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Chandigarh News: पंजाब सरकार को झटका, पीयू कर्मियों को सचिवालय कर्मियों के समान मिलेगा वेतन

Sat, 18 May 2024 04:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2024 04:09 AM IST
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Shock to Punjab government, PU employees will get salary equal to secretariat employees
चंडीगढ़। पंजाब सकरार को झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) अमृतसर के हजारों कर्मियों को सचिवालय कर्मियों की तरह वेतन व भत्तों का लाभ देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने यह फैसला पंजाब सरकार के उस आदेश को रद्द करते हुए सुनाया, जिसके तहत कर्मियों को इस लाभ से वंचित किया गया था।सबसे पहले गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि उन्हें वर्ष 1979 से सचिवालय कर्मियों की तरह वेतन और भत्तों का लाभ दिया जा रहा था। इसको यूनिवर्सिटी की फाइनेंस कमेटी और सीनेट ने मंजूरी दी थी और सरकार ने भी स्वीकार किया था लेकिन वर्ष 2019 में पंजाब सरकार ने आदेश जारी कर यूनिवर्सिटी कर्मियों को सचिवालय कर्मियों से अलग मानते हुए समान लाभ देने से इन्कार कर दिया था।
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इसके बाद कई दशक से मिल रहे वेतन व अन्य लाभ से हजारों कर्मियों को वंचित कर दिया गया। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के कर्मियों ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। याचिका में कहा गया था कि सीनेट व सिंडीकेट यूनिवर्सिटी की सुप्रीम बॉडी हैं, उन्होंने जब प्रस्ताव पास कर दिया तो पंजाब सरकार कैसे यह लाभ देने से इन्कार कर सकती है। कोर्ट को बताया गया कि इन सुप्रीम बॉडी में पंजाब के शिक्षा सचिव व अन्य सचिव भी शामिल होते हैं। इन याचिकाओं का विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने कहा था कि यूनिवर्सिटी के कर्मियों को सचिवालय और विधानसभा कर्मियों के समान नहीं माना जा सकता। सचिवालय और विधानसभा के कर्मचारी काफी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं और ऐसे में यूनिवर्सिटी के कर्मियों को उनके समान भुगतान नहीं किया जा सकता। जस्टिस नामित कुमार ने इस आदेश को चुनौती देने वाली 11 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार के आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चार दशक से मिल रहे लाभ को अचानक सरकार कैसे रोक सकती है। वह भी तब जब निर्णय सीनेट और सिंडीकेट में लिया गया और उसमें सरकार के उच्च अधिकारी शामिल थे। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी की स्वायत्ता में दखल नहीं देना चाहिए। ऐसे में अब इन यूनिवर्सिटी के कर्मियों को चार दशक से मिल रहे लाभ आगे भी जारी रहेंगे।
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दस रुपये से शुरू हुई थी वेतन की लड़ाई
पंजाब यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को 70 के दशक में 120 रुपये का पे स्केल मिलता था, तब पंजाब सरकारी कर्मचारियों का पे स्केल 110 रुपये था। पंजाब सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को 110 रुपये के स्तर पर आने को कहा तो विवाद हुआ। विवाद का निपटारा करने के लिए तय किया गया कि कर्मचारियों को सचिवालय कर्मियों के समान माना जाएगा और उन्हें बराबर वेतन के साथ सभी लाभ दिए जाएंगे। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने भी पंजाब यूनिवर्सिटी का अनुसरण किया। चार दशक बाद वर्ष 2019 में विवि के कर्मचारियों को सचिवालय कर्मियों के समान वेतन व लाभ देने पर विवाद पैदा हुआ और यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को इससे वंचित कर दिया गया। करीब पांच साल की लड़ाई के बाद अब अदालत ने यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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