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ऐतिहासिक श्री हरमंदिर साहिब में सोने की सफाई का काम शुरू, 25 सेवक दस दिन तक करेंगे सेवा
Thu, 12 Mar 2020 05:01 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर(पंजाब)
अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 12 Mar 2020 05:01 PM IST
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श्री हरमंदिर साहिब
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सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में लगे सोने की सफाई का काम वीरवार सुबह खालसाई जयकारों के बीच शुरू हो गया। मुख्य भवन के सबसे ऊंचे गुंबद से सोने की सफाई की सेवा शुरू की गई। सोने की सफाई रीठा के पानी के साथ की जा रही है। श्री हरमंदिर साहिब के प्रबंधक जसविंदर सिंह दीनपुर ने बताया कि सफाई कार्य दस दिन तक चलेगा।
श्री गुरुनानक निष्काम सेवक जत्थे के मुखिया भाई मोहिंदर सिंह बर्मिंघम वालों द्वारा वर्ष 2003 में यह सेवा शुरू की गई थी। सचखंड के मुख्य भवन में सुशोभित लगभग 800 किलोग्राम सोने की आभा स्थापित रहे, इसको देखते हुए भाई मोहिंदर सिंह ने इंग्लैंड से 25 सदस्यों के एक जत्थे को सोने की सफाई के लिए भेजा था। तब से प्रति वर्ष इसी जत्थे के सदस्य मुख्य भवन के सोने की सफाई करते हैं।
शेरे-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह ने अपने शासन काल के दौरान सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में सोने की कार सेवा करवाई थी। महाराजा रंजीत द्वारा मुख्य भवन में लगाए गए सोने की आभा 160 वर्ष तक रही। बाद में इसकी चमक फीकी पड़ने लगी थी।
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1995 में भाई मोहिंदर सिंह ने एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के सामने श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन के सोने की नई कार सेवा करने का प्रस्ताव रखा था। मंजूरी के बाद महाराजा रंजीत सिंह द्वारा सुशोभित किया सोना उतार कर नया सोना लगाया गया था।
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श्री गुरुनानक निष्काम सेवक जत्थे के मुखिया भाई मोहिंदर सिंह बर्मिंघम वालों द्वारा वर्ष 2003 में यह सेवा शुरू की गई थी। सचखंड के मुख्य भवन में सुशोभित लगभग 800 किलोग्राम सोने की आभा स्थापित रहे, इसको देखते हुए भाई मोहिंदर सिंह ने इंग्लैंड से 25 सदस्यों के एक जत्थे को सोने की सफाई के लिए भेजा था। तब से प्रति वर्ष इसी जत्थे के सदस्य मुख्य भवन के सोने की सफाई करते हैं।
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शेरे-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह ने अपने शासन काल के दौरान सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में सोने की कार सेवा करवाई थी। महाराजा रंजीत द्वारा मुख्य भवन में लगाए गए सोने की आभा 160 वर्ष तक रही। बाद में इसकी चमक फीकी पड़ने लगी थी।
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1995 में भाई मोहिंदर सिंह ने एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के सामने श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन के सोने की नई कार सेवा करने का प्रस्ताव रखा था। मंजूरी के बाद महाराजा रंजीत सिंह द्वारा सुशोभित किया सोना उतार कर नया सोना लगाया गया था।
सेवा इंग्लैंड की संगत द्वारा भी की गई थी
सोने की सेवा इंग्लैंड की संगत द्वारा भी की गई थी। 1999 के खालसा पंथ की त्रि-शताब्दी समारोह के आयोजन से पहले यह कार सेवा संपन्न हो गई थी। एसजीपीसी ने महाराजा रंजीत सिंह द्वारा लगाए गए सोने को अब बंद कमरों में संरक्षित किया हुआ है। पहले एसजीपीसी ने इस ऐतिहासिक धरोहर को संगत के दर्शनों के लिए एक योजना तैयार की थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हो पाया।
कोयले की भट्ठियों को बंद किया गया था
श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में लगाए गए सोने की आभा पर प्रदूषण का भी प्रभाव पड़ता रहा है। मुख्य भवन के सोने को प्रदूषण से बचने के लिए तत्कालीन डीसी केएस पन्नू ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास के इलाकों में चल रही सोने की भट्ठियों में कोयले के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी थी।
सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगरों को गैस उपलब्ध करवाई गई थी। जिला प्रशासन ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास वाहनों के आने जाने पर भी पाबंदी लगा दी थी। पंजाब सरकार ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास के इलाके के प्रदूषण की जांच के लिए स्थायी रूप में आधुनिक मशीन स्थापित की हुई है।
कोयले की भट्ठियों को बंद किया गया था
श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में लगाए गए सोने की आभा पर प्रदूषण का भी प्रभाव पड़ता रहा है। मुख्य भवन के सोने को प्रदूषण से बचने के लिए तत्कालीन डीसी केएस पन्नू ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास के इलाकों में चल रही सोने की भट्ठियों में कोयले के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी थी।
सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगरों को गैस उपलब्ध करवाई गई थी। जिला प्रशासन ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास वाहनों के आने जाने पर भी पाबंदी लगा दी थी। पंजाब सरकार ने श्री हरमंदिर साहिब के आसपास के इलाके के प्रदूषण की जांच के लिए स्थायी रूप में आधुनिक मशीन स्थापित की हुई है।