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उपभोक्ता आयोग ने शालीमार के डायरेक्टर को भेजा जेल

Fri, 18 Mar 2016 08:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 18 Mar 2016 08:02 AM IST
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shalimar director sent jail by consumer forum
जेल

फैसला न मानने पर शालीमार एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर इनीत अग्रवाल को उपभोक्ता आयोग ने वीरवार को बुड़ैल जेल भेज दिया। हेड कांस्टेबल रामफल, सतीश कुमार और राहुल कुमार ने इनीत अग्रवाल को पकड़कर राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में कोर्ट के समक्ष पेश किया।

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सुनवाई कर रहे उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) जसबीर सिंह ने इनीत अग्रवाल से पूछा कि क्या आप इस समय राशि जमा करा सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि नहीं। इसके बाद इनीत अग्रवाल को जेल भेज दिया गया।
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यह है मामला
शिकायतकर्ता रामराज वर्मा और अमरजीत सिंह निवासी सेक्टर-7 बी चंडीगढ़ ने सेक्टर-8 चंडीगढ़ स्थित द शालीमार एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आरके अग्रवाल, डायरेक्टर कमलेश और इनीत अग्रवाल के खिलाफ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी थी।
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शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया था कि शालीमार एस्टेट के शॉपिंग मॉल में कामर्शियल शोरूम के लिए उन्होंने आवेदन किया था। इसकी कुल कीमत 36 लाख रुपये थी।

25 फरवरी 2006 को कामर्शियल यूनिट का ड्रॉ निकाला। आवेदन स्वीकार होने पर 28 फरवरी 2006 को एक्सेप्टेंस सह डिमांड लेटर जारी किया गया। शोरूम का पजेशन दो वर्ष में (28 फरवरी 2008 तक) दिया जाना था। शिकायतकर्ता ने 23 लाख 31 हजार रुपये अदा किए। बाकी की राशि पजेशन के बाद जमा करनी थी। दो वर्ष का समय बीतने के बाद भी साइट पर विकास कार्य नहीं चल रहे थे। इस पर उन्होंने अपनी राशि वापस मांगी, जो नहीं दी गई।
सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने शालीमार एस्टेट को निर्देश दिया था कि वह शिकायतकर्ता को 23 लाख 31 हजार रुपये वापस करने के अलावा 15 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करे।

एक लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे। लेकिन शालीमार एस्टेट ने आदेशों का पालन नहीं किया। आदेश न मानने पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में अवमानना याचिका डाली। इस पर उपभोक्ता आयोेग ने दोषी को तीन वर्ष कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। लेकिन आयोग के इन आदेशों का पालन भी नहीं किया गया।


इसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी कर उन्हें पकड़कर आयोग के सामने पेश किया गया। इसके बाद फिर आयोग ने राशि जमा करने के बारे में उनसे पूछा। लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।

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