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भगत सिंह जयंतीः नोटिफिकेशन के पांच वर्ष बाद भी क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना यादगार नहीं बना
Mon, 28 Sep 2020 03:01 PM IST
खुशबू गोयल
अनिल कुमार, फिरोजपुर
अनिल कुमार, फिरोजपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 28 Sep 2020 03:01 PM IST
सार
- शहीद भगत सिंह समेत आठ क्रांतिकारी नाम बदल कर रहते थे गुप्त ठिकाने पर
- सॉण्डर्स की हत्या करने को गुप्त ठिकाने में एयर पिस्टल से करते थे निशानेबाजी
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क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 2015 में नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अभी तक फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार (मुहल्ला शाहगंज) स्थित क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने को यादगार नहीं बनाया गया है। इस ठिकाने में देश की आजादी के लिए शहीद भगत सिंह व उनके साथियों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे, अंग्रेज अधिकारी सॉण्डर्स को मारने के लिए यहां पर एयर पिस्टल से निशानेबाजी की गई और बिहार में एक महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देने के लिए भगत सिंह ने अपने केश और दाढ़ी कटवाई थी। यही नहीं इस गुप्त ठिकाने में आठ क्रांतिकारी नाम बदल कर रहे थे।
क्रांतिकारियों की जरूरत और गतिविधियों को ध्यान में रखकर दस अगस्त 1928 को गुप्त ठिकाना बनाया था। यहां क्रांतिकारी भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव सिंह, डा. गया प्रसाद, शिव वर्मा, महावीर सिंह, विजय कुमार सिन्हा व जय गोपाल अपने नाम बदल कर रहते थे। क्रांतिकारी यहां बम बनाने की सामग्री भी एकत्र करते थे। देश के किसी भी कोने में आना-जाना होता था तो यहां क्रांतिकारीबैठक करते थे। बम फटने पर अंग्रेज अधिकारियों को गुप्त ठिकाने का पता चल गया, इस पर चार फरवरी 1929 को ठिकाना छोड़ना पड़ा था।
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क्रांतिकारियों की जरूरत और गतिविधियों को ध्यान में रखकर दस अगस्त 1928 को गुप्त ठिकाना बनाया था। यहां क्रांतिकारी भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव सिंह, डा. गया प्रसाद, शिव वर्मा, महावीर सिंह, विजय कुमार सिन्हा व जय गोपाल अपने नाम बदल कर रहते थे। क्रांतिकारी यहां बम बनाने की सामग्री भी एकत्र करते थे। देश के किसी भी कोने में आना-जाना होता था तो यहां क्रांतिकारीबैठक करते थे। बम फटने पर अंग्रेज अधिकारियों को गुप्त ठिकाने का पता चल गया, इस पर चार फरवरी 1929 को ठिकाना छोड़ना पड़ा था।
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उक्त गुप्त ठिकाना बाकी ठिकानों से बहुत महत्वपूर्ण है
उधर, भगत सिंह की जीवनी पर खोज कर रहे लेखक राकेश कुमार का कहना है कि गुप्त ठिकाना कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट फिरोजपुर शहर के अधीन है, पुरातत्व विभाग ने ट्रस्ट के चेयरमैन रजिंदर पाल धवन पुत्र बदरी दास धवन वासी मुहल्ला लाहौरियां वाला फिरोजपुर शहर के साथ एक एग्रीमेंट किया था, रजिंदर पाल का निधन हो चुका है।
पुरातत्व विभाग ने रजिंदर पाल से क्या एग्रीमेंट किया है, इसकी जानकारी सूचना अधिकार के तहत मांगी गई थी, जो पुरातत्व विभाग ने नहीं दी है। लेखक के मुताबिक उक्त गुप्त ठिकाना बाकी ठिकानों से बहुत महत्वपूर्ण है, इसीलिए इसे म्यूजियम और लाइब्रेरी में तबदील किया जाना चाहिए। यहां पर भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों की जीवनी व उनकी निशानियां यहां रखी जानी चाहिए, जो जगह-जगह बिखरी पड़ी है।
लेखक ने बताया कि क्रांतिकारी डॉ. गया प्रसाद ने बदल कर अपना नाम डॉ. भगवान स्वरूप निगम, शिव वर्मा ने राम नारायण कपूर, सुखदेव ने विलेजर व स्वामी, भगत सिंह ने रणजीत, चंद्रशेखर आजाद ने पंडित जी, विजय कुमार सिन्हा ने बचू तथा जय गोपाल ने गोपाल रखा था। बम बनाने की सामग्री जुटाने के लिए डॉ. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी की दुकान खुलवाई थी। दुकान खोल पार्टी की सहायता के लिए धनराशि एकत्रित की जाती थी।
पुरातत्व विभाग ने रजिंदर पाल से क्या एग्रीमेंट किया है, इसकी जानकारी सूचना अधिकार के तहत मांगी गई थी, जो पुरातत्व विभाग ने नहीं दी है। लेखक के मुताबिक उक्त गुप्त ठिकाना बाकी ठिकानों से बहुत महत्वपूर्ण है, इसीलिए इसे म्यूजियम और लाइब्रेरी में तबदील किया जाना चाहिए। यहां पर भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों की जीवनी व उनकी निशानियां यहां रखी जानी चाहिए, जो जगह-जगह बिखरी पड़ी है।
लेखक ने बताया कि क्रांतिकारी डॉ. गया प्रसाद ने बदल कर अपना नाम डॉ. भगवान स्वरूप निगम, शिव वर्मा ने राम नारायण कपूर, सुखदेव ने विलेजर व स्वामी, भगत सिंह ने रणजीत, चंद्रशेखर आजाद ने पंडित जी, विजय कुमार सिन्हा ने बचू तथा जय गोपाल ने गोपाल रखा था। बम बनाने की सामग्री जुटाने के लिए डॉ. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी की दुकान खुलवाई थी। दुकान खोल पार्टी की सहायता के लिए धनराशि एकत्रित की जाती थी।