सिख संगठनों ने नाराजगी जताई है जबकि हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे पंजाब की शांति के लिए सही कदम बताया है।
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शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के नेता हरबीर संधू, मोहकम सिंह ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करना सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। सिख यूथ नेता भाई बलवंत सिंह गोपाला ने कहा कि माफी राजनीतिक दबाव में दी गई है। छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन के राज्य उपाध्यक्ष सतविंदर सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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जालंधर में अकाली दल मान अमृतसर के मोहकम सिंह ने कहा कि डेरा मुखी की गलती को सिख जत्थेबंदियों की रजामंदी के बिना माफ नहीं किया जा सकता है। यूनाइटेड अकाली दल के गुरदीप सिंह बठिंडा ने कहा कि सरकार को सिख समाज की मर्यादाओं के बीच में नहीं आना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि बाबा राम रहीम को इतनी बड़ी गलती की माफी एक पत्र भेज कर नहीं मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सिख साहिबानों को राजनीति में आकर ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जो समाज की मर्यादा और धर्म के खिलाफ हो। इसलिए सिख जत्थेबंदियों की 27 सितंबर को अमृतसर के शहीद गंज गुरुद्वारा में मीटिंग रखी गई है।
इसमें पंजाब समेत हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और विदेशों के सिख जत्थेबंदियों से शामिल होने की अपील की गई है। उधर, सिख तालमेल कमेटी के प्रधान तजिंदर सिंह परदेसी व गुरमीत सिंह बिट्टू का कहना है कि उनकी सिख कौम ने शहादत दी है। संत गुरमीत सिंह के खिलाफ सिख संगतों में रोष है। वहीं छठी पातशाही गुरुद्वारा के प्रधान जगजीत सिंह गाबा का कहना है कि अकाल तख्त के पास जो चलकर ही नहीं गया, उसको माफी किस बात की।
वहीं श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिह ने मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में भाई रणजीत सिंह ने कहा कि जत्थेदारों ने राम रहीम को माफ करके गलत किया है, जिसके लिए खालसा पंथ पांच जत्थेदारों को कभी माफ नहीं करेगा। पत्र में कहा गया कि जत्थेदारों ने जो किया है, वह माफी के लायक नहीं है।
बादल परिवार के दबाव में मिली माफी: लुधियाना के आजाद विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने आरोप लगाया किडेरा प्रमुख को माफी के पीछे बादल परिवार है। बादल परिवार के दबाव में ही सिंह साहिबान ने यह कदम उठाया है। बैंस ने कहा कि वह माफी देने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन माफी देने का तरीका सही नहीं है।
इससे पहले जब भी श्री अकाल तख्त के सामने ऐसा मामला आता था तो व्यक्ति को श्री अकाल तख्त के सचिवालय में बुलाया जाता। वह वहां अपनी गलती मानता था। उसके बाद उस पर धार्मिक सजा लगाई जाती थी। इसके बाद माफी कबूल होती है।
इधर, हिंदू संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
पटियाला/ अमृतसर। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहिब से माफी मिलने के फैसले का हिंदू संगठनों ने स्वागत किया है। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के प्रदेश के सीनियर उपप्रधान राजेश केहर ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा एक अलग पंथ है।
श्री अकाल तख्त साहिब ने बेवजह ही उनके मामले में दखलंदाजी की थी। शिव सेना (बाल ठाकरे) के सीनियर प्रदेश लीडर हरीश सिंगला ने कहा कि संतों का काम ही माफी देना व दया करना होता है। अमृतसर में हिंदू संगठन हिंदू संग्राम परिषद के नेता राजीव देवगन ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करके अकाल तख्त साहिब ने पंजाब में शांति के माहौल को और मजबूती प्रदान की है। बजरंग दल के नेता सुधीर अरोड़ा ने कहा कि पांच सिंह साहिबान का फैसला पंजाब के शांतिपूर्ण भविष्य के लिए बढ़िया कदम है।