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स्वतंत्रता दिवस पर छलका शहीद के परिवार का दर्द, कहा- अब 15 अगस्त समागम में भी नहीं बुलाती सरकार

Wed, 15 Aug 2018 08:43 AM IST
भारत भूषण मित्तल, अमर उजाला, बठिंडा (पंजाब)
भारत भूषण मित्तल, अमर उजाला, बठिंडा (पंजाब) Updated Wed, 15 Aug 2018 08:43 AM IST
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Shahid's family charged of neglect on punjab government government
शहीद सिपाही संदीप सिंह की प्रतिमा
  देश की सुरक्षा के लिए कारगिल में जान न्यौछावर करने वाले बठिंडा निवासी शहीद सिपाही संदीप सिंह के पिता कहते हैं कि अब तो प्रशासनिक अधिकारी बेटे की बरसी पर भी नही पहुंचते। इसके अलावा पिछले कुछ साल से उन्हें पंद्रह अगस्त के होने वाले समागम के लिए भी प्रशासन की तरफ से कोई बुलावा नहीं आ रहा। अब तो उन्हें लगता है कि उन्होंने बेटे को सेना भेजकर उसे खो दिया है। 
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दो अगस्त 1999 को शहीद हुए थे संदीप 
बठिंडा के परसराम नगर निवासी संदीप सिंह 1997 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अगस्त 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों ने पीछे से वार कर संदीप को मौत के घाट उतार दिया था। उस समय की अकाली सरकार ने शहीद के नाम पर एक स्कूल और चौक बनवाया। इसके अलावा संदीप की बहन अपिंदर कौर को फूड सप्लाई विभाग में सरकारी नौकरी दी गई। वह अब फाजिल्का में बतौर डीएफएससी तैनात हैं। 
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शहीद के पिता राथा सिंह ने बताया कि जब उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ था तो उन्हें बहुत गर्व था। अब जिला प्रशासन एवं सरकार की बेरुखी के कारण उनको बेटा खो जाने का दुख हो रहा है। हर वर्ष बेटे की बरसी मनाई जाती है। वह खुद जिला प्रशासनिक अधिकारियों को कार्ड देकर बरसी पर आने के लिए न्यौता देते हैं। अपने कार्यालय में तो जिला प्रशासनिक अधिकारी उन्हें बरसी पर पहुंचने का आश्वासन देते हैं लेकिन बरसी वाले दिन कोई अधिकारी नहीं पहुंचता। 
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15 अगस्त के समागम पर भी नहीं बुला रहा प्रशासन
शहीद संदीप सिंह के पिता ने कहा कि पिछले कुछ साल से उन्हें पंद्रह अगस्त के समागम का बुलावा भी प्रशासन की ओर से नहीं आ रहा, लेकिन वह हर बार बिना बुलाए ही पंद्रह अगस्त को होने वाले समागम में जाते हैं और आम लोगों की तरह स्टेडियम में बैठकर समागम देख लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें कोई सम्मान भी नहीं दे रहा। 

उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में चुनाव होते है तो हर राजनीतिक पार्टी के नेता शहीदों के नाम पर राजनीति करते हुए शहीदों के परिवारों से बडे़ बडे़ वायदे करेंगे लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हो जाते हैं तो कोई भी नेता शहीद के परिवार को नहीं पूछता। शहीदों के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए। अगर राजनेता शहीदों के परिवारों के लिए कुछ कर नहीं सकते तो शहीदों पर राजनीति कर उनका मजाक तो न बनाए । 

शहीद के नाम पर बनाए पार्क पर हुआ सरकारी अवैध कब्जा 
राथा सिंह ने कहा कि जब उनका बेटा अगस्त 1999 में शहीद हुआ था तो उसके कुछ समय बाद शहर के जलौर सिंह ने परसराम नगर में शहीद के नाम पर पार्क बनाने के लिए अपनी जगह दान दी थी। पार्क बनाने के लिए तत्कालीन अकाली सरकार के विधायक चिरंजी लाल गर्ग ने वहां नींव पत्थर भी रखा था। पार्क भी बन गया था लेकिन पार्क बनने के कुछ साल बाद ही पार्क की जगह पर बठिंडा काउंसिल के अधिकारियों ने वाटर वर्कस की टंकी बना दी।


एक मांग तो पूरी नहीं होती दूसरी करने का क्या फायदा 
शहीद संदीप सिंह के पिता ने कहा कि अब मौजूदा समय में शहीद के परिवार की एक मांग समय की सरकार से पूरी नहीं होती तो ऐसे में दूसरी मांग करने का क्या फायदा। सरकार से दूसरी मांग करना खुद को जलील करने जैसा है।
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