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प्राचीन कला केंद्र में शाम-ए-गजल, दिल्ली की गायिका ने बनाई यादगार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 10 Dec 2016 07:20 PM IST
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चंडीगढ़ में शाम-ए-गजल कार्यक्रम
प्राचीन कला केंद्र में संगीत प्रेमियों के लिए शाम-ए-गजल का आयोजन किया गया, जिसे दिल्ली की नामी गायिका ने यादगार बनाया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचीन कला केंद्र की 224 वीं बैठक के उपलक्ष्य में सेक्टर 34 स्थित के भास्कर राव सभागार में किया गया। सुप्रसिद्ध गायिका नीला सिन्हा राय ने अपनी मधुर गायकी से एक यादगारी समां बांध दिया।
कार्यक्रम में नीला ने कई शायरों की रचनाओं एवं गजलों को प्रस्तुत करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। नीला ने कार्यक्रम की शुरूआत खमाज राग में निबद्ध ठुमरी काहे मरोरे मोरी बइयां और राग कौषिकध्वनि में निबद्ध ठुमरी तेरे बिना बालम से की। इसके बाद नीला ने गजल गायकी पेश करते हुए कैफी आजमी की गजल इतना तो जिंदगी में किसी की खलल पर और मिर्जा गालिब की प्रसिद्ध गजल ये न थी हमारी किस्मत पेश करके खूब तालियां बटोरी।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए नीला ने अली अहमद जलील की रचना अब छलकते हुए सागर नहीं देखे जाते इसके उपरांत नीला ने अहले उल्फत के हवाले ये हंसी आती है पेश करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का समापन नीला ने बेगम अख्तर की प्रसिद्ध गजल ऐ मोहब्बत तेरे अजाम पे रोना आया से किया। मंच पर इनके साथ देबाशीष धर ने तबले पर एवं परोमिता मुखर्जी ने हारमोनियम पर बखूबी संगत की।
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नीला ने शास्त्रीय गायन की शिक्षा डॉ. अमीया रंजन बैनर्जी से ली, जो कि बिशनुपुर घराने से संबंधित हैं। इसके बाद आगरा में संगीत की बारीकियां सीखी। गजल गायकी की बारीकियों को सीखने के लिए नीला ने बेगम अख्तर की वरिष्ठ शिष्या शंति हीरानंद के ली।
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कार्यक्रम में नीला ने कई शायरों की रचनाओं एवं गजलों को प्रस्तुत करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। नीला ने कार्यक्रम की शुरूआत खमाज राग में निबद्ध ठुमरी काहे मरोरे मोरी बइयां और राग कौषिकध्वनि में निबद्ध ठुमरी तेरे बिना बालम से की। इसके बाद नीला ने गजल गायकी पेश करते हुए कैफी आजमी की गजल इतना तो जिंदगी में किसी की खलल पर और मिर्जा गालिब की प्रसिद्ध गजल ये न थी हमारी किस्मत पेश करके खूब तालियां बटोरी।
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कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए नीला ने अली अहमद जलील की रचना अब छलकते हुए सागर नहीं देखे जाते इसके उपरांत नीला ने अहले उल्फत के हवाले ये हंसी आती है पेश करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का समापन नीला ने बेगम अख्तर की प्रसिद्ध गजल ऐ मोहब्बत तेरे अजाम पे रोना आया से किया। मंच पर इनके साथ देबाशीष धर ने तबले पर एवं परोमिता मुखर्जी ने हारमोनियम पर बखूबी संगत की।
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नीला ने शास्त्रीय गायन की शिक्षा डॉ. अमीया रंजन बैनर्जी से ली, जो कि बिशनुपुर घराने से संबंधित हैं। इसके बाद आगरा में संगीत की बारीकियां सीखी। गजल गायकी की बारीकियों को सीखने के लिए नीला ने बेगम अख्तर की वरिष्ठ शिष्या शंति हीरानंद के ली।