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2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा संग अकाली दल का मंच साझा करना आसान नहीं
Sat, 19 Sep 2020 04:34 AM IST
ajay kumar
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 19 Sep 2020 04:34 AM IST
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सुखबीर सिंह बादल।
- फोटो : फाइल फोटो
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केंद्र सरकार के तीन अध्यादेश लोकसभा में पास होने के बाद शिरोमणि अकाली दल पूरी तरह से असहज है। अकाली दल के लिए 2022 में भाजपा के साथ मंच साझा करना आसान नहीं होगा, क्योंकि अब तक अकाली दल पानी, चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने के अलावा किसानों के मुद्दों पर हमेशा पंजाब में वोट बटोरता रहा है लेकिन अब इन मुद्दों पर जनता के बीच जाना आसान नहीं है।
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पंजाब में भारतीय जनता पार्टी व अकाली दल के बीच पुराना गठबंधन है। इस गठबंधन को हिंदू-सिख भाईचारे की सांझ का हवाला देकर अकाली दल व भाजपा वोट बटोरते रहे हैं। गठबंधन ने पंजाब में पांच बार अपनी सरकार बनाई है। केंद्र में कांग्रेस सरकार को अकाली दल ने इन मुद्दों पर खूब घेरा है लेकिन इस बार अकाली दल खुद घिर गया है।
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अकाली दल छह साल में न तो चंडीगढ़ का मामला हल करवा पाया और न ही पानी का विवाद। उल्टा अकाली दल को नामोशी व विरोध झेलना पड़ा है। खेती के तीन अध्यादेश के मामले में अकाली दल को झटका लगा है। वरिष्ठ अकाली नेताओं के अनुसार अकाली दल को आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ लड़ना आसान नहीं है।
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अगर भाजपा व अकाली दल में गठबंधन जारी रहा तो चुनाव के दौरान इन मुद्दों पर जनता व किसानों का विरोध झेलना पड़ेगा। हरियाणा की तर्ज पर अकाली दल व भाजपा अलग-अलग चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। हरियाणा विधानसभा में अकाली दल का समझौता इनेलो से है, जबकि भाजपा के विरोध में अकाली दल हरियाणा में आग उलगता रहा है। ऐसे में अकाली दल ने अब रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है कि पंजाब में अगर भाजपा के साथ चुनाव लड़ा तो जनता के बीच जाना आसान नहीं होगा।
भाजपा सभी सीटों पर लगा रही पर्यवेक्षक
विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन से सरकार बनाई जा सकती है लेकिन चुनाव से पहले गठबंधन किसी भी वक्त टूट सकता है। वहीं भाजपा ने भी तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा 117 विधानसभा में अपने पर्वेक्षक लगा रही है। खासकर उन सीटों पर ज्यादा फोकस है, जहां हिंदू वोट बैंक अधिक है। पंजाब में अगर गठबंधन टूटता है तो अकाली दल के नेताओं को केंद्र और कैप्टन सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का पूरा मौका मिल सकता है। यह अकाली दल का यू टर्न हो सकता है। लिहाजा, अकाली दल की कोर टीम ने मंथन शुरू कर दिया है।