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Amritsar: एसजीपीसी अध्यक्ष धामी बोले- राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी छोड़े जा सकते हैं तो सिख कैदी क्यों नहीं?
Fri, 11 Nov 2022 07:50 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 11 Nov 2022 07:50 PM IST
सार
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख कैदियों की रिहाई के मामले में केंद्र व पंजाब समेत अन्य राज्यों की सरकारें सिफारिश क्यों नहीं कर रही हैं? उन्होंने यह भी कहा कि सिख कैदियों की रिहाई सजा पूरी होने से जुड़ी है जबकि राजीव गांधी हत्या के दोषियों को समय से पहले रिहा किया जा रहा है। यह भेदभाव सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
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एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को अगर रिहा कर सकता है तो अपनी सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों को रिहा क्यों नहीं किया जा सकता? सरकारें सिखों के प्रति भेदभाव वाली नीतियां अपना रही हैं। देश की अलग-अलग जेलों में तीन दशकों से बंद सिख कैदियों की रिहाई के लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है। परंतु सरकारों की ओर से कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है।
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धामी ने कहा कि कई मामले जिनमें हत्याएं, दुष्कर्म आदि जैसे संगीत अपराध वाले कैदियों पर सरकारें मेहरबान है। दूसरी ओर सिख कैदियों के साथ इस मामले में अन्याय किया जा रहा है। यहां तक कि दविंदरपाल सिह भुल्लर के मामले में तो दिल्ली सरकार की सिर्फ एक सहमति से ही रिहाई हो सकती है। परंतु दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिख विरोधी भावनाएं प्रगट कर रहे हैं। इसी तरह गुरदीप सिंह खैड़ा की रिहाई का कामला भी कर्नाटक सरकार के पास लंबित है।
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धामी ने कहा कि बलवंत सिंह राजोआणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्पष्ट हिदायतों के बावजूद सरकार टाल-मटोल वाली नीतियां अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर राजीव गांधी हत्याकांड में शामिल दोषियों की रिहाई के लिए तमिलनाडु सरकार सिफारिश कर सकती है तो
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सिख कैदियों की रिहाई के मामले में केंद्र व पंजाब समेत अन्य राज्यों की सरकारें सिफारिश क्यों नहीं कर रही हैं? उन्होंने यह भी कहा कि सिख कैदियों की रिहाई सजा पूरी होने से जुड़ी है जबकि राजीव गांधी हत्या के दोषियों को समय से पहले रिहा किया जा रहा है। यह भेदभाव सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।