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बचकर रहें इन 7 सांपों से, जमीन से निकलते हैं और इनकी खूबियां हैरतंगेज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Feb 2017 09:23 PM IST
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जहरीले सांप
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क्या आप जानते हैं कि जमीन से 7 तरह के सांप निकलते हैं, जिनके काटने पर जान भी जा सकती है। अगर नहीं तो ये खबर आपके बड़े काम की है। देश के सबसे जहरीलों सांपों में से एक है कॉमन करैत। यह रात के वक्त काटता है। खासतौर पर रात 12 बजे से लेकर सुबह चार बजे के बीच, जब लोग सो रहे होते हैं। जंगल से निकलकर यह जमीन पर पड़े बिस्तर में घुसने की कोशिश करता है, ताकि उसे गरमाहट मिल पाए।
यह जमीन पर सो रहे लोगों के साथ चिपक भी जाता है। जब लोग हिलते-ढुलते हैं तो यह काट लेता है। जब यह काटता है तो लोगों को बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उसे किसी चींटी या मच्छर ने काटा हो। यह मुख्य रूप से कान के पास, गले, चेस्ट और पेट पर काटता है। कई बार देखा गया है कि सोते वक्त जब कॉमन करैत किसी व्यक्ति को काटता है तो वह सोता ही रह जाता है।
इसके काटने से मरीजों में न्यूरोपैरालाइसिस होता है और दम घुटने लगता है। इसके काटने पर 60 प्रतिशत व्यक्तियों की मौत हो जाती है। इसकी लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है। बीच-बीच में सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। पानी के साथ लगते गार्डन और फार्म हाउस में पाया जाता है। जब कॉमन करैत काटता है तो बिना देर किए मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यह चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में पाया जाता है।
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यह जमीन पर सो रहे लोगों के साथ चिपक भी जाता है। जब लोग हिलते-ढुलते हैं तो यह काट लेता है। जब यह काटता है तो लोगों को बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उसे किसी चींटी या मच्छर ने काटा हो। यह मुख्य रूप से कान के पास, गले, चेस्ट और पेट पर काटता है। कई बार देखा गया है कि सोते वक्त जब कॉमन करैत किसी व्यक्ति को काटता है तो वह सोता ही रह जाता है।
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इसके काटने से मरीजों में न्यूरोपैरालाइसिस होता है और दम घुटने लगता है। इसके काटने पर 60 प्रतिशत व्यक्तियों की मौत हो जाती है। इसकी लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है। बीच-बीच में सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। पानी के साथ लगते गार्डन और फार्म हाउस में पाया जाता है। जब कॉमन करैत काटता है तो बिना देर किए मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यह चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में पाया जाता है।
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रसेल वाइपर
जहरीले सांप
यह अजगर जैसा दिखता है। खाकी रंग के साथ इस पर गहरे भूरे रंग के फूल जैसे बने होते हैं। यह अक्सर सूखे पत्तों, झाड़ियों, खेती बाड़ी और पानी वाली जगहों पर मिलता है। सुखना लेक और रॉक गार्डन के आसपास अक्सर देखा जाता है। बहुत कम बार यह साफ जगहों पर देखा जाता है।
यह ऐसे नहीं काटता, जब किसी का पैर इस पर पड़ता है तो यह बचाव में काट लेता है। इसके काटने से सबसे ज्यादा किसानों की मौत होती है। जब यह काटता है तो कई लोग समझते हैं कि अजगर ने काट लिया। इस लापरवाही के कारण लोग इलाज नहीं कराते और उनकी मौत हो जाती है।
यह सालभर दिखते हैं। ठंड के वक्त यह झाड़ियों में धूप सेंकने भी निकलता है। रसेल वाइपर के काटने पर बहुत तेजी से दर्द होता है। उसके बाद शरीर में सूजन, उल्टियां, ब्लीडिंग और किडनी फेल हो जाती हैं।
यह ऐसे नहीं काटता, जब किसी का पैर इस पर पड़ता है तो यह बचाव में काट लेता है। इसके काटने से सबसे ज्यादा किसानों की मौत होती है। जब यह काटता है तो कई लोग समझते हैं कि अजगर ने काट लिया। इस लापरवाही के कारण लोग इलाज नहीं कराते और उनकी मौत हो जाती है।
यह सालभर दिखते हैं। ठंड के वक्त यह झाड़ियों में धूप सेंकने भी निकलता है। रसेल वाइपर के काटने पर बहुत तेजी से दर्द होता है। उसके बाद शरीर में सूजन, उल्टियां, ब्लीडिंग और किडनी फेल हो जाती हैं।
कोबरा
जहरीले सांप
कोबरा की गिनती भी जहरीले सांपों में होती है। यह तीन तरह का होता है। पहला चित्तीदार, काला और भूरे रंग का। रसेल वाइपर के मुकाबले इसकी फुहार कम होती है। यह लोगों से दूर रहना चाहता है, लेकिन चूहों का बहुत शौकीन होता है। चूहों के चक्कर में यह घर के किचन, स्टोर रूम और बाथरूम में घुसकर बैठ जाता है। यह तभी काटता है, जब किसी व्यक्ति का पैर या फिर हाथ लग जाए। इस इलाके में कोबरा सबसे ज्यादा पाया जाता है। यह कम से कम छह फुट लंबा होता है। इसके काटने पर भी व्यक्ति की मौत हो जाती है।
रैट स्नेक
जहरीले सांप
रैट स्नेक में जहर बिल्कुल भी नहीं पाया जाता। यह मुख्य रूप से गिलहरी, चिड़िया और उनके अंडे खाने का शौकीन होता है। चूहों को भी खाता है। गिलहरी और चिड़ियां के अंडे को खाने के लिए यह पेड़ों पर भी चढ़ जाता है। इसके काटने पर थोड़ी घबराहट होती है, लेकिन मौत का खतरा नहीं रहता। यह कई बार पेड़ों के सहारे घर के अंदर तक घुस जाता है। कई बार सांप विशेषज्ञ सलीम ने कूलर और एसी के अंदर से रेट स्नैक को पकड़ा है।
चेकर्ड कीलबैक
जहरीले सांप
चेकर्ड कीलबैक पानी वाली जगहों के आसपास पाया जाता है। धनास लेक और घग्गर के इसे देखा जा सकता है। यह मुख्य रूप से मछली और मेंढक खाने का शौकीन होता है। कई बार पानी की तलाश में नाले के सहारे किचन या कमोड में पहुंच जाता है। सांप की यह प्रजाति भी शहर में काफी पाई जाती है। इसमें जहर बिल्कुल नहीं होता।
वूल्फ स्नेक
जहरीले सांप
वूल्फ स्नेक बिना प्लास्टर वाली दीवारों पर आसानी से चढ़ जाता है। यह छिपकली के बच्चों और कॉकरोच खाने का शौकीन होता है। गहरे ब्राउन कलर होने के साथ यह ज्यादा मोटा नहीं होता। इसमें पीले रंग की धारियां होती हैं। इसमें भी जहर बिल्कुल नहीं पाया जाता। अजगर आमतौर पर यह सर्दियों के मौसम में ज्यादा दिखता है। यह भी काफी जहरीला होता है।
सांप के काटने पर क्या करें और क्या न करें
snake
पीजीआई चंडीगढ़ व प्राइवेट हास्पिटल के विशेषज्ञ बताते हैं कि सांप काटने पर मरीज को झाड़-फूंक या किसी देसी दवा दिलाने के बजाय उसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
मानसूनी सीजन में अस्पताल में एंटी वैनम वैक्सीन जिला और अस्पताल प्रशासन को प्राथमिकता के तौर पर उपलब्ध कराना चाहिए। पीजीआई में हर वक्त एंटी वैनम मौजूद रहती है। कई बार तो सांप काटने वाले पेशेंट में एंटी वैनम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
सांप के काटने के लक्षणः घाव के दो निशान, घाव के आसपास सूजन और लालपन, सांस लेने में दिक्कत, उल्टियां, आंखों के सामने अंधेरा, घाव वाले स्थान पर जलन, चेहरे और पैर में अकड़न
सांप काटने पर ये नहीं करें: सांप काटने वाले अंग को नहीं हिलाना चाहिए, पेशेंट को न तो चलना चाहिए और न ही दौड़ना चाहिए, घाव वाले स्थान पर न तो कट लगाएं, न ही उसे जलाएं, समय बर्बाद न करें, न तो डरना चाहिए और न तो डर फैलाना चाहिए।
मानसूनी सीजन में अस्पताल में एंटी वैनम वैक्सीन जिला और अस्पताल प्रशासन को प्राथमिकता के तौर पर उपलब्ध कराना चाहिए। पीजीआई में हर वक्त एंटी वैनम मौजूद रहती है। कई बार तो सांप काटने वाले पेशेंट में एंटी वैनम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
सांप के काटने के लक्षणः घाव के दो निशान, घाव के आसपास सूजन और लालपन, सांस लेने में दिक्कत, उल्टियां, आंखों के सामने अंधेरा, घाव वाले स्थान पर जलन, चेहरे और पैर में अकड़न
सांप काटने पर ये नहीं करें: सांप काटने वाले अंग को नहीं हिलाना चाहिए, पेशेंट को न तो चलना चाहिए और न ही दौड़ना चाहिए, घाव वाले स्थान पर न तो कट लगाएं, न ही उसे जलाएं, समय बर्बाद न करें, न तो डरना चाहिए और न तो डर फैलाना चाहिए।