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इंटरनल कंप्लेंट कमेटी करेगी पीयू के पूर्व वीसी के खिलाफ यौन शोषण शिकायत की जांच: हाईकोर्ट
Thu, 17 Oct 2019 01:45 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 17 Oct 2019 01:45 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के पूर्व वीसी पर एक महिला प्रोफेसर द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने उप राष्ट्रपति द्वारा गठित इंटरनल कंप्लेंट कमेटी को सही बताते हुए उसे ही आगे जांच करने के आदेश दे दिए हैं। जस्टिस अरुण मोंगा ने यह आदेश महिला प्रोफेसर द्वारा इस कमेटी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला प्रोफेसर को जो भी आपत्तियां हैं, वह उसे कमेटी के समक्ष रख सकती हैं।
कमेटी इस मामले की जांच के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले महिला प्रोफेसर की आपत्तियों पर गौर करेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी की पसंद की जांच कमेटी नहीं गठित की जा सकती है। क्या एक कमेटी के खिलाफ शिकायत मिलने पर उसे भंग कर नई कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। कमेटी के सदस्य उनकी पसंद से कैसे नियुक्त किए जा सकते हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने चांसलर द्वारा जांच के लिए गठित कमेटी पर अपनी मोहर लगाते हुए उसे जांच के आदेश दे दिए हैं।
2013 में महिला प्रोफेसर ने लगाया था आरोप
बता दें कि मार्च 2013 में महिला प्रोफेसर ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन वीसी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में बॉडी कॉन्टेक्ट की कोशिश की थी। तब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी उनके साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया तो प्रोफेसर ने मामले की शिकायत कर दी थी। वहीं, पूर्व वीसी ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया था। महिला प्रोफेसर की शिकायत के बाद उपराष्ट्रपति जो कि पीयू के चांसलर भी हैं, ने इंटरनल कंप्लेंट कमेटी का गठन कर दिया था जिसे सीनेट और सिंडिकेट ने भी मंजूरी दे दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिसके खिलाफ शिकायत की गई है उनके तहत ही सीनेट और सिंडिकेट है। वह ही दोनों की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं ऐसे में जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती है।
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कमेटी इस मामले की जांच के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले महिला प्रोफेसर की आपत्तियों पर गौर करेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी की पसंद की जांच कमेटी नहीं गठित की जा सकती है। क्या एक कमेटी के खिलाफ शिकायत मिलने पर उसे भंग कर नई कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। कमेटी के सदस्य उनकी पसंद से कैसे नियुक्त किए जा सकते हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने चांसलर द्वारा जांच के लिए गठित कमेटी पर अपनी मोहर लगाते हुए उसे जांच के आदेश दे दिए हैं।
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2013 में महिला प्रोफेसर ने लगाया था आरोप
बता दें कि मार्च 2013 में महिला प्रोफेसर ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन वीसी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में बॉडी कॉन्टेक्ट की कोशिश की थी। तब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी उनके साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया तो प्रोफेसर ने मामले की शिकायत कर दी थी। वहीं, पूर्व वीसी ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया था। महिला प्रोफेसर की शिकायत के बाद उपराष्ट्रपति जो कि पीयू के चांसलर भी हैं, ने इंटरनल कंप्लेंट कमेटी का गठन कर दिया था जिसे सीनेट और सिंडिकेट ने भी मंजूरी दे दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिसके खिलाफ शिकायत की गई है उनके तहत ही सीनेट और सिंडिकेट है। वह ही दोनों की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं ऐसे में जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती है।
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