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Haryana: अनियोजित क्षेत्रों के आवासीय भूखंडों को अब व्यावसायिक में बदल सकेंगे, पढ़ें- कैबिनेट के अहम फैसले

Wed, 11 Oct 2023 10:28 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Oct 2023 10:28 PM IST
सार

सीएम ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया को शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से विकसित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुविधाजनक बनाया जाएगा। आवेदन के लिए संपत्ति मालिकों को रूपांतरण शुल्क के रूप में 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर जांच शुल्क का भुगतान और वाणिज्यिक कलेक्टर दर का पांच फीसदी विकास शुल्क देना होगा। 

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Several important decisions taken in Haryana Cabinet meeting today
हरियाणा कैबिनेट। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

हरियाणा मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में हरियाणा नगर शहरी निर्मित-योजना सुधार नीति 2003 को मंजूरी दी गई। इसके तहत हरियाणा के अनियोजित क्षेत्र में आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक उपयोग में बदलने की अनुमति दी जाएगी। शर्त यह है कि कॉलोनी कम से कम 50 साल पहले बनी हो। यह नीति हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), हाउसिंग बोर्ड (हरियाणा), हरियाणा राज्य औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकास निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के क्षेत्रों को छोड़कर नगर पालिका सीमा के मुख्य क्षेत्रों के भीतर बसी आवासीय क्षेत्रों में लागू होगी। मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 34 एजेंडे रखे गए।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि यह आवासीय भूखंड मुख्य रूप से नगर निगम के क्षेत्रों में स्थित मॉडल टाउन, पुर्नवास और सुधार ट्रस्ट योजनाओं में बसाई गई कॉलोनियों में स्थित हैं। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि करनाल और रोहतक मॉडल टाउन में ऐसे बहुत सी दुकानें, बूथ, शोरूम और मॉल बने हैं। बदलती परिस्थितियों के दौरान भूखंड मालिकों को आवासीय भूखंडों को गैर-आवासीय उद्देश्यों के लिए परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया है, जिनकी मूलरूप से अनुमति नहीं थी। अब इन्हें विनियमित करने की जरूरत महसूस की गई। उन्होंने बताया कि यह योजना उन प्लॉटों पर भी लागू होगी, जिन्होंने अपने प्लॉट को विभाजित कर दिया था। फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और प्लॉट की ऊंचाई जैसे पैरामीटर मूल आवासीय योजना के अनुरूप रहेंगे। मूल योजना की बिल्डिंग लाइन का भी रखरखाव किया जाएगा।

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31 मार्च तक करना होगा आवेदन, इसके बाद कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया को शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से विकसित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुविधाजनक बनाया जाएगा। आवेदन के लिए संपत्ति मालिकों को रूपांतरण शुल्क के रूप में 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर जांच शुल्क का भुगतान और वाणिज्यिक कलेक्टर दर का पांच फीसदी विकास शुल्क देना होगा। 

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परिवर्तित क्षेत्र पर उन्हें 160 रुपये प्रति वर्ग मीटर का कंपोजिशन शुल्क भी देना होगा। इसके लिए आवेदक को 31 मार्च 2024 तक आवेदन करना होगा। अगर इस समयावधि के दौरान भूखंड मालिक आवेदन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अवैध व्यावसायिक भवनों की पहचान करने और रास्ते के अधिकारों व प्रभावित भूखंडों का नक्शा बनाने के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। अगर किसी संपत्ति को अस्वीकार कर दिया जाता है या नियमितीकरण के लिए आवेदन नहीं किया जाता है तो नगर पालिकाएं अवैध निर्माण को तोड़कर इमारत को मूल स्थिति में बहाल कर सकती हैं या लाइसेंस रद्द कर सकती हैं।

सिंगल बूथ पर पहली मंजिल व बेसमेंट के निर्माण को मिली स्वीकृति

मंत्रिमंडल की बैठक में नगर पालिकाओं और नगर सुधार ट्रस्टों की ओर से आवंटित सिंगल (एकल) बूथ, दुकानों और सर्विस बूथों पर पहली मंजिल या बेसमेंट या दोनों के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए भी नीति को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। बूथ पर पहली मंजिल या बेसमेंट या दोनों के मौजूदा अनधिकृत निर्माण के नियमित करने के लिए 31 मार्च 2024 तक आवेदन करना होगा। 

पहली मंजिल या बेसमेंट या बूथ के निर्माण के लिए नई अनुमति के लिए समय सीमा तय नहीं है। यह नीति उन नियंत्रित क्षेत्रों पर लागू नहीं होगी, जिनके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति की आवश्यकता होती है। इसमें नगर पालिका सीमा के भीतर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से स्वीकृत लाइसेंस प्राप्त योजनाएं भी शामिल नहीं हैं। इसके अलावा नीति में तहबाजारी या खोका के तहत दुकानों या नगर पालिकाओं की ओर से आवंटित किसी भी अस्थायी संरचना को शामिल नहीं किया गया है।

इतना लिया जाएगा शुल्क

आवेदकों से प्रस्तावित कुल निर्मित क्षेत्र पर 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क लिया जाएगा। इसके विपरीत मौजूदा प्रथम तल या बेसमेंट निर्माण के नियमितीकरण के लिए शुल्क 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर है लेकिन यह भूतल पर संरचना सहित भूखंड पर प्रस्तावित और मौजूदा निर्मित क्षेत्र दोनों पर लागू होता है। इसके अतिरिक्त किसी भी अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र के लिए शुल्क, चाहे वह पहली मंजिल हो या बेसमेंट, अलग-अलग रहेगा। पहली मंजिल के लिए प्रति वर्ग मीटर वाणिज्यिक कलेक्टर दर का 5 प्रतिशत और बेसमेंट के लिए प्रति वर्ग मीटर वाणिज्यिक कलेक्टर दर का 2.5 प्रतिशत है। इसके अलावा निर्धारित सीमा के भीतर अवैध निर्माण को कम करने के लिए 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर का कंपोजीशन शुल्क भी लगेगा।

फुटकर पैसों पर नहीं होगी झिकझिक, पांच रुपये के हिसाब देना होगा बस किराया

बैठक में स्टेट कैरिज बसों के किराये में पांच रुपये तक के किराये को राउंड ऑफ करने की मंजूरी दी गई। पहले पांच किलोमीटर के बाद हर एक किलोमीटर पर एक रुपया चार्ज लिया जाता था। इससे सिक्कों या फुटकर पैसों की परेशानी होती थी। इसलिए निर्णय लिया गया है कि साढ़े सात किमी तक यात्रा करने पर पांच रुपये और आठ से दस किमी की यात्रा करने पर दस रुपये लिए जाएंगे।

हरियाणा डिजिटल मीडिया विज्ञापन नीति को मंजूरी

बैठक में हरियाणा डिजिटल मीडिया विज्ञापन नीति को मंजूरी दी गई। यह नीति सोशल मीडिया समाचार चैनलों और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर को शामिल करने के लिए लाई गई है। वर्ष 2007 और 2020 की मौजूदा नीति केवल प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेबसाइट तक ही सीमित थी। नई नीति के तहत सोशल मीडिया समाचार चैनलों को उनके ग्राहकों, अनुयायियों और सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की संख्या को ध्यान में रखते हुए पैनल में शामिल करने के लिए पांच श्रेणियां बनाई गई हैं। डीआईपीआर हरियाणा की ओर से इन श्रेणियों के अनुसार सोशल मीडिया समाचार चैनलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। पैनल सलाहकार समिति प्रत्येक श्रेणी, विज्ञापन प्रारूप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए समय-समय पर दरें तय करेगी।

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