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अमृतसरः श्रद्धापूर्वक मनाया अकाल तख्त साहिब का स्थापना दिवस, मिस्त्री की मदद के बिना बनाया था

Tue, 02 Jul 2019 04:44 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 02 Jul 2019 04:44 PM IST
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shri akal takht sahib foundation day celebration, giani harpreet singh
ज्ञानी हरप्रीत सिंह - फोटो : फाइल फोटो
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिख कौम के सर्वोच्च अस्थान श्री अकाल तख्त साहिब का स्थापना दिवस श्रद्धा और उत्साह से मनाया। श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई जगदीप सिंह के जत्थे के गुरुबाणी का कीर्तन कर संगत को गुरु चरणों के साथ जोड़ा। श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह ने अरदास की। पावन हुक्मनामा ज्ञानी गुरमुख सिंह ने लिया।
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इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख कौम  का सर्वोच्च अस्थान है। श्री अकाल तख्त साहिब की स्थापना से पहले श्री गुरु अर्जन देव जी ने श्री हरमंदिर साहिब की स्थापना कर वहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश कर सिख धर्म को एक विलक्षण अस्तित्व वाले धर्म के रूप में स्थापित कर दिया था। श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने गुरयाई धारण कर मीरी-पीरी की दो किरपाणें धारण की।
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अकाल पुरख की आज्ञा के अनुसार भाई गुरदास जी व बाबा बुड्ढा जी को साथ लेकर 1606 में इस महान तख्त की स्थापना की। इस दैवीय तख्त के निर्माण में किसी मिस्त्री की मदद नहीं ली गई थी। तख्त साहिब का निर्माण भाई गुरदास जी व बाबा बुड्ढा जी द्वारा किया गया था। कौम के बुजुर्ग और विद्वान इस स्थापना में सहायक होते हैं। संस्थाओं की स्थापना में दिन-महीने नहीं सदियां लग जाती हैं। आज के दिन विश्व भर में रहने वाले सिखों को श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित होकर काम करना चाहिए।
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गुरु साहिबान के संदेश व फलसफे का प्रचार-प्रसार करना चाहिए। पिछले कुछ दशकों से कुछ सिख विरोधी ताकतें सिखों को अकाल तख्त से अलग-थलग करने की साजिश रच रही हैं। संगत इस षड्यंत्र के प्रति जागरूक रहें। इस अवसर पर श्री अकाल तख्त के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरमुख सिंह ने कहा कि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने इस पावन तख्त की स्थापना कर सिख कौम की न्यारी हस्ती को दुनिया के सामने रखा। इस अवसर पर एसजीपीसी के सचिव मंजीत सिंह बाठ, बलविंदर सिंह जोड़ा सिंघा और सुखदेव सिंह मौजूद थे।
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