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शालीमार एस्टेट के MD-डायरेक्टर भगोड़ा घोषित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Dec 2015 12:46 PM IST
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शालीमार एस्टेट के एमडी और डायरेक्टर को पीओ यानी भगोड़ा करार दिया है। उपभोक्ता आयोग ने ऐसा सख्त कदम कानून के दायरे में लाने के लिए उठाया है।
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शालीमार एस्टेट के मैनेजिंग डायरेक्टर आरके अग्रवाल और डायरेक्टर कमलेश के खिलाफ आयोग ने सख्त रवैया अपनाते हुए उन्हें भगोड़ा घोषित किया है। आयोग ने कहा है कि शालीमार के खिलाफ बड़ी संख्या में फैसला दिया है। अगली सुनवाई 27 जनवरी तय की गई है। यह आदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) जसबीर सिंह ने दिया है।
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उपभोक्ता आयोग ने चंडीगढ़ के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को इश्तेहार के जरिए भगोड़ा घोषित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने निद्रेश दिया है कि यइ इश्तेहार अखबारों में फोटो के साथ प्रकाशित कराया जाए। इस पर आने वाला खर्च चंडीगढ़ प्रशासन को उठाना होगा। उपभोक्ता आयोग ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि इन दोनों की सूचना देने वाले व्यक्ति को इनाम देने की घोषणा करें।
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पुलिस को यह भी कहा गया है कि वह हर तरह की मॉर्डन तकनीक अपनाएं ताकि लोगों के साथ धोखा करने वाले ये लोग पकड़े जा सकें। कमीशन ने मौजूदा केस के अलावा शालीमार इस्टेट के खिलाफ 11 अन्य केसों का हवाला देते हुए कहा है कि प्रशासन और पुलिस दोनों ही कोर्ट के आदेशों की पालन करने में असमर्थ रहे हैं।
उपभोक्ता आयोग ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए टिप्पणी की है कि हर तारीख पर स्टीरियो टाइप रिप्लाई दिया जाता है कि ‘कोशिश के बावजूद भी पकड़े नहीं जा सके।’
इस केस में बुधवार को चंडीगढ़ के असिस्टेंट कलेक्टर अमरिंदर सिंह कोर्ट के समक्ष खुद पेश हुए। पेश होकर उन्होंने शालीमार के एमडी के घर की अटैचमेंट की रिपोर्ट पेश की। अटैचमेंट रिपोर्ट पेश करते हुए अमरिंदर सिंह ने कोर्ट को कहा कि शालीमार के घर के अटैचमेंट के लिए उसके घर पर पर्चा चस्पा कर दिया गया है।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अटैचमेंट का पर्चा चिपकाने से से अटैचमेंट नहीं होती। इसके लिए प्रापर्टी को कब्जे में लिया जाता है। कोर्ट की फटकार के बाद असिस्टेंट कलेक्टर अमरिंदर सिंह ने गलती मानते हुए कहा कि अब जरूरी कार्रवाई जल्द पूरी करेंगे।