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चंडीगढ़: पीजीआई में धारा 144 तोड़ने के मामले में सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को बरी किया गया
Tue, 27 Aug 2019 04:21 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Aug 2019 04:21 PM IST
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रवनीत सिंह बिट्टू
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते व लुधियाना के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को पीजीआई में धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप से मुक्त कर दिया गया है। सोमवार को चंडीगढ़ की जिला अदालत ने बिट्टू को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। बचाव पक्ष के एडवोकेट तरमिंदर और राजेश शर्मा ने बताया कि अभियोजन पक्ष कोई भी ऐसा सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर पाया, जिससे रवनीत को दोषी ठहराया जा सके। इस केस में पांच गवाह थे। पांचों के बयान अलग-अलग पाए गए।
एडवोकेट राजेश शर्मा के मुताबिक, अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि रवनीत मौके पर थे भी या नहीं। यहां तक कि मौके उनकी गिरफ्तारी तक नहीं दिखाई जा सकी। फैसले के दौरान सांसद रवनीत सिंह बिट्टू कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। सच को छिपाया नहीं जा सकता। यह मामला सात मार्च 2011 का है। चंडीगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर की शिकायत पर सेक्टर-11 में दर्ज मामले के मुताबिक, कांग्रेसी नेता रवनीत सिंह बिट्टू अपने 250 समर्थकों के साथ पीजीआई चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे।
चौक से वह अपने समर्थकों के साथ पीजीआई में दाखिल हो गए, जबकि उस वक्त पीजीआई में धारा 144 लागू थी। इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन ने बिट्टू को अवगत भी करा दिया था। उसके बावजूद वह पीजीआई में दाखिल हुए और प्रदर्शन भी किया। छह साल बाद पुलिस ने चालान पेश किया। उस दौरान बिट्टू को भी कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी हुए थे। 12 मई साल 2011 को बिट्टू ने जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था। अगली तारीख पर वह अदालत में पेश नहीं हुए।
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इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए। उसके बाद वे कोर्ट में हाजिर हुए थे।
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एडवोकेट राजेश शर्मा के मुताबिक, अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि रवनीत मौके पर थे भी या नहीं। यहां तक कि मौके उनकी गिरफ्तारी तक नहीं दिखाई जा सकी। फैसले के दौरान सांसद रवनीत सिंह बिट्टू कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। सच को छिपाया नहीं जा सकता। यह मामला सात मार्च 2011 का है। चंडीगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर की शिकायत पर सेक्टर-11 में दर्ज मामले के मुताबिक, कांग्रेसी नेता रवनीत सिंह बिट्टू अपने 250 समर्थकों के साथ पीजीआई चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे।
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चौक से वह अपने समर्थकों के साथ पीजीआई में दाखिल हो गए, जबकि उस वक्त पीजीआई में धारा 144 लागू थी। इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन ने बिट्टू को अवगत भी करा दिया था। उसके बावजूद वह पीजीआई में दाखिल हुए और प्रदर्शन भी किया। छह साल बाद पुलिस ने चालान पेश किया। उस दौरान बिट्टू को भी कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी हुए थे। 12 मई साल 2011 को बिट्टू ने जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था। अगली तारीख पर वह अदालत में पेश नहीं हुए।
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इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए। उसके बाद वे कोर्ट में हाजिर हुए थे।