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शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 07 Apr 2016 02:38 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में अकाली दल की सदस्यता बहाल करने को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। हाईकोर्ट मामले में फिर से सुनवाई शुरू करेगी। इससे पहले मामले को लेकर हाईकोर्ट ने अपना फैसला 5 महीने से सुरक्षित रखा हुआ है। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जी रोहिणी द्वारा खुद को केस से अलग कर लिए जाने के बाद मामले को पीठ के सामने रखा गया।
अब हाईकोर्ट 5 महीने पुरानी इस याचिका पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेगी। मामले में फैसला 5 नवंबर 2015 को सुरक्षित रखा गया था। उसके बाद 21 अप्रैल को मामले की चौथी सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता सुरक्षित रखे गए फैसले का भविष्य जानना चाहते थे, इसलिए यह मामला 9 फरवरी 2015 को चीफ जस्टिस के सामने रखा गया।
गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा ने 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करके चुनाव आयोग से नियम पूछते हुए शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया था। याचिका में कहा गया था कि जन प्रतिनिधित्व एक्ट के तहत सेकुलर पार्टी ही ससंदीय और विधानसभा चुनाव लड़ सकती है।
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याचिका में दावा किया गया कि शिरोमणि अकाली दल ने गुरुद्वारा चुनाव आयोग के सामने सिख धार्मिक संस्था के तौर पर अपना संविधान पेश किया, वहीं दूसरी ओर शिअद ने खुद को सेकुलर पार्टी बताते हुए संविधान की एक कॉपी चुनाव आयोग को दी। खेड़ा ने कहा कि हम खुद ही चीफ जस्टिस वाली खंडपीठ में बदलाव चाहते थे, अच्छा हुआ कि उन्होंने पहले ही खुद को मामले से अलग कर लिया।
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अब हाईकोर्ट 5 महीने पुरानी इस याचिका पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेगी। मामले में फैसला 5 नवंबर 2015 को सुरक्षित रखा गया था। उसके बाद 21 अप्रैल को मामले की चौथी सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता सुरक्षित रखे गए फैसले का भविष्य जानना चाहते थे, इसलिए यह मामला 9 फरवरी 2015 को चीफ जस्टिस के सामने रखा गया।
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गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा ने 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करके चुनाव आयोग से नियम पूछते हुए शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया था। याचिका में कहा गया था कि जन प्रतिनिधित्व एक्ट के तहत सेकुलर पार्टी ही ससंदीय और विधानसभा चुनाव लड़ सकती है।
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याचिका में दावा किया गया कि शिरोमणि अकाली दल ने गुरुद्वारा चुनाव आयोग के सामने सिख धार्मिक संस्था के तौर पर अपना संविधान पेश किया, वहीं दूसरी ओर शिअद ने खुद को सेकुलर पार्टी बताते हुए संविधान की एक कॉपी चुनाव आयोग को दी। खेड़ा ने कहा कि हम खुद ही चीफ जस्टिस वाली खंडपीठ में बदलाव चाहते थे, अच्छा हुआ कि उन्होंने पहले ही खुद को मामले से अलग कर लिया।