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स्तन कैंसर में सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी दिला रही दर्द से निजात
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चंडीगढ़। स्तन कैंसर के मरीजों में सर्जरी के बाद हाथ में सूजन, कंधे में दर्द की समस्या आम बात है, लेकिन अब इसे सर्जरी के बावजूद होने से रोका जा सकता है। सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी के जरिए समय रहते डाइग्नोस कर संक्रमण रहित लिम्फ नोड्स को हटाने से रोका जा सकता है। इससे फ्लूएड का संचरण निर्बाध होता रहता है और दर्द और सूजन की स्थिति नहीं आती। यह जानकारी आंकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव बेदी व नरेंद्र कुमार भल्ला ने शनिवार को प्रेस क्लब में दी।
उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की सर्जरी इस तकनीक के प्रयोग के बिना हुई है, वे थोड़ी सजगता से दर्द से बच सकते हैं। उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि हाथ को लटकाकर न रखें। सोते वक्त हाथ को ऊपर की तरफ रखें और उसके नीचे एक या दो तकिया लगा लें। हथेली पर बॉल रखकर उसे दबाने वाली एक्सरसाइज नियमित करें। ज्यादा समय तक स्टॉकिंग पहनने से ज्यादा आराम मिलेगा। स्तन कैंसर सर्जन डॉ. नवल बंसल ने बताया कि स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों का एक मुख्य कारण संकोच के कारण उसकी डाइग्नोसिस में देर होना है। इसलिए माताएं खासतौर पर ध्यान दें। बेटियों को किशोरावस्था से ही इससे संबंधित जानकारी दें, ताकि वे किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल उसे साझा करें। स्तन कैंसर में खास बात यह है कि स्तन में होने वाली 90 प्रतिशत गांठ कैंसर नहीं होती, बस 10 प्रतिशत मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की सर्जरी इस तकनीक के प्रयोग के बिना हुई है, वे थोड़ी सजगता से दर्द से बच सकते हैं। उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि हाथ को लटकाकर न रखें। सोते वक्त हाथ को ऊपर की तरफ रखें और उसके नीचे एक या दो तकिया लगा लें। हथेली पर बॉल रखकर उसे दबाने वाली एक्सरसाइज नियमित करें। ज्यादा समय तक स्टॉकिंग पहनने से ज्यादा आराम मिलेगा। स्तन कैंसर सर्जन डॉ. नवल बंसल ने बताया कि स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों का एक मुख्य कारण संकोच के कारण उसकी डाइग्नोसिस में देर होना है। इसलिए माताएं खासतौर पर ध्यान दें। बेटियों को किशोरावस्था से ही इससे संबंधित जानकारी दें, ताकि वे किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल उसे साझा करें। स्तन कैंसर में खास बात यह है कि स्तन में होने वाली 90 प्रतिशत गांठ कैंसर नहीं होती, बस 10 प्रतिशत मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है।
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