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उपेक्षाः जिस हवालात में भगत सिंह ने गुजारी थी रात, अब वहां मकड़ी के जाले और खड़ी है घास
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
Updated Wed, 15 Aug 2018 08:14 AM IST
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bhagat singh
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जिस हवालात में शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने काली रात के चंद लमहे गुजारे और देश को आजाद कराने के लिए भारत मां की कसमें खाईं, अब वहां की दीवारों और छत में सीलन आ चुकी है। सीमेंट के टुकड़े टूटकर जमीन पर बिखरने लगे हैं।
हवालात में एक कुर्सी पर दो पेंटिंग और बुझे हुए कुछ काले दिए रखे हैं, जिन्हें देखकर मानों लगता है कि इस सपूत को वर्षों पहले किसी ने याद किया हो। नाम के लिए कुछ दीवारों पर पेंटिंग्स बनाई गई हैं, जो थोड़ा बहुत हवालात की शोभा बढ़ा रही हैं, लेकिन सलाखों पर धूल मिट्टी और मकड़ी के जाल लगे हुए हैं। लगता है वर्षों पहले इसकी सफाई हुई हो।
मीरपुर (मुबारकपुर) के इस हवालात को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अंग्रेजों ने यहां बंदी बना कर रखा गया होगा। इसकी हालत काफी खस्ता हो गई है। इस तरफ न तो पूर्व सरकार ने ध्यान दिया और न ही पंजाब की वर्तमान सरकार ध्यान दे रही है।
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शिमला ले जाते समय एक रात के लिए रखा था इस हवालात में
इस हवालात में 14 जून, 1929 को शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को बंदी बनाकर रखा था। शिमला कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय घग्गर नदी में पानी का बहाव ज्यादा आने के चलते 1881 में बनी पुलिस चौकी के हवालात में एक रात के लिए अंग्रेजों द्वारा शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को रखा था। उस समय घग्गर नदी पर पुल नहीं था और किश्तियों की मदद से नदी पार की जाती थी।
एक तो शाम हो गई थी और पानी का बहाव तेज था, इसलिए अंग्रेजों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ा। उस समय अंग्रेज पुलिस के मुलाजिमों ने मुबारकपुर के विश्राम गृह में रात गुजारी और भगत सिंह और उनके साथियों को हवालात में रखा था।
परिचय पट्टी भी नहीं लगी
इस हवालात के बाहर शहीद-ए-आजम की एक छोटी सी प्रतिकृति लगाई गई है। यहां कोई परिचय पट्टी नहीं लगी जिससे लोगों को पता चल सके कि शहीद भगत सिंह को अंग्रेजों ने हवालात में पूरी रात बंद रखा था। शहीद भगत सिंह जागृति मंच के प्रधान जगदीश भगत सिंह ने बताया कि सरकार को हुसैनीवाला व खटकड़कलां की तर्ज पर इसे विकसित करना चाहिए ताकि देश विदेश के लोगों जानकारी मिल सके।
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हवालात में एक कुर्सी पर दो पेंटिंग और बुझे हुए कुछ काले दिए रखे हैं, जिन्हें देखकर मानों लगता है कि इस सपूत को वर्षों पहले किसी ने याद किया हो। नाम के लिए कुछ दीवारों पर पेंटिंग्स बनाई गई हैं, जो थोड़ा बहुत हवालात की शोभा बढ़ा रही हैं, लेकिन सलाखों पर धूल मिट्टी और मकड़ी के जाल लगे हुए हैं। लगता है वर्षों पहले इसकी सफाई हुई हो।
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मीरपुर (मुबारकपुर) के इस हवालात को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अंग्रेजों ने यहां बंदी बना कर रखा गया होगा। इसकी हालत काफी खस्ता हो गई है। इस तरफ न तो पूर्व सरकार ने ध्यान दिया और न ही पंजाब की वर्तमान सरकार ध्यान दे रही है।
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शिमला ले जाते समय एक रात के लिए रखा था इस हवालात में
इस हवालात में 14 जून, 1929 को शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को बंदी बनाकर रखा था। शिमला कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय घग्गर नदी में पानी का बहाव ज्यादा आने के चलते 1881 में बनी पुलिस चौकी के हवालात में एक रात के लिए अंग्रेजों द्वारा शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को रखा था। उस समय घग्गर नदी पर पुल नहीं था और किश्तियों की मदद से नदी पार की जाती थी।
एक तो शाम हो गई थी और पानी का बहाव तेज था, इसलिए अंग्रेजों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ा। उस समय अंग्रेज पुलिस के मुलाजिमों ने मुबारकपुर के विश्राम गृह में रात गुजारी और भगत सिंह और उनके साथियों को हवालात में रखा था।
परिचय पट्टी भी नहीं लगी
इस हवालात के बाहर शहीद-ए-आजम की एक छोटी सी प्रतिकृति लगाई गई है। यहां कोई परिचय पट्टी नहीं लगी जिससे लोगों को पता चल सके कि शहीद भगत सिंह को अंग्रेजों ने हवालात में पूरी रात बंद रखा था। शहीद भगत सिंह जागृति मंच के प्रधान जगदीश भगत सिंह ने बताया कि सरकार को हुसैनीवाला व खटकड़कलां की तर्ज पर इसे विकसित करना चाहिए ताकि देश विदेश के लोगों जानकारी मिल सके।