Punjab: SGPC चुनाव लड़ने पर अड़ीं बीबी जागीर कौर अकाली दल से निष्कासित, अनुशासन समिति के सामने नहीं हुईं पेश
शिरोमणि अकाली दल ने बीबी जागीर कौर को पार्टी से निष्कासित कर दिया। वह 9 नवंबर को एसजीपीसी चुनाव लड़ने के अपने फैसले के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए अनुशासन समिति के सामने पेश नहीं हुईं।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान पद का चुनाव लड़ने पर अड़ीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की सीनियर नेता बीबी जागीर कौर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। सोमवार को जागीर कौर को अनुशासन समिति के सामने अपनी बात रखने का आखिरी मौका दिया गया था लेकिन वह नहीं आईं। उन पर एसजीपीसी को तोड़ने की साजिश रचने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। पार्टी से बर्खास्त किए जाने के बाद बीबी जागीर कौर ने कहा, जिन्हें जनता ने निकाल दिया, वह उन्हें क्या निकालेंगे।
शिअद की अनुशासन समिति के अध्यक्ष सिकंदर सिंह मलूका ने बताया कि उन्हें तीन बार अपनी बात रखने का मौका दिया गया लेकिन वह एक भी बार कमेटी के सामने पेश नहीं हुईं। उन्होंने कहा, शिअद ने हमेशा एसजीपीसी अध्यक्ष पद के लिए एक उम्मीदवार खड़ा करके पंथक एकता पेश करने की कोशिश की है। इस बार हम यह समझने में विफल रहे कि बीबी जागीर कौर पार्टी के इस मानदंड को क्यों बदलना चाहती थीं। वह सिख समुदाय में क्यों भ्रम पैदा कर रही थीं। उनका फैसला केवल पंथ विरोधी ताकतों की मदद करता है।
मलूका ने कहा, स्थिति तब हद से बाहर हो गई, जब एसजीपीसी सदस्यों की शिकायतें आने लगीं कि भाजपा नेता और अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा, बीबी जागीर कौर के समर्थन के लिए सदस्यों को फोन कर रहे हैं। सदस्यों की शिकायत और शिअद की दो सदस्यीय टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर बीबी जागीर कौर को निलंबित कर दिया गया था। बीबी जागीर कौर को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए दो अवसर दिए गए और सोमवार को उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपनी बात रखने का समय भी दिया गया। ऐसा करने के बजाय अब वह अनुशासन कमेटी के गठन पर सवाल उठा रही हैं।
दो-तीन लोग मुझे पार्टी से नहीं निकाल सकते: जागीर कौर
निष्कासन के बाद बीबी जागीर कौर ने कहा कि दो-तीन लोग उन्हें पार्टी से नहीं निकाल सकते। वैसे भी पार्टी के संविधान के मुताबिक अनुशासन समिति का गठन नहीं किया गया है। पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। उन्होंने अनुशासन समिति के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर पार्टी ने उन्हें किस संविधान और नियम के तहत निकाला है। एसजीपीसी के चुनाव में कोई भी उम्मीदवार बन सकता है। वह चुनाव लड़ रही हैं। पार्टी बची ही कहां है, इसका संगठनात्मक ढांचा पहले ही भंग किया जा चुका है।
भाजपा नेता ने की एसजीपीसी सदस्यों को रिश्वत की पेशकश: वल्टोहा
अनुशासन कमेटी के सदस्य विरसा सिंह वल्टोहा ने मोबाइल की एक रिकॉर्डिंग जारी की, जिसमें भाजपा नेता प्रो. सरचंद द्वारा वोट हासिल करने के लिए एसजीपीसी सदस्यों को रिश्वत देने की पेशकश करते सुना जा रहा है। इसमें सरचंद सिंह को एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह भिटेवा से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन के साथ उनकी मीटिंग की व्यवस्था करेंगे।
वल्टोहा ने कहा कि स्टिंग से साबित हो गया है कि भाजपा और इकबाल सिंह लालपुरा न केवल एसजीपीसी के अध्यक्ष के चुनाव में हस्तक्षेप कर रहे हैं, बल्कि बीबी जागीर कौर के पक्ष में वोट हासिल करने के लिए सदस्यों से भी संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि एसजीपीसी को तोड़ने की साजिश का पता लगाने के लिए प्रो. सरचंद और लालपुरा दोनों के फोन कॉल रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।