{"_id":"63ebe934b7f1a724dd022b3d","slug":"shopkeeper-ordered-to-vacate-shop-by-17-e-tender-today-chandigarh-news-c-16-1-pkl1004-62093-2023-02-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़: दुकानदार को 17 तक दुकान खाली करने का आदेश, ई-टेंडर आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़: दुकानदार को 17 तक दुकान खाली करने का आदेश, ई-टेंडर आज
विज्ञापन
चंडीगढ़। गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच) सेक्टर-16 स्थित दवा की दुकान नंबर 6 और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए जिला अदालत के फैसले पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही दुकानदार से दुकान खाली कराने और नए सिरे से किराए पर देने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। दुकानदार को 17 फरवरी तक दुकान खाली करना होगा। उधर, हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने भी टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। बुधवार अपराह्न तीन बजे से ई-टेंडर प्रक्रिया के तहत दुकान को किराए पर लेने के लिए आवेदन शुरू हो जाएंगे। इच्छुक लोग 9 मार्च शाम पांच बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वहीं, बुधवार दोपहर 12 बजे तक दुकान में दीवार खड़ी कर अतिक्रमण कर कब्जाई गई जगह को हटाने को कहा गया है। बता दें कि इससे पहले जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए प्रशासन को आदेश दिया था कि डायरेक्टर हेल्थ सर्विस दुकान में किसी भी तरह का दखल न दें।
डायरेक्टर हेल्थ सर्विस ने आदेश दिया था कि दुकानदार ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके दुकान का एरिया बढ़ा लिया है दुकानदार को कब्जा खाली करने के लिए नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस के खिलाफ दुकानदार ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जिला अदालत में बचाव पक्ष के वकील मुनीष दिवान ने बताया था कि अदालत ने डायरेक्टर हेल्थ सर्विस को आदेश दिए हैं कि वह दुकान संचालक को परेशान नहीं करेंगे व दुकानदार के काम में किसी भी तरह की बाधा नहीं डालेंगे।
जिला अदालत की इस आदेश के खिलाफ प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपील की जिसके बाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए दुकान खाली करने और नए सिरे से टेंडर करने का रास्ता साफ कर दिया है। प्रशासन की दलील थी कि जहां साथ की अन्य दुकानों के मासिक किराया करीब 17 लाख रुपये है वहीं इस दुकान का किराया मात्र तीन लाख रुपये है।
विज्ञापन
यह था मामला
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच-16 में दवा की दुकान चला रहे सुनील कुमार की 28 साल पुरानी लीज को खत्म कर दिया था। 29 सालों से वह हॉस्पिटल में दुकान चला रहे थे। वर्ष 1993 में सिर्फ 2 सालों के लिए उन्हें दुकान आवंटित हुई थी। वर्ष 1995 के बाद से दोबारा टेंडर नहीं निकाला गया और प्रत्येक 5 वर्ष में लीज को आगे बढ़ा दिया जाता था। अप्रैल 2020 की फाइनेंस विभाग की नोटिफिकेशन के आधार पर लीज बढ़ाई जा रही थी। हालांकि बीते 28 सितंबर को नोटिफिकेशन वापस ले ली गई थी जिसके बाद 30 सितंबर को दुकान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्रशासन का यह भी कहना था कि दुकान के लिए घेरी गई जगह के हिसाब से सुनील काफी कम किराया दे रहे हैं। इसे प्रशासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। दुकान खाली करने के आदेश के खिलाफ सुनील कुमार जिला अदालत चले गए थे जहां उन्हें स्टे मिल गई थी।
विज्ञापन
डायरेक्टर हेल्थ सर्विस ने आदेश दिया था कि दुकानदार ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके दुकान का एरिया बढ़ा लिया है दुकानदार को कब्जा खाली करने के लिए नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस के खिलाफ दुकानदार ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जिला अदालत में बचाव पक्ष के वकील मुनीष दिवान ने बताया था कि अदालत ने डायरेक्टर हेल्थ सर्विस को आदेश दिए हैं कि वह दुकान संचालक को परेशान नहीं करेंगे व दुकानदार के काम में किसी भी तरह की बाधा नहीं डालेंगे।
विज्ञापन
जिला अदालत की इस आदेश के खिलाफ प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपील की जिसके बाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए दुकान खाली करने और नए सिरे से टेंडर करने का रास्ता साफ कर दिया है। प्रशासन की दलील थी कि जहां साथ की अन्य दुकानों के मासिक किराया करीब 17 लाख रुपये है वहीं इस दुकान का किराया मात्र तीन लाख रुपये है।
विज्ञापन
यह था मामला
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच-16 में दवा की दुकान चला रहे सुनील कुमार की 28 साल पुरानी लीज को खत्म कर दिया था। 29 सालों से वह हॉस्पिटल में दुकान चला रहे थे। वर्ष 1993 में सिर्फ 2 सालों के लिए उन्हें दुकान आवंटित हुई थी। वर्ष 1995 के बाद से दोबारा टेंडर नहीं निकाला गया और प्रत्येक 5 वर्ष में लीज को आगे बढ़ा दिया जाता था। अप्रैल 2020 की फाइनेंस विभाग की नोटिफिकेशन के आधार पर लीज बढ़ाई जा रही थी। हालांकि बीते 28 सितंबर को नोटिफिकेशन वापस ले ली गई थी जिसके बाद 30 सितंबर को दुकान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्रशासन का यह भी कहना था कि दुकान के लिए घेरी गई जगह के हिसाब से सुनील काफी कम किराया दे रहे हैं। इसे प्रशासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। दुकान खाली करने के आदेश के खिलाफ सुनील कुमार जिला अदालत चले गए थे जहां उन्हें स्टे मिल गई थी।