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जिन किताबों को शहीद भगत सिंह पढ़ते थे, उन्हें आप भी पढ़ना चाहते हैं तो इस लाइब्रेरी में आइए
Mon, 23 Sep 2019 10:33 AM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 23 Sep 2019 10:33 AM IST
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द्वारिका दास लाइब्रेरी
- फोटो : अमर उजाला
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हम आपको उस लाइब्रेरी के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां वो किताबें संरक्षित हैं, जिन्हें शहीद भगत सिंह पढ़ा करते थे। देश की आजादी की लड़ाई जिक्र हो और भगत सिंह याद न आएं.. यह नहीं हो सकता। 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह का जन्मदिन है। उनकी कुछ यादें चंडीगढ़ से भी जुड़ी हैं। शहीद भगत सिंह जो किताबें पढ़ते थे, वो आज भी चंडीगढ़ में संरक्षित हैं।
यदि आप भी उन किताबों को पढ़ना चाहते हैं तो आपको सेक्टर-15 स्थित लाला लाजपत राय भवन की द्वारिका दास लाइब्रेरी में जाना होगा। भगत सिंह द्वारा पढ़ी गई किताबें यहां अभिलेखागार विभाग (आर्काइव डिपार्टमेंट) में संरक्षित हैं। खास बात यह है कि वर्ष 1947 से पहले यह लाइब्रेरी लाहौर में थी। भगत सिंह जब लाहौर की जेल में बंद थे तब इसी लाइब्रेरी से किताबें उन्हें पढ़ने के लिए दी जाती थीं।
सेक्टर-15 स्थित द्वारिका दास लाइब्रेरी में अनुमति लेकर कोई भी भगत सिंह द्वारा पढ़ी गई किताबों को देख-पढ़ सकता है। वर्तमान में लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और उर्दू में लिखी गईं करीब 85222 किताबें मौजूद हैं। इनमें कई दुर्लभ किताबें भी हैं। लाइब्रेरी की मेंबरशिप लेकर इन किताबों और शहीदों की जीवनियों को पढ़ा जा सकता है।
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यदि आप भी उन किताबों को पढ़ना चाहते हैं तो आपको सेक्टर-15 स्थित लाला लाजपत राय भवन की द्वारिका दास लाइब्रेरी में जाना होगा। भगत सिंह द्वारा पढ़ी गई किताबें यहां अभिलेखागार विभाग (आर्काइव डिपार्टमेंट) में संरक्षित हैं। खास बात यह है कि वर्ष 1947 से पहले यह लाइब्रेरी लाहौर में थी। भगत सिंह जब लाहौर की जेल में बंद थे तब इसी लाइब्रेरी से किताबें उन्हें पढ़ने के लिए दी जाती थीं।
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सेक्टर-15 स्थित द्वारिका दास लाइब्रेरी में अनुमति लेकर कोई भी भगत सिंह द्वारा पढ़ी गई किताबों को देख-पढ़ सकता है। वर्तमान में लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी और उर्दू में लिखी गईं करीब 85222 किताबें मौजूद हैं। इनमें कई दुर्लभ किताबें भी हैं। लाइब्रेरी की मेंबरशिप लेकर इन किताबों और शहीदों की जीवनियों को पढ़ा जा सकता है।
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लाइब्रेरी के स्टाफ मेंबर थे भगत सिंह
भगत सिंह ने द्वारिका दास लाइब्रेरी, लाहौर में कुछ समय के लिए नौकरी भी की थी। इस दौरान वह लाइब्रेरी मैनेज करने का काम करते थे। साथ ही वह रूस की राज्य क्रांति विषय पर रिसर्च भी कर रहे थे। इसी समय अंतराल में वह सुखदेव, यशपाल, रामकृष्ण और भगवतीचरण बोहरा के संपर्क में आए। यहां किताबें पढ़ने के साथ सब मिलकर क्रांति की रणनीति भी बनाते थे।
साल में एक बार जनता के लिए सार्वजनिक की जाती हैं किताबें
साल में एक बार लाला लाजपत राय के शहीदी दिवस पर लाइब्रेरी की ओर से आयोजित एक हफ्ते के कार्यक्रम में इन किताबों को सार्वजनिक रूप से जनता के देखने के लिए रखा जाता है। इसमें भगत सिंह, लाला लाजपत राय की किताबों के साथ उन पर लिखी गई किताबों को भी रखा जाता है। पहले इन किताबों को भगत सिंह के जन्मदिन और शहीदी दिवस पर भी डिस्पले किया जाता था।
भगत सिंह की किताबें अब हेरिटेज का हिस्सा
द्वारका दास लाइब्रेरी में भगत सिंह की 16 किताबों को अलमारी में संरक्षित कर रखा गया है। लाइब्रेरियन अल्का ने बताया कि इन सभी किताबों को भगत सिंह पढ़ा करते थे। यह सभी किताबें विदेशी लेखकों की है, जो मोटिवेशनल, फिलॉसिफिकल और रिवोल्यूशनरी सबजेक्ट पर आधारित हैं। ये किताबें अब हेरिटेज का हिस्सा हैं।
भगत सिंह और उनके जीवन पर दूसरे लेखकों की ओर से लिखी किताबें भी इसी अलमारी में दूसरे सेक्शन में रखी गईं हैं। इस अलमारी में भगत सिंह के जेल प्रोसिडिंग्स की फोटोकॉपी भी रखी गई है। 1947 से पहले लाइब्रेरी लाहौर में थी। उसके बाद शिमला और फिर 1962 में पंजाब यूनिवर्सिटी और 1966 में सेक्टर-15 के लाजपत राय भवन में शिफ्ट हो गई।
साल में एक बार जनता के लिए सार्वजनिक की जाती हैं किताबें
साल में एक बार लाला लाजपत राय के शहीदी दिवस पर लाइब्रेरी की ओर से आयोजित एक हफ्ते के कार्यक्रम में इन किताबों को सार्वजनिक रूप से जनता के देखने के लिए रखा जाता है। इसमें भगत सिंह, लाला लाजपत राय की किताबों के साथ उन पर लिखी गई किताबों को भी रखा जाता है। पहले इन किताबों को भगत सिंह के जन्मदिन और शहीदी दिवस पर भी डिस्पले किया जाता था।
भगत सिंह की किताबें अब हेरिटेज का हिस्सा
द्वारका दास लाइब्रेरी में भगत सिंह की 16 किताबों को अलमारी में संरक्षित कर रखा गया है। लाइब्रेरियन अल्का ने बताया कि इन सभी किताबों को भगत सिंह पढ़ा करते थे। यह सभी किताबें विदेशी लेखकों की है, जो मोटिवेशनल, फिलॉसिफिकल और रिवोल्यूशनरी सबजेक्ट पर आधारित हैं। ये किताबें अब हेरिटेज का हिस्सा हैं।
भगत सिंह और उनके जीवन पर दूसरे लेखकों की ओर से लिखी किताबें भी इसी अलमारी में दूसरे सेक्शन में रखी गईं हैं। इस अलमारी में भगत सिंह के जेल प्रोसिडिंग्स की फोटोकॉपी भी रखी गई है। 1947 से पहले लाइब्रेरी लाहौर में थी। उसके बाद शिमला और फिर 1962 में पंजाब यूनिवर्सिटी और 1966 में सेक्टर-15 के लाजपत राय भवन में शिफ्ट हो गई।
देश-विदेश में क्रेज
लाइब्रेरियन अल्का ने बताया कि ट्राइसिटी और पंजाब के अलावा देश-विदेश से भी भगत सिंह पर रिसर्च करने वाले लोग इस लाइब्रेरी में आते हैं। रिसर्च में आसानी हो इसके लिए दस साल पहले हमने सभी किताबों को डिजिटल कर दिया है।
यह डाटा सीडी में भी उपलब्ध है, जिसे भी भगत सिंह के बारे में पढ़ना होता है, लाइब्रेरी उसे ये सीडी उपलब्ध करवा देती है। इससे उनकी ओरिजनल किताबों का नुकसान होने से भी बचा रहता है। हर साल किताबों को बचाने के लिए फ्यूमीगेशन की जाती है ताकि इससे पन्नों को खराब होने से बचाया जा सके।
क्या कहते थे भगत सिंह
भगत सिंह कहते थे कि क्रांति परिश्रमी विचारकों और परिश्रमी कार्यकर्ताओं की पैदावार होती है। दुर्भाग्य से भारतीय क्रांति का बौद्धिक पक्ष हमेशा दुर्बल रहा है इसलिए क्रांति की आवश्यक चीजों और किए गए काम के प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए एक क्रांतिकारी को अध्ययन मनन को अपनी पवित्र जिम्मेदारी बना लेना चाहिए।
यह डाटा सीडी में भी उपलब्ध है, जिसे भी भगत सिंह के बारे में पढ़ना होता है, लाइब्रेरी उसे ये सीडी उपलब्ध करवा देती है। इससे उनकी ओरिजनल किताबों का नुकसान होने से भी बचा रहता है। हर साल किताबों को बचाने के लिए फ्यूमीगेशन की जाती है ताकि इससे पन्नों को खराब होने से बचाया जा सके।
क्या कहते थे भगत सिंह
भगत सिंह कहते थे कि क्रांति परिश्रमी विचारकों और परिश्रमी कार्यकर्ताओं की पैदावार होती है। दुर्भाग्य से भारतीय क्रांति का बौद्धिक पक्ष हमेशा दुर्बल रहा है इसलिए क्रांति की आवश्यक चीजों और किए गए काम के प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए एक क्रांतिकारी को अध्ययन मनन को अपनी पवित्र जिम्मेदारी बना लेना चाहिए।