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Punjab: राज्यपाल से मिला SGPC का प्रतिनिधिमंडल, धामी बोले- केवल संसद ही कर सकती है एक्ट में संशोधन

Thu, 22 Jun 2023 09:08 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 22 Jun 2023 09:08 PM IST
सार

एसजीपीसी अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है कि पंजाब सरकार द्वारा गुरुद्वारा एक्ट 1925 में संशोधन के जरिये एसजीपीसी के प्रावधानों में किया गया हस्तक्षेप असांविधानिक है और इसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

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SGPC delegation met the Governor of Punjab
पत्रकारों से बात करते एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में पारित सिख गुरुद्वारा संशोधन विधेयक-2023 को मंजूरी न देने की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट धामी के अलावा सीनियर उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कायमपुर, कनिष्ठ उपाध्यक्ष अवतार सिंह रिया, महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल, उपसचिव शाहबाज सिंह और लखवीर सिंह शामिल रहे।

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राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए धामी ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है कि पंजाब सरकार द्वारा गुरुद्वारा एक्ट 1925 में संशोधन के जरिये एसजीपीसी के प्रावधानों में किया गया हस्तक्षेप असांविधानिक है और इसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। राज्यपाल ने विस्तार से उनकी बात सुनने के बाद भरोसा दिलाया है कि वह संविधान के अनुसार इस विधेयक की जांच करेंगे और अन्याय नहीं होने देंगे।
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उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सिख मामलों में दखल दे रही है। विधानसभा में गुरबाणी प्रसारण को मुद्दा बनाकर सरकार ने सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुद्वारा अधिनियम में कोई भी संशोधन केवल एसजीपीसी की सिफारिशों के साथ केंद्र सरकार द्वारा ही किया जा सकता है। पंजाब सरकार को एसजीपीसी के प्रबंधों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

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धामी ने कहा कि गुरबाणी प्रसारण का मामला पूरी तरह प्रबंधकीय है, जिसे आम आदमी पार्टी अपने सियासी हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार का मकसद एसजीपीसी को कमजोर करना है लेकिन सिख कौम ऐसा नहीं होने देगी। सरकार ने गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी सरकार के दो पैरामीटर हैं, एक डीजीपी की नियुक्ति अपने अधीन लाने के लिए और दूसरे एसजीसीपी के लिए।

इसलिए नहीं हो सके एसजीपीसी के चुनावः धामी

एसजीपीसी के 11 साल से चुनाव नहीं होने के सवाल पर धामी ने कहा कि एसजीपीसी का 2011 में चुनाव हुआ था लेकिन उसके बाद सहजधारी सिखों के मामले में 2016 तक एसजीपीसी पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में व्यस्त रही और 2016 से 2023 तक न तो चुनाव कराए गए और न ही बजट ही पेश हो सका।

पीटीसी से मिलते हैं दो करोड़ सालाना

श्री हरमंदिर साहिब से पवित्र गुरबाणी के एक चैनल के जरिये प्रसारण के मामले में एडवोकेट धामी ने स्पष्ट किया कि एसजीपीसी को पीटीसी चैनल से दो करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं। इसका उपयोग एसजीपीसी द्वारा चलाए जा रहे शैक्षिक संस्थानों और अस्पतालों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी द्वारा प्रसारण के लिए पैसा लिया जाता रहा है लेकिन दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और हेमकुंड साहिब संबंधी बोर्ड गुरबाणी के प्रसारण के लिए चैनलों को पैसा देते हैं। धामी ने पीटीसी चैनल का पक्ष लिए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पीटीसी से पहले तीन अन्य चैनल भी गुरबाणी प्रसारण के लिए आगे आए थे लेकिन तकनीकी स्तर पर सक्षम नहीं हो पाने के चलते वह चैनल पीछे हट गए।

गुरुघरों में घुसपैठ करना चाहती है सरकारः धामी

एसजीपीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन के जरिये भगवंत मान सरकार गुरुघरों में घुसपैठ का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आज एक संशोधन किया है, कल और संशोधन किए जाएंगे और गुरुघरों के कामकाज में सरकार का सीधा दखल बढ़ जाएगा। यह एक सैद्धांतिक लड़ाई है और उन्हें आशंका है कि सरकार विभिन्न मुद्दों को उठाकर एसजीपीसी के काम में दखल दे सकती है।

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