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कारगिल दिवसः शहीदों के अपनों की उपेक्षा की दास्तां, बोले- धुंधली होती जा रही हैं यादें...
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Thu, 27 Jul 2017 09:25 AM IST
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kargil war
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हर साल 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाकर राष्ट्र शहीदों को नमन करता है, लेकिन शहीदों के परिजनों से उपेक्षा की दास्तां सुनेंगे तो कहेंगे कि अब यादें धुंधली होने लगी हैं। कारगिल के युद्ध में हरियाणा के 78 वीर सपूतों ने कुर्बानी दी है। इनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन एक सच यह भी है कि इतने सालों बाद भी कई शहीदों के परिजनों को सरकार की ओर से मदद नहीं मिली है।
इस कारण वे निराश हैं। कारगिल दिवस पर अमर उजाला से बातचीत में कई शहीदों के परिजनों का दर्द छलक आया। उनका कहना है कि साल में एक बार शहीदी दिवस तो मना लिया जाता है, लेकिन शहीदों के परिजन किस हाल में हैं इस बारे में कोई जानना नहीं चाहता। हालात यह हैं कि शहीदों की याद में बनाए गए स्मारक, स्कूल, सड़क और लाइब्रेरी खस्ताहाल हो गए हैं।
शहीद के नाम खोला स्कूल बंद
अंबाला जिले के कांसापुर गांव के शहीद सिपाही मंजीत सिंह की माता सुरजीत कौर कहती हैं कि गांव में शहीद के नाम से खोला गया स्कूल खंडहर हो गया है। वह बताती हैं की कम बच्चों का हवाला देते हुए करीब पांच साल पहले स्कूल में ताला लगा दिया गया।
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पानी को तरस रहे शहीद के परिजन
सिरसा जिले के गांव तरकांवाली के शहीद कृष्ण कुमार के परिजन आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। शहीद की पत्नी संतोष ने बताया कि उनका घर गांव के पास खेत में बनी ढाणी में है। घर तक पेयजल की लाइन नहीं पहुंची है। उन्हें खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शहादत का दिन प्रशासन हर बार भूल जाता है।
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इस कारण वे निराश हैं। कारगिल दिवस पर अमर उजाला से बातचीत में कई शहीदों के परिजनों का दर्द छलक आया। उनका कहना है कि साल में एक बार शहीदी दिवस तो मना लिया जाता है, लेकिन शहीदों के परिजन किस हाल में हैं इस बारे में कोई जानना नहीं चाहता। हालात यह हैं कि शहीदों की याद में बनाए गए स्मारक, स्कूल, सड़क और लाइब्रेरी खस्ताहाल हो गए हैं।
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शहीद के नाम खोला स्कूल बंद
अंबाला जिले के कांसापुर गांव के शहीद सिपाही मंजीत सिंह की माता सुरजीत कौर कहती हैं कि गांव में शहीद के नाम से खोला गया स्कूल खंडहर हो गया है। वह बताती हैं की कम बच्चों का हवाला देते हुए करीब पांच साल पहले स्कूल में ताला लगा दिया गया।
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पानी को तरस रहे शहीद के परिजन
सिरसा जिले के गांव तरकांवाली के शहीद कृष्ण कुमार के परिजन आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। शहीद की पत्नी संतोष ने बताया कि उनका घर गांव के पास खेत में बनी ढाणी में है। घर तक पेयजल की लाइन नहीं पहुंची है। उन्हें खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शहादत का दिन प्रशासन हर बार भूल जाता है।
गैस एजेंसी मिली न पेट्रोल पंप
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अंबाला जिले के गांव पत्तरेहड़ी के शहीद नरेश कुमार सैनी का परिवार सरकारी उपेक्षा से आहत है। शहीद की मां कमलेश देवी कहती हैं कि पहले तो सरकार के नुमाइंदे कभी गैस एजेंसी तो कभी पेट्रोल पंप देने की बातें करते थे, लेकिन आज तक कोई सुविधा नहीं मिली।
रामसिंह और सतपाल के परिवार को भी नहीं मिली मदद
महेंद्रगढ़ जिले के गांव रामपुरा निवासी शहीद रामसिंह की पत्नी तारादेवी और पुत्र भूदेव का कहना है कि सरकार ने उन्हें कोई सुविधा नहीं मुहैया कराई है। पत्नी ने गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था, लेकिन नहीं मिली।
वहीं, गांव गहली के शहीद सतपाल के परिजन भी सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिलने से निराश हैं। शहीद की पत्नी इंद्रकौर ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करके गुजारा कर रही हैं। गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन नहीं मिला।
सेना ने मदद दी सरकार ने नहीं
रोहतक के गांव सांघी के शहीद समुंद्र सिंह की पत्नी सरोजबाला, बेटा अर्जुन और बेटी स्वाति का कहना है कि सेना की तरफ से मदद तो मिली, लेकिन सरकार की तरफ से की गई घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई।
रामसिंह और सतपाल के परिवार को भी नहीं मिली मदद
महेंद्रगढ़ जिले के गांव रामपुरा निवासी शहीद रामसिंह की पत्नी तारादेवी और पुत्र भूदेव का कहना है कि सरकार ने उन्हें कोई सुविधा नहीं मुहैया कराई है। पत्नी ने गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था, लेकिन नहीं मिली।
वहीं, गांव गहली के शहीद सतपाल के परिजन भी सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिलने से निराश हैं। शहीद की पत्नी इंद्रकौर ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करके गुजारा कर रही हैं। गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन नहीं मिला।
सेना ने मदद दी सरकार ने नहीं
रोहतक के गांव सांघी के शहीद समुंद्र सिंह की पत्नी सरोजबाला, बेटा अर्जुन और बेटी स्वाति का कहना है कि सेना की तरफ से मदद तो मिली, लेकिन सरकार की तरफ से की गई घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई।