68 साल बाद मिले भाई, एक सिख निकला, एक मुस्लिम
भारत-पाक बंटवारे में बिछुड़े परिवार का 68 वर्ष बाद मिलन हुआ है। बंटवारे में पाकिस्तान के जिला स्यालकोट (अब नारोवाल) से सात भाइयों में से छह तो भारत के पंजाब के कपूरथला के गांव घुग्ग बेट आकर सिख धर्म की मर्यादा के तहत आकर बस गए।
पाकिस्तान रह गए सबसे बड़ा भाई चाहे अब इस दुनिया में नहीं, लेकिन उसके पोते मोहम्मद एहसान के जेहन में अपने दादा से सुनी छह भाइयों की दास्तान ने उसे भारत में बसने वाले अपने परिवार से मिलने की ललक बढ़ा दी।
जब भी कोई भारतीय जत्था ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब (पाकिस्तान) आता तो मोहम्मद एहसान की आंखों की चमक बढ़ जाती कि काश! इस जत्थे में शामिल लोगों से पूछताछ में उसे अपने भारतीय परिवार के बारे में जानकारी मिल जाए। मोहम्मद एहसान की यह तलाश वर्ष 2013 को उस समय पूरी हुई, जब भारत से फैसलाबाद (पाकिस्तान) कबड्डी खेलने गई टीम में शामिल कुलदीप सिंह निवासी गांव शिकार मसीतां गुरदासपुर और बलकार सिंह से मोहम्मद एहसान ने अपने बिछुड़े परिवार के बारे में बताया।
वापस आने पर इन दोनों खिलाड़ियों ने किसी तरह से गांव घुग्ग बेट निवासी संत बाबा सुलक्खन सिंह का मोबाइल नंबर मोहम्मद एहसान को दिया। इसके बाद फोन से दोबारा शुरू हुई रिश्तों की गर्माहट ने सरहदों में बंटे दोनों चचेरे भाइयों को मिलने के लिए मजबूर कर दिया।
नए साल ने लिखी खुशी की इबारत
नए साल 2015 को 43 वर्षीय मोहम्मद एहसान अपनी अम्मी 85 वर्षीय आयशा बीबी, बहन मुमताज और छोटी बेटी बुशरा बीबी के साथ वाघा बार्डर के रास्ते कपूरथला पहुंचे। अब इन दोनों परिवारों की जुबां पर एक ही रट है, इंशाअल्लाह! अब किसी भी कीमत पर परिवार बंटने नहीं देंगे।
68 बरसों की तड़प आंखों में छलक पड़ी। मोहम्मद एहसान पुत्र मोहम्मद खुर्शीद निवासी जिला नारोवाल गांव लुहान स्टेट लहंदा पंजाब (पाकिस्तान) बताते हैं कि उनके दादा वीर सिंह सहित सात भाई ईशर सिंह, मेहर सिंह, मूला सिंह, खजान सिंह, गुरमुख सिंह गुरा और सोहन सिंह थे। बस, इनसे मिलने की लालसा कपूरथला ले आई।
गांव घुग्ग बेट के पूर्व सरपंच तिरलोक सिंह ने बताया कि एक माह तक तो मोहम्मद एहसान उन्हें फोन करता रहा। पांच-छह माह पहले संत बाबा सुलक्खन सिंह, प्रताप सिंह, माता महिंदर कौर व जागीर सिंह पाकिस्तान गए और मोहम्मद एहसान से मिले। उनके मिलने के बाद मोहम्मद एहसान के पिता मोहम्मद खुर्शीद का इंतकाल हुआ।
शौहर के भारतीय परिवार से मिलने को डाला दबाव
इस परिवार के मिलने में सबसे रोचक बात यह रही कि मोहम्मद एहसान की अम्मी आयशा बीबी कट्टर मुसलमान हैं। फिर भी उसने अपने शौहर के भारतीय परिवार से मिलने के लिए बार-बार दबाव डाला।
मोहम्मद एहसान का पाकिस्तान में खेतीबाड़ी का व्यवसाय है। उसकी तीन और बहनें सूरा बीबी, आबिदा बीबी और खालिदा बीबी हैं। उसकी पत्नी विलधार और पांच लड़कियां और बेटा जायन अली शेर है।
मोहम्मद एहसान ने कहा कि भारत आने के लिए उसे दो माह का समय अनुमति लेने के लिए लगा। दोनों मुल्कों की सरकारों को चाहिए कि वह वीजा प्रणाली सरल होनी चाहिए ताकि सरहदों की सीमा रिश्तों में अड़चन न बने।