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स्कूल बस में बच्ची से छेड़छाड़, चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 17 May 2015 11:07 AM IST
बलवान करिवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़
बलवान करिवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 17 May 2015 11:07 AM IST
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sexual harassment of little girl in school bus, sensational exposure

दो चार दिन से नहीं बल्कि सालभर से मेरी लाडली का शोषण हो रहा था। कपड़ों के भीतर शरीर पर बड़े निशान मिलते थे। लेकिन मुझे पता नहीं चला। मैं इचिज समझकर मलहम लगा देती थी। लेकिन जब बच्ची ने बात करना तक बंद कर दिया और खाने-पीने से भी मना करने लगी तो शक हुआ। फिर जब उससे बात की तो उसने पूरा वाकया बताया।

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यह बात बच्ची की मां ने ‘अमर उजाला’ को बताई। मां ने कहा कि बच्ची का स्कूल में यह तीसरा साल है। पहले बस में बहुत कम बच्चे होते थे। बच्ची की मां ने बताया कि स्कूल लिखित में शिकायत नहीं देने की बात कहकर उन्हें झूठा साबित करने में जुटा है। स्कूल प्रशासन कार्रवाई करने की बजाय उन्हीं पर दबाव बनाता रहा और बार-बार चक्कर लगवाकर मामले को शांत करने में जुटा रहा।
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अब इस स्कूल में नहीं भेजना बच्ची को
पेरेंट्स ने साफ कहा उन्हें किसी तरह का कोई खर्च नहीं चाहिए। केवल न्याय चाहिए। अब वह अपनी लाडली को इस स्कूल में नहीं पढ़ाना चाहते। बच्ची को इसी सेशन से दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया जाए। प्रशासन इसमें मदद करे। इस स्कूल में किए खर्च पर ही दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया जाए।
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उनकी कभी भी बस कंडक्टर-ड्राइवर से बहस या मारपीट नहीं हुई। स्कूल प्रबंधन अपने आपको बचाने के लिए यह बात बना रहा है। कमीशन के सामने पेश होने आए ड्राइवर जसबीर सिंह ने खुद यह बात बताई। जबकि स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर संजीव कुमार ने शुक्रवार को दी स्टेटमेंट में पेरेंट्स और ड्राइवर-कंडक्टर के बीच बहस की बात कही थी।

मामले की गंभीरता को न समझने पर स्टेपिंग स्टोंस स्कूल प्रबंधन और बस ऑपरेटर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। बाल अधिकार आयोग ने अपनी जांच के बाद चंडीगढ़ पुलिस के आईजी को एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है।

कमीशन की चेयरपर्सन प्रो. देवी सिरोही के पैनल ने 8 घंटों की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला लिया। प्रो. सिरोही ने कहा कि स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर संजीव कुमार और बस ऑपरेटर अमरीक सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कमीशन ने पाया कि स्कूल प्रबंधन और बस ऑपरेटर ने मामले की जानकारी होने के बाद भी इसकी गंभीरता को समझने की कोशिश नहीं की।

पॉक्सो एक्ट के प्रोविजन के अनुसार स्कूल प्रबंधन और बस ऑपरेटर को 24 घंटे में एफआईआर करानी चाहिए थी। लेकिन दोनों ही मामले को उलझाने में लगे रहे। गर्ल चाइल्ड मामले में स्कूल प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी बनती है। चाइल्ड राइट्स कमीशन ने छुट्टी के बावजूद शनिवार को पेरेंट्स और बस ड्राइवर के बयान कमीशन ने रिकॉर्ड किए।


कमीशन के अनुसार पेरेंट्स और स्कूल प्रबंधन के बयान एक दूसरे से मेल नहीं खाते। कंडक्टर ने अपना गुनाह स्कूल में ही कुबूल कर लिया था। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना देने की जरूरत नहीं समझी। कंडक्टर को मानसिक परेशानी की दलील भी दी गई। अगर ऐसी परेशानी थी तो वह स्कूल में इंप्लाई कैसे था।

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