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मोहाली: 3 घंटे में आदेश बदला- सस्पेंड नहीं, सिर्फ पार्षद पद से हटाने का नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
Updated Fri, 05 Jan 2018 09:49 AM IST
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Mayor Kulwant Singh
- फोटो : File Photo
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कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से पार्टी की आंखों की किरकिरी बने मोहाली के मेयर कुलवंत सिंह पर वीरवार को हाई वॉल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा चला। स्थानीय निकायमंत्री नवजोत सिद्धू ने प्रूनिंग मशीन दोगुनी से ज्यादा कीमत पर खरीदने के आरोप में मेयर को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया।
तीन घंटे बाद गलती का अहसास होने पर सिद्धू बैकफुट पर आ गए। इसके बाद सरकार ने नया बयान जारी कर कहा कि कुलवंत सिंह को पार्षद पद से हटाने का नोटिस दिया गया है, न कि मेयर पद से सस्पेंड करने का। माहिरों के मुताबिक मेयर एक निर्वाचित सदन द्वारा चुना गया नुमाइंदा होता है। उसे मेयर पद से हटाने का अधिकार भी सदन के पास ही होता है। इसलिए सरकार को किरकिरी से बचने के लिए फिर से बयान जारी करना पड़ा।
मोहाली के मेयर प्रूनिंग मशीन खरीद के आदेश देने के बाद से विवादों में घिरे थे। इसे लेकर मोहाली निगम सदन की बैठक में भी हंगामा हो चुका है। निकाय मंत्री सिद्धू ने बताया कि विभाग के ध्यान में आया था कि प्रूनिंग मशीन (पेड़ों की छंटाई करने वाली मशीन) की खरीद के समय मेयर और कमिश्नर ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को काफी चपत लगाई थी।
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इस मशीन की कीमत भारत में 28 लाख थी, विदेश से मंगवाने पर 80 लाख की पड़ती। लेकिन 1.79 करोड़ में मशीन खरीदने का प्रस्ताव पास कर खरीद के आदेश जारी कर दिए गए। विभाग के चीफ विजिलेंस अफसर की जांच रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई है।
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तीन घंटे बाद गलती का अहसास होने पर सिद्धू बैकफुट पर आ गए। इसके बाद सरकार ने नया बयान जारी कर कहा कि कुलवंत सिंह को पार्षद पद से हटाने का नोटिस दिया गया है, न कि मेयर पद से सस्पेंड करने का। माहिरों के मुताबिक मेयर एक निर्वाचित सदन द्वारा चुना गया नुमाइंदा होता है। उसे मेयर पद से हटाने का अधिकार भी सदन के पास ही होता है। इसलिए सरकार को किरकिरी से बचने के लिए फिर से बयान जारी करना पड़ा।
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मोहाली के मेयर प्रूनिंग मशीन खरीद के आदेश देने के बाद से विवादों में घिरे थे। इसे लेकर मोहाली निगम सदन की बैठक में भी हंगामा हो चुका है। निकाय मंत्री सिद्धू ने बताया कि विभाग के ध्यान में आया था कि प्रूनिंग मशीन (पेड़ों की छंटाई करने वाली मशीन) की खरीद के समय मेयर और कमिश्नर ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को काफी चपत लगाई थी।
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इस मशीन की कीमत भारत में 28 लाख थी, विदेश से मंगवाने पर 80 लाख की पड़ती। लेकिन 1.79 करोड़ में मशीन खरीदने का प्रस्ताव पास कर खरीद के आदेश जारी कर दिए गए। विभाग के चीफ विजिलेंस अफसर की जांच रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई है।
मशीन खरीद का सौदा रद्द करने के आदेश
Mayor Kulwant Singh
- फोटो : File Photo
तत्कालीन निगम कमिश्नर सहित कई अफसरों पर भी गिरी गाज
इस मामले में तत्कालीन निगम कमिश्नर राजेश धीमान को चार्जशीट कर उनको सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है। इसी मामले में निगम के एक्सईएन नरेश बत्ता और डीसीएफए विनायक को सस्पेंड कर दिया गया है। एसीए महिंदर पाल और सुरिंदर गोयल को चार्जशीट किया गया है। मोहाली निगम के स्थानीय फंड ऑडिटर को भी चार्जशीट करने की सिफारिश की गई है।
मशीन खरीद का सौदा रद्द करने के आदेश
सरकार की ओर से मशीन खरीदने के सौदे को तुरंत रद्द करने और कॉन्ट्रैक्टर को दी एडवांस राशि रिकवर करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद ही तैयार हो गई थी कुलवंत के जाने की स्क्रिप्ट
कुलवंत सिंह ने अकाली दल से बगावत कर अपना आजाद ग्रुप बना कर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस विधायक बलबीर सिद्धू ने समर्थन देकर उन्हें मेयर बनाया था। कांग्रेस और कुलवंत का गठबंधन बहुत अच्छे ढंग से चल रहा था। लेकिन मार्च में सूबे की सत्ता में कांग्रेस के आने के बाद से ही कुलवंत के जाने की स्क्रिप्ट लिखी गई थी। इसी के साथ ही विधायक सिद्धू और कुलवंत के संबंधों में भी कड़वाहट आनी शुरू हो गई थी।
इस मामले में तत्कालीन निगम कमिश्नर राजेश धीमान को चार्जशीट कर उनको सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है। इसी मामले में निगम के एक्सईएन नरेश बत्ता और डीसीएफए विनायक को सस्पेंड कर दिया गया है। एसीए महिंदर पाल और सुरिंदर गोयल को चार्जशीट किया गया है। मोहाली निगम के स्थानीय फंड ऑडिटर को भी चार्जशीट करने की सिफारिश की गई है।
मशीन खरीद का सौदा रद्द करने के आदेश
सरकार की ओर से मशीन खरीदने के सौदे को तुरंत रद्द करने और कॉन्ट्रैक्टर को दी एडवांस राशि रिकवर करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद ही तैयार हो गई थी कुलवंत के जाने की स्क्रिप्ट
कुलवंत सिंह ने अकाली दल से बगावत कर अपना आजाद ग्रुप बना कर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस विधायक बलबीर सिद्धू ने समर्थन देकर उन्हें मेयर बनाया था। कांग्रेस और कुलवंत का गठबंधन बहुत अच्छे ढंग से चल रहा था। लेकिन मार्च में सूबे की सत्ता में कांग्रेस के आने के बाद से ही कुलवंत के जाने की स्क्रिप्ट लिखी गई थी। इसी के साथ ही विधायक सिद्धू और कुलवंत के संबंधों में भी कड़वाहट आनी शुरू हो गई थी।