राम रहीम को पैरोल: SGPC ने जताया विरोध, कहा- संगरूर उपचुनाव में राजनीतिक फायदे के लिए बाहर लाया गया
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से पहले भी चुनाव के समय राम रहीम को फरलो दे चुकी है।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने गुरमीत राम रहीम को हरियाणा सरकार द्वारा एक महीने की पैरोल देने पर सख्त एतराज जताया है। एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि यह फैसला सरकार की दोहरी सोच को दर्शाने वाला है। एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि एक तरफ सरकार सिख बंदी सिंहों की सजा पूरी होने के बाद भी जेल से बाहर नहीं ला रही जबकि दूसरी तरफ राम रहीम, जो दुष्कर्म और कत्ल जैसे संगीन मामलों में सजा काट रहा है, को बार-बार जेल से बाहर लाया जा रहा है। धामी ने कहा कि राम रहीम को अब एक बार फिर संगरूर चुनाव के समय फायदा लेने के लिए पैरोल दी है, जो पूरी तरह से गलत है।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर केंद्र सरकार ने सिख बंदियों को रिहा करने का एलान किया था लेकिन सरकार की बदनीयती के चलते उसे अभी तक पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सिख संस्थाओं ने इस मामले को बार-बार उठाने के बाद भी सरकारें कोई सार्थक जवाब नहीं दे रहीं, जबकि राम रहीम जिसका वर्ष 2015 में बरगाड़ी में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के साथ सीधा संबंध जुड़ता है और यह शख्स सिखों की धार्मिक भावनाओं का कातिल है, इस पर सरकारें हमेशा मेहरबान रहीं हैं।
उन्होंने कहा कि बड़े दुख की बात है कि हरियाणा और केंद्र की भाजपा सरकार की तरफ से मिलकर राजनीति की जा रही है। धामी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से पहले भी चुनाव के समय राम रहीम को फरलो दे चुकी है और अब एक बार फिर संगरूर चुनाव के समय फायदा लेने के लिए पैरोल दी है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि राम रहीम को सरकारों की तरफ से दिए जाने वाले राजनीतिक फायदे को सिख कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका सख्त विरोध किया जाएगा।