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कृषि कानूनों का विरोध: सात राजनीतिक दल हुए एकजुट, राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी

Tue, 27 Jul 2021 10:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 27 Jul 2021 10:34 PM IST
सार

कृषि कानूनों के विरोध में सात राजनीतिक दल एक साथ आ गए हैं। इन दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा है। पत्र में मानसून सत्र में कृषि कानूनों को निरस्त करने पर चर्चा की मांग की गई है। एक साथ आने वाले राजनीतिक दलों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), सीपीआई (एम), सीपीआई, आरएलपी, जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल शामिल हैं। 

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Seven political parties united against farm laws
किसान आंदोलन की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को एक नया राजनीतिक मोर्चा तैयार हो गया। इस मोर्चे में शिरोमणि अकाली दल समेत सात राजनीतिक दल शामिल हुए हैं। कृषि कानूनों के विरोध में एकजुट हुए इन सभी राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी भेजकर मानसून सत्र में कृषि कानूनों को निरस्त करने पर चर्चा की मांग की है। 

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चिट्ठी में सभी दलों ने पेगासस जासूसी मामले में भी चर्चा की वकालत की है। छह अन्य राजनीतिक दलों के साथ शिरोमणि अकाली दल ने चिट्ठी भेजकर राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि उन्हें संसद में एनडीए सरकार के अड़ियल रवैये के बारे में उन्हें अवगत कराने के लिए समय दिया जाए, जो तीनों कृषि कानूनों पर सभी चर्चाओं को होने नहीं दे रही है। इस पत्र पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), सीपीआई (एम), सीपीआई, आरएलपी और जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधियों के अलावा शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने हस्ताक्षर किए हैं।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि वे कृषि कानूनों को रद्द करने पर चर्चा की मांग को लेकर स्थगन की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पत्र में कहा गया है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी जिसमें 550 से अधिक को जान गंवानी पड़ी हैं। 
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कृषि क्षेत्र को कारपोरेट को सौंपने के उद्देश्य से बनाए गए तीनों कानूनों के कारण लाखों लोगों की आजीविका खतरे में है लेकिन एनडीए सरकार इस मामले में लापरवाही दिखा रही है। हम अपील करते हैं कि केंद्र सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त करने का निर्देश दिया जाए और फिर किसानों के साथ बातचीत की जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की जा सके।

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